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- Avdheshanand Giri Maharaj Life Lesson. Knowledge Reveals The Truth; May Our Speech Never Contain A Word That Could Become A Cause Of Anyone’s Humiliation.
हरिद्वार4 घंटे पहले
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हमारी वाणी में ऐसा कोई भाव न हो, जो किसी के अपमान का कारण बन सकता है। वाणी का तप अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए हमें अपने वाणी-व्यवहार के लिए हमेशा संवेदनशील रहना चाहिए। मधुर और शुद्ध वाणी के माध्यम से हम प्रेम, प्रसन्नता और प्रियता हासिल कर सकते हैं। हमारे अच्छे और सकारात्मक विचार समाज में दिव्यता का वातावरण बना सकते हैं। हम अपने प्रत्येक शब्द को सोच-समझकर बोलें, किसी को आहत न करें और अपनी वाणी को पवित्र, मधुर, सरल और कल्याणकारी बनाकर समाज में सकारात्मकता फैलाएं।
आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए बोलते समय किन बातों का ध्यान रखें?
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