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हरियाणा में IIT के लिए हिसार पहली पसंद:GLF की शहर के पास हजारों की एकड़ जमीन खाली; सिरसा, कुरुक्षेत्र-करनाल का भी दावा




हरियाणा में एक नए और स्वतंत्र भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) की स्थापना को लेकर सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा 300 से 500 एकड़ जमीन की तलाश शुरू करते ही प्रदेश के दिग्गज लॉबिंग में जुटे हैं। हर कोई चाहता है कि यह प्रतिष्ठित संस्थान उनके संसदीय क्षेत्र या गृह जिले में आए। चूंकि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हरियाणा भाजपा के प्रभारी रह चुके हैं, इसलिए राज्य के नेता दिल्ली तक अपनी आवाज पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। फिलहाल इस रेस में पांच बड़े नाम सामने आ रहे हैं, जिनमें हिसार सबसे आगे चल रहे हैं। इसका कारण है कि हिसार में गवर्नमेंट लाइवस्टॉक फार्म (GLF) सहित हजारों एकड़ सरकारी जमीन उपलब्ध है। इससे सरकार को किसी निजी कृषि भूमि का अधिग्रहण नहीं करना पड़ेगा, जिससे न तो कोई किसान परिवार प्रभावित होगा और न ही सरकार पर वित्तीय बोझ पड़ेगा। यह 100 साल की भविष्य की विस्तार योजनाओं के लिए पर्याप्त है। जानिए रेस में कौन-सा जिला कहां, समझें समीकरण… सिरसा रेस का सबसे मजबूत दावेदार : ऐलनाबाद विधानसभा के मीठी सुरेरा गांव का नाम इस समय सबसे ऊपर चल रहा है। सिरसा जिला प्रशासन ने यहां 300 एकड़ से अधिक जमीन चिह्नित करने के निर्देश दे दिए हैं। पंजाब और राजस्थान की सीमाओं के नजदीक होने के कारण तीन राज्यों के छात्रों के लिए यह सबसे बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है। मगर सबसे बड़ी अड़चन कनेक्टिविटी की है। ऐलनाबाद कनेक्टविटी के मामले में आज भी कहीं ना कहीं पिछड़ा हुआ है। हिसार को कनेक्टविटी और लैंड का बेनिफिट : कैबिनेट स्तर पर हिसार के पास 300 एकड़ पंचायती जमीन का प्रस्ताव पहले ही तैयार किया जा चुका है। बालसमंद की पंचायत ने इसके लिए लिखित सहमति भी दे दी है। वहीं हिसार में गवर्नमेंट लाइवस्टॉक फार्म (GLF) के पास हजारों एकड़ सरकारी जमीन उपलब्ध है, जिससे सरकार को निजी कृषि भूमि का अधिग्रहण नहीं करना पड़ेगा। महाराजा अग्रसेन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और 4200 एकड़ में बन रहा इंटीग्रेटेड एविएशन हब आईआईटी के रिसर्चर्स और वैज्ञानिकों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। करनाल और कुरुक्षेत्र को सीएम सिटी का फायदा : कुरुक्षेत्र मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का गृह जिला है और वे यहीं की लाडवा सीट से विधायक हैं। सांसद नवीन जिंदल भी इसके लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। वहीं करनाल पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर का संसदीय क्षेत्र है। दिल्ली-चंडीगढ़ जीटी रोड बेल्ट होने के कारण इसकी कनेक्टिविटी शानदार है। हालांकि, इन दोनों जिलों की राजस्थान से दूरी एक कमजोर पक्ष है। गुरुग्राम-फरीदाबाद कॉर्पोरेट हब, जमीन की किल्लत : उद्योग जगत और आईटी कंपनियों के नजदीक होने के कारण केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के क्षेत्र गुरुग्राम की संभावनाएं हमेशा ज्यादा रहती हैं। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती एकमुश्त 300-500 एकड़ सरकारी जमीन का न मिलना है। इसके अलावा, पास ही दिल्ली आईआईटी होने के कारण भी इसका दावा थोड़ा कमजोर पड़ता है। भिवानी-महेंद्रगढ़ में पंचायतों की पहल : सांसद धर्मबीर सिंह और राज्यसभा सांसद किरण चौधरी इसके लिए पुरजोर लॉबिंग कर रहे हैं। भिवानी के चांदवास, महेंद्रगढ़ के पाली और खुड़ाना गांव की पंचायतों ने आईआईटी के लिए अपनी जमीन देने का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है। पिछले 20 साल में हरियाणा को मिले ये 27 संस्थान हरियाणा को 20 साल में अब तक 27 संस्थान मिल चुके हैं। रोहतक, सोनीपत और झज्जर बेल्ट में आईआईएम, एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, एफडीडीआई (FDDI), निफ्टम (NIFTEM), नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, आईआईआईटी (IIIT), सीपेट (CIPET), आईआईटी दिल्ली के दो एक्सटेंशन सेंटर, नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट, ग्लोबल सेंटर फॉर न्यूक्लियर एनर्जी पार्टनरशिप और सैनिक स्कूल मिल चुके हैं। वहीं सेंट्रल यूनिवर्सिटी (महेंद्रगढ़), एम्स हरियाणा व सैनिक स्कूल (रेवाड़ी), एनआईटी (NIT), नाइलीट (NIELIT) व एनआईडी (NID) (कुरुक्षेत्र) में हैं। वहीं पंचकूला, करनाल और गुरुग्राम में निफ्ट (NIFT), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा, नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी, हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी, सैनिक स्कूल कुंजपुरा, नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर और इंडियन नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी खुल चुकी हैं। हिसार में चैंबर ऑफ कॉमर्स ने प्रयास शुरू किए वहीं क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने और हिसार में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) की स्थापना की मांग को लेकर ग्रेटर हिसार चैंबर ऑफ कॉमर्स (GHCC) ने अपनी मुहिम तेज कर दी है। जीएचसीसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मंत्री एवं पूर्व विधायक डॉ. कमल गुप्ता और भाजपा जिला अध्यक्ष डॉ. आशा खेड़ड़ से मुलाकात कर उन्हें 100 साल के भविष्य के विजन वाला एक विस्तृत ज्ञापन और तुलनात्मक विवरण सौंपा है। मनीष गोयल एवं नितिन गोयल के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र व राज्य सरकार के समक्ष हिसार का पक्ष मजबूती से रखने का आग्रह किया है।



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