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सोलन में नदियों में खनन, पहाड़ कटान पर रोक:भारी बारिश के मद्देनजर 31 अगस्त तक रहेगा प्रतिबंध लागू, गैर-जरूरी निर्माण कार्य भी नहीं होंगे




हिमाचल प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही लगातार हो रही भारी बारिश और प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे को देखते हुए सोलन जिला प्रशासन ने 31 अगस्त 2026 तक नदियों में हर प्रकार के खनन और निजी कार्यों के लिए किए जाने वाले पहाड़ कटान (हिल कटिंग) पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। प्रशासन द्वारा जारी आदेशों के तहत निजी विकास कार्यों के लिए पहाड़ों को काटने, गैर-जरूरी निर्माण गतिविधियों और अन्य सभी गैर-आवश्यक कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इसी तरह, खनन विभाग ने भी मानसून के इस संवेदनशील दौर में नदी तल (रिवर बेड) में चल रहे सभी प्रकार के खनन कार्यों को तुरंत बंद करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। विगत वर्षों की तबाही और आईएमडी के अलर्ट के चलते फैसला जिला दंडाधिकारी मनमोहन शर्मा ने अपने आधिकारिक आदेश में बताया कि वर्ष 2023 और पिछले वर्ष 2025 के मानसून सीजन के दौरान भारी बारिश, बादल फटने और अचानक आई बाढ़ के कारण पूरे सोलन जिले में बड़े पैमाने पर जान-माल का भारी नुकसान हुआ था। वर्तमान में भी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा लगातार रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किए जा रहे हैं, जिससे भूस्खलन और नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि का खतरा बना हुआ है। इसी गंभीर स्थिति को भांपते हुए यह कड़ा फैसला आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 33 और 34 के तहत जनजीवन, पर्यावरण और जिले के बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि आपदा राहत कार्य, क्षतिग्रस्त सार्वजनिक ढांचे की बहाली तथा सड़क, पेयजल, बिजली और अन्य आपातकालीन सेवाओं से जुड़े आवश्यक कार्यों को इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रखा गया है। बिना नोटिस होगी कानूनी कार्रवाई प्रशासनिक आदेशों के तुरंत बाद खनन विभाग ने भी जिले के सभी क्रशर संचालकों और खनन लीजधारकों को सख्त लहजे में चेतावनी जारी कर दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी संचालक द्वारा इन आदेशों की अवहेलना की जाती है या चोरी-छिपे खनन कार्य जारी रखा जाता है, तो बिना किसी पूर्व सूचना या कारण बताओ नोटिस के संबंधित अधिनियमों और नियमों के तहत सीधे एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। खनन विभाग ने केंद्र सरकार की ‘सस्टेनेबल सैंड माइनिंग मैनेजमेंट गाइडलाइंस-2016 एवं 2020’ का विशेष रूप से हवाला देते हुए कहा है कि बरसात के मौसम में नदी तल से रेत, बजरी और अन्य खनिजों का खनन करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। सभी लीजधारकों के लिए पर्यावरण स्वीकृति (इन्वायर्नमेंट क्लीयरेंस) और स्वीकृत माइनिंग प्लान की शर्तों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है। जिला माइनिंग अधिकारी की दोटूक; नदियों में चल रही लीज बंद, इस पूरे मामले और जमीनी स्तर पर इसके क्रियान्वयन को लेकर जिला माइनिंग अधिकारी दिनेश कुमार ने दोटूक शब्दों में कहा कि बरसात के मौसम में नदियों का जलस्तर कभी भी अचानक बढ़ सकता है, जिससे वहां काम करने वाले मजदूरों और मशीनरी की जान को सीधा खतरा रहता है। इसी के चलते सोलन जिले की सभी वैध माइनिंग लीज साइट्स पर तत्काल प्रभाव से माइनिंग कार्य पूरी तरह रोक दिया गया है। उन्होंने साफ किया कि विभाग की विशेष टीमें और फ्लाइंग स्क्वाड जिले के विभिन्न नदी क्षेत्रों और क्रशरों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखेंगे। अगर इस प्रतिबंध के बावजूद भी कोई माफिया या ठेकेदार नियमों की धज्जियां उड़ाता हुआ पाया गया, तो उसकी लीज रद्द करने के साथ-साथ वाहनों को जब्त करने जैसी बेहद ठोस और दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।



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