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सीएम बोले-निष्ठा से काम करने वाले कार्यकर्ताओं को मिलेगा टिकट:विधायकों से कहा- जितना बजट मांगा, उतना दिया, अब निकाय चुनाव में जीत दिलानी है




मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने निकाय और पंचायत चुनाव में टिकट वितरण को लेकर कहा कि पार्टी के लिए निष्ठा से काम करने वाले को ही टिकट मिलेगा। उन्होंने बीकानेर से भाजपा विधायकों से भी साफ कहा कि आपने जितना बजट मांगा, उतना भाजपा सरकार ने दिया है, अब आपको भी निकाय और पंचायत चुनाव में सीट जीतकर देनी है। हर विधायक के काम का आकलन किया जाएगा। बीकानेर के भाजपा संभाग मुख्यालय में कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे मुख्यमंत्री ने करीब 20 मिनट तक कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा विधायकों से कहा कि वो पूरा प्रयास करें कि पार्टी प्रत्याशी की जीत हों। आपको जीत दिलाने में भी इन्हीं कार्यकर्ताओं की भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने निकाय और पंचायत चुनाव में पूरी ताकत से काम करने की अपील की। इस दौरान भाजपा विधायक जेठानन्द व्यास, ताराचंद सारस्वत, विश्वनाथ मेघवाल और अंशुमान सिंह भाटी, संभाग प्रभारी मिथलेश गौतम, बीकानेर नगर निगम चुनाव प्रभारी मुकेश दाधीच भी उपस्थित रहे। सभी विधायकों की ओर देखकर मुख्यमंत्री ने कहा कि आपने अपने अपने क्षेत्र के लिए जब जो मांगा, वो सरकार ने दिया है। अब आप भी कमर कसकर काम करें। सुराना, आचार्य और सिंह का नाम लिया
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि वो भी पार्टी के सामान्य कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे हैं। उन्होंने सामने बैठे भाजपा नेता विजय आचार्य, सत्यप्रकाश आचार्य, मोहन सुराना और अखिलेश प्रताप सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि इन सभी के साथ मैंने काम किया है। पार्टी के सीनियर नेता जालम सिंह भाटी, रामगोपाल सुथार, पूर्व मेयर नारायण चौपड़ा, सोहनलाल बैद भी उपस्थित रहे। भाजपा नेता श्याम सिंह हाडला तैयारी में व्यस्त रहे। सीएम के कार्यक्रम में सिद्धिकुमारी रही अनुपस्थित
हालांकि सीएम के कार्यक्रम में बीकानेर पूर्व की विधायक सिद्धि कुमारी नहीं आई। पार्टी कार्यक्रम में विधायक की अनुपस्थिति को लेकर कार्यकर्ताओं में भी चर्चा रही। इससे पहले वो 15 अगस्त के राज्य स्तरीय समारोह में भी दिखाई नहीं दी थी। हालांकि वेटरनरी कॉलेज के एटहोम कार्यक्रम में वे सीएम से मिलने पहुंची थीं। कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की
इससे पहले मुख्यमंत्री के साथ बैठक वाले सभागार में एंट्री को लेकर सिक्योरिटी और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का- मुक्की भी हुई। मुख्यमंत्री के अंदर जाने के बाद गेट को बंद कर दिया गया। पहले से साफ किया गया था कि जो बैठक में है, वो बाहर नहीं जाएं, वर्ना वापस अंदर नहीं आने दिया जाएगा। इसके बाद भी कार्यकर्ता इधर-उधर होते रहे, इसके कारण बाहर आए कार्यकर्ता फिर से अंदर प्रवेश नहीं पा सके।



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