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हमीदिया में डायलिसिस के बाद बुजुर्ग की सांसें उखड़ीं:पीठ के नीचे बोतल रखकर दबाने का आरोप, आयुष्मान के बाद भी 5 हजार खर्च का दावा




हमीदिया अस्पताल में डायलिसिस के दौरान 75 वर्ष से अधिक उम्र के मरीज के साथ कथित तौर पर लापरवाही का मामला सामने आया है। मरीज के परिजन ने डायलिसिस प्रक्रिया के दौरान शरीर पर असामान्य तरीके से दबाव डालने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इसके बाद मरीज को सीने और गले में दर्द, सूजन के साथ सांस लेने में परेशानी होने लगी। जांच के बाद फेफड़े में हवा भरने की बात सामने आने का भी परिजन ने दावा किया है। मरीज की गुरुवार की गुरुवार को अस्पताल से छुट्‌टी हुई है। परिजन के मुताबिक कंछीदी लाल को 20 अगस्त को इलाज के लिए हमीदिया अस्पताल लाया गया था। ओपीडी में परीक्षण के बाद किडनी संबंधी समस्या के चलते उन्हें भर्ती किया गया। इलाज के दौरान डायलिसिस की गई। मरीज के बेटे राजेंद्र चंदेल का आरोप है कि इसी दौरान उनके पिता की पीठ के नीचे प्लास्टिक की सख्त बोतल रख दी गई और शरीर पर तेजी से दबाव डाला गया। इसके बाद मरीज को लगातार परेशानी होने लगी। बता दें कि इस मामले के बारे में हमीदिया अस्पताल प्रबंधन में अधीक्षक और डीन से संपर्क करने की कोशिश की गई मगर वहां से कोई जवाब नहीं मिला। मरीज बोला- डायलिसिस के बाद शुरू हुई तकलीफ मरीज कंछीदी लाल के अनुसार डायलिसिस के दौरान उन्हें असहज स्थिति में रखा गया था। उनका कहना है कि शरीर के नीचे बोतल रखकर दबाव डाले जाने के बाद सीने और गले में दर्द व सूजन महसूस हुई। अब उठने-बैठने और सांस लेने में भी परेशानी हो रही है। डॉक्टरों ने पुरानी बीमारी को बताया वजह परिजन का कहना है कि हालत बिगड़ने पर उन्होंने डॉक्टरों से कारण पूछा। उनके अनुसार डॉक्टरों ने बताया कि कई साल पहले बीड़ी पीने के कारण फेफड़े में बना गुब्बारा फट गया है। इसके चलते फेफड़े में हवा भर गई और अब नली डालकर उपचार करना पड़ेगा। हालांकि, परिवार इस वजह को लेकर संतुष्ट नहीं है। राजेंद्र का कहना है कि डायलिसिस शुरू होने से पहले उनके पिता को इस तरह की कोई तकलीफ नहीं थी। उनकी परेशानी उसी दिन शुरू हुई, जिस दिन डायलिसिस हुई। ऐसे में परिजन डायलिसिस के दौरान हुई प्रक्रिया और बाद में सामने आई समस्या के बीच संबंध की जांच की मांग कर रहे हैं। आयुष्मान कार्ड के बाद भी बाहर से सामान खरीदने का आरोप राजेंद्र का आरोप है कि मरीज का इलाज आयुष्मान योजना के तहत होने के बावजूद एवी लाइन में इस्तेमाल होने वाली नली और कुछ दवाइयां अस्पताल में उपलब्ध नहीं कराई गईं। इन्हें बाहर से खरीदने में परिवार को करीब 4 से 5 हजार रुपए खर्च करने पड़े। 181 पर शिकायत के बाद दबाव का आरोप मामले को लेकर राजेंद्र ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर शिकायत भी दर्ज कराई। उनका आरोप है कि शिकायत की जानकारी सामने आने के बाद वार्ड 7ए/बीए में तैनात डॉक्टरों ने खर्च की रकम वापस करने की बात कहते हुए शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया। राजेंद्र ने डॉ. हरीश और डॉ. शालीन के नाम भी लिए हैं। परिजन का यह भी आरोप है कि डॉक्टर से बातचीत के दौरान एक महिला सुरक्षा गार्ड ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और डायलिसिस के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया की जांच की मांग की है।



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