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सोच से ऊर्जा लौटेगी, जानिए 4 तरीके:11 हजार से ज्यादा बुजुर्गों के 12 साल के डेटा से सामने आया निष्कर्ष




अमेरिका के येल स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ने 11 हजार से अधिक बुजुर्गों पर 12 साल तक शोध किया। इसमें पाया कि जो बुजुर्ग उम्र बढ़ने को लेकर सकारात्मक नजरिया रखते थे, वे मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर सुधार करने में कहीं अधिक सफल रहे। रिसर्च की प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर बेका लेवी कहती हैं कि बुढ़ापे में सुधार दुर्लभ नहीं, बल्कि आम बात है, बशर्ते सोच सही हो। रिसर्च के निष्कर्ष के आधार पर विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय बुजुर्गों के लिए सकारात्मक मानसिकता के 4 तरीके पढ़िए। 1. मैं अभी भी उपयोगी हूं… इस विश्वास को रोजाना जीएं रिसर्च के मुताबिक- प्रो. बेका लेवी के अनुसार जब बुजुर्ग खुद को उपयोगी महसूस करते हैं तो दिमाग में कॉग्निटिव रिजर्व कैपेसिटी मजबूत होती है और रिकवरी दर काफी बढ़ जाती है। यह करें: ‘बुढ़ापे में अब हम किस काम के’ सोचकर बैठने के बजाय रोज एक ऐसा काम तय करें जिसमें आपका अनुभव शामिल हो। जैसे नाती-पोतों को पढ़ाना उनके साथ खेलना, घरेलू फैसलों में मार्गदर्शन देना या पड़ोसी की मदद करना। 2. ‘बुढ़ापा यानी बीमारी’ वाले नकारात्मक माहौल से दूरी बनाएं रिसर्च के मुताबिक- येल शोध में पाया गया कि मीडिया और विज्ञापनों में फैली बुढ़ापे की नकारात्मक छवियां अवचेतन मन में बैठकर बायोलॉजिकल स्ट्रेस डालती हैं। यह करें : टीवी धारावाहिकों या समाज की उन बातों से सचेत दूरी बनाएं जो बुढ़ापे को लाचारी और बीमारी के रूप में पेश करती हैं। इसकी जगह 70-80 की उम्र में सक्रिय लोगों की कहानियां पढ़ें और सुनें। शारीरिक गतिशीलता के लिए सप्ताह में कम से कम 2-3 बार हल्के प्रोग्रेसिव रेजिस्टेंस व्यायाम करें। 3. हर छोटे सुधार को पहचानें और उसकी ‘छोटी जीत’ मनाएं रिसर्च के मुताबिक- मस्तिष्क में एक ‘रिजर्व कैपेसिटी’ (छुपी हुई क्षमता) होती है। जब आप छोटे-छोटे सुधारों को पहचानते हैं, तो दिमाग को “मैं बेहतर हो रहा हूं’ का पॉजिटिव संकेत मिलता है। यह करें : यदि आप कल से 100 कदम ज्यादा चले, कोई भूली हुई बात याद आ गई या किसी की मदद की तो उसे मन में या डायरी में नोट करें और खुद को शाबाशी दें। यही सकारात्मक आदतें मस्तिष्क को “मैं बेहतर हो रहा हूं’ का संकेत देती हैं। इससे शारीरिक और मानसिक क्षमताएं जागृत बनी रहती हैं। 4. “मैं ठीक हो सकता हूं’- इस संभावना को मन में स्वीकारें रिसर्च के मुताबिक- जिन बुजुर्गों को अपनी रिकवरी पर भरोसा था, वे याददाश्त में गिरावट के बावजूद सामान्य मानसिक क्षमता पाने में 30% अधिक सफल रहे। यह करें : डॉक्टर से परामर्श लें या फिर योग व रिहैबिलिटेशन अपनाएं और मन में यह पक्का भरोसा बनाएं कि खोई हुई ताकत और याददाश्त वापस लौट सकती है। रोजाना अपने उठने-सोने का निश्चित समय, शारीरिक कार्य और रुचियों के साथ एक नियमित दिनचर्या बनाए रखें, जिससे हर दिन का उद्देश्य बना रहे।

(डॉ. निर्मल सूर्यासीनियर न्यूरोलॉजिस्ट, बॉम्बे हॉस्पिटल, मुंबई)



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