Headlines

सुखाड़िया यूनिवर्सिटी प्रो. ढाका की बहाली वाले आदेश पर रोक:OBC सर्टिफिकेट विवाद में बर्खास्त प्रोफेसर को मिली राहत पर लगी हाईकोर्ट की ब्रेक




उदयपुर में मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में फिजिक्स डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. महेंद्र सिंह ढाका की बर्खास्तगी पर मिले स्टे के मामले में नया कानूनी मोड़ आ गया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रोफेसर ढाका के पक्ष में दिए गए स्टे आदेश पर रोक लगा दी है। ओबीसी प्रमाणपत्र विवाद में यूनिवर्सिटी ने 23 दिसंबर 2025 को ढाका की सेवाएं समाप्त की थी। इस पर करीब 2 महीने पहले ढाका को बर्खास्तगी पर स्टे मिला था। अब उसी आदेश पर फिर से इस आदेश में ढाका की चिंता बढ़ा दी है। यह मामला साल 2010 में यूनिवर्सिटी में हुई भर्तियों से जुड़ा हुआ है। नियुक्ति को लेकर फर्जीवाड़े और नियमों के उल्लंघन की मिली थी शिकायतें प्रोफेसर महेंद्र सिंह ढाका की नियुक्ति को लेकर फर्जीवाड़े और नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद कुलाधिपति ने साल 2022 में मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया था। मई 2023 में आई जांच रिपोर्ट में सामने आया कि प्रोफेसर ढाका की नियुक्ति ओबीसी आरक्षित पद पर बिना वैध प्रमाणपत्र और यूजीसी नियमों को दरकिनार करके की गई। इसी रिपोर्ट के आधार पर उदयपुर के प्रताप नगर थाने में उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ। यूनिवर्सिटी ने 23 दिसंबर 2025 को उन्हें पद से हटा दिया। सेवा से हटाए जाने के बाद प्रोफेसर ढाका ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई, लेकिन वहां से कोई अंतरिम राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने पुरानी याचिका में बदलाव किए बिना दूसरी याचिका दाखिल कर दी। यूनिवर्सिटी की ओर से हाईकोर्ट में अधिवक्ताओं ने दलील दी कि पहली याचिका वापस लेकर चालाकी से दूसरी याचिका में 27 मई 2026 को स्टे हासिल कर लिया, जिससे 6 महीने बाद प्रोफेसर ढाका को फिर से नौकरी पर बहाल कर दिया गया। कुलाधिपति की जांच रिपोर्ट के आधार पर हुई थी बर्खास्तगी की कार्रवाई यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना था कि बर्खास्तगी की यह पूरी कार्रवाई कुलाधिपति की जांच रिपोर्ट के आधार पर हुई थी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और विधिक प्रक्रियाओं के उल्लंघन को देखते हुए प्रोफेसर ढाका की बहाली वाले स्टे आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। वैध OBC प्रमाण नहीं होने के चलते हटाया था प्रोफेसर महेंद्र सिंह ढाका की नियुक्ति साल 2012 में ओबीसी (OBC) कैटेगरी के तहत एसोसिएट प्रोफेसर पद पर हुई थी। साल 2015 में उन्हें करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रमोशन भी मिला। विवाद तब शुरू हुआ, जब 2022 में राज्यपाल (कुलाधिपति) ने वर्ष 2010 की भर्तियों में गड़बड़ी की शिकायतों की जांच के लिए कमेटी बनाई थी। कमेटी ने रिपोर्ट में कहा था कि ढाका की नियुक्ति में नियमों का उल्लंघन हुआ। उनके पास वैध ओबीसी प्रमाण पत्र नहीं था। इसी रिपोर्ट के आधार पर यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट ने उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने और उन्हें नौकरी से हटाने का फैसला लिया। 23 दिसंबर 2025 को यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने उन्हें पद से हटाने के आदेश जारी कर दिए।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *