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हरियाणा BJP के पूर्व अध्यक्ष बड़ौली-सिंगर मित्तल को क्लीन चिट:हाईकोर्ट ने रेप केस में कसौली कोर्ट का फैसला सही ठहराया; पीड़िता की पिटिशन खारिज




हिमाचल हाईकोर्ट ने हरियाणा BJP के पूर्व अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली और सिंगर रॉकी मित्तल से जुड़े कथित गैंगरेप केस में कसौली कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। जस्टिस राकेश कैंथला की बेंच ने पीड़िता की रिविजन पिटिशन खारिज कर दी है। पीड़िता ने कसौली कोर्ट के उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें पुलिस की कैंसिलेशन रिपोर्ट (CR) स्वीकार की गई थी। कोर्ट ने कहा कि केवल शिकायतकर्ता के हलफनामे या बयान के आधार पर आरोपी को समन जारी नहीं किया जा सकता। खासकर तब, जब मामले की मुख्य चश्मदीद गवाह ही घटना के आरोपों से इनकार कर रही हो। इस मामले में कसौली कोर्ट दो बार पुलिस की CR स्वीकार कर चुका है। अब सिलसिलेवार पढ़ें पूरा मामला… 13 दिसंबर 2024 को कसौली पुलिस ने दर्ज की FIR: पीड़ित महिला ने बड़ौली और रॉकी मित्तल के खिलाफ 13 दिसंबर 2024 को सोलन जिले के कसौली पुलिस थाने में गैंगरेप (IPC की धारा 376D) की धाराओं के तहत FIR करवाई। पीड़िता के अनुसार, उसके साथ गैंगरेप 23 जुलाई 2024 को किया गया। दोस्तों के साथ कसौली घूमने आई थी महिला: शिकायत में पीड़िता ने कहा, ‘मैं अपनी सहेली और बॉस अमित बिंदल के साथ कसौली घूमने गई थी। इस दौरान होटल में बड़ौली और रॉकी ने मुझे जबरन शराब पिलाई और सहेली के सामने ही हिमाचल टूरिज्म कॉर्पोरेशन के होटल रोज कॉमन में गैंगरेप किया। इसके बाद मारने की धमकी दी। फिर पंचकूला में बुलाकर झूठे केस में फंसाने की भी कोशिश की।’ इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। केस की गवाह बोली– कोई गैंगरेप नहीं हुआ: 15 जनवरी को पीड़ित महिला ने जिस सहेली को गवाह बनाया, वह पंचकूला में मीडिया के सामने आई। उसने कहा कि कसौली के होटल में वह सिर्फ सिंगर रॉकी मित्तल से मिली थी। वह न तो मोहन बड़ौली को जानती है और न ही उसने उन्हें वहां देखा। मुझे तो केस दर्ज होने के बाद पता चला कि मुझे गवाह बनाया है। इनका कुछ इश्यू है। इन्होंने कहा कि पैसे मिलेंगे और बॉस (अमित बिंदल) को टिकट मिलेगी। सहेली ने कहा कि अगर इतने बड़े होटल में गैंगरेप होता तो क्या वह चिल्लाती नहीं। आसपास के लोगों को पता नहीं चलता। यह पूरा मामला झूठा है। मैं शराब भी नहीं पीती। पुलिस को नहीं मिले सबूत, तब CR दी: कसौली पुलिस ने 2 माह से अधिक समय तक इस केस की जांच की, लेकिन सबूत नहीं मिले। पीड़िता ने अपना मेडिकल करवाने से भी इनकार कर दिया था। कई महीनों की देरी से FIR की वजह से पुलिस इस केस में सीसीटीवी, शराब के गिलास, बेड शीट जैसे सबूत नहीं जुटा पाई। होटल स्टाफ भी जानकारी नहीं दे पाया: जिस होटल में महिला ने गैंगरेप के आरोप लगाए थे, वहां के कर्मचारी भी इस केस के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता पाए। इससे कसौली पुलिस ने इस केस में क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दायर की थी। कोर्ट ने दोनों बार क्लोजर रिपोर्ट को सबूतों के अभाव में खारिज किया। पहली बार की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ महिला सोलन कोर्ट पहुंची। तब सोलन कोर्ट ने कसौली कोर्ट को फिर से पीड़िता की अपील सुनने के आदेश दिए। 8 जनवरी 2026 को पुलिस की कैंसिलेशन रिपोर्ट स्वीकार पुलिस जांच में घटना के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले। इसके बाद कसौली की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने 8 जनवरी 2026 को दूसरी बार पुलिस की कैंसिलेशन रिपोर्ट स्वीकार की। इस फैसले के खिलाफ पीड़िता हाईकोर्ट पहुंची थी। आज हाईकोर्ट ने भी कसौली कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है।



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