Headlines

हरीश के लिए भाजपा में सृजित हुआ था नया पद:साधारण परिवार से निकले; संगठनात्मक सूझबूझ से चढ़ते गए सफलता की सीढ़ियां




भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राष्ट्रीय महासचिव का दायित्व पाने वाले हरीश द्विवेदी का सफर मुश्किलों भरा रहा है। वह एक ऐसे साधारण परिवार से निकले, जिसका राजनीति से दूर-दूर तक लेना-देना नहीं था। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर उनकी संगठनात्मक सूझबूझ की बदौलत धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया और आज वह देश की सबसे बड़ी पार्टी के राष्ट्रीय चेहरों में शामिल हो चुके हैं। हरीश एक ऐसे नेता रहे, जिनकी भाजपा में इंट्री कराने के लिए एक नए पद का सृजन किया गया और उनके बाद उस पद पर किसी ने काम नहीं किया। विद्यार्थी परिषद से भाजपा में उनकी इंट्री राजनीतिक सचिव के पद पर हुई थी। उन्होंने भाजपा के तत्कालीन कद्दावर नेता केसरी नाथ त्रिपाठी के राजनीतिक सचिव के रूप में काम शुरू किया था। हरीश द्विवेदी का जन्म 22 अक्टूबर 1973 को बस्ती जिले के तेलियाजोत गांव में हुआ था। उनके पिता साधु शरण दुबे पेशे से शिक्षक थे, माता यशोदा देवी गृहिणी। वह छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे। विद्यार्थी परिषद से जुड़ने के बाद उन्हें पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में पहचान मिली। गोरखपुर में उन्होंने विद्यार्थी परिषद के विभाग संगठन मंत्री के रूप में काम किया। वह ऐसा दौर था जब गोरखपुर विश्वविद्यालय में लंबे समय से विद्यार्थी परिषद के प्रत्याशी को महत्वपूर्ण पदों पर जीत नहीं मिल पायी थी। यहीं उनका संगठनात्मक कौशल दिखा और एक के बाद एक उन्होंने कई कार्यकर्ताओं को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व महामंत्री के पद पर निर्वाचित कराया। डा. समीर सिंह, डा. योगेश प्रताप सिंह जैसे नाम इसमें शामिल हैं। प्रयागराज में भी जमायी विद्यार्थी परिषद की धाक गोरखपुर में लंबे कार्यकाल के बाद उन्हें प्रयागराज के विभाग संगठन मंत्री का दायित्व दिया गया। यहां भी उन्होंने अपनी धाक जमायी। साधारण कदकाठी के दुबले-पतले इस व्यक्ति को देखकर कोई उनकी क्षमता का आकलन नहीं कर पाता था। प्रयागराज में विद्यार्थी परिषद की स्थिति काफी खराब थी लेकिन उन्होंने निरंतर मेहनत की। अपनी पुरानी स्कूटर पर पूरे शहर का चक्कर लगाते। अच्छे छात्रों को विद्यार्थी परिषद से जोड़ने लगे।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के चुनाव में सपा सरकार के दौरान उन्होंने सपा के कद्दावर नेताओं को चैलेंज किया। छात्रसंघ के चुनाव में विद्यार्थी परिषद के प्रत्याशी ने कड़ी टक्कर दी। इस चुनाव के बाद विद्यार्थी परिषद की स्थिति इलाहाबाद में काफी मजबूत हो गई। अब जानिए कैसे हुआ भाजपा में प्रवेश हरीश द्विवेदी की संगठनात्मक कार्यशैली से भाजपा के तत्कालीन महामंत्री संगठन नागेंद्र काफी प्रभावित थे। उस वक्त केसरीनाथ त्रिपाठी भाजपा के बड़े नेता थे। उसी दौरान भाजपा में एक पद का गठन किया गया, राजनीतिक सचिव। इस पद पर पहली बार हरीश द्विवेदी को लाया गया। यहीं से भाजपा में उनकी शुरूआत हुई। वह केसरीनाथ त्रिपाठी के राजनीतिक सचिव के रूप में काम करने लगे। भाजयुमो में मिली जिम्मेदारी
हरीश द्विवेदी की राजनीति को शुरूआती दिनों से आब्जर्व करने वाले वरिष्ठ पत्रकार आलोक दूबे बताते हैं कि हरीश में संगठनात्मक सूझबूझ काफी बेहतर थी। राजनीतिक सचिव के रूप में उन्होंने काम किया। न तो उनसे पहले और न उनके बाद कोई इस पद पर आया। यूं कहें कि भाजपा ने यह पद की खत्म कर दिया। उन्हें भाजयुमो में प्रदेश महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी मिली थी। उसके बाद इसी मोर्चा में वह उपाध्यक्ष रहे। बाद में भाजयुमो का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। जानिए चुनाव मैदान में कैसे उतरे
बस्ती सदर विधानसभा सीट पर भाजपा का प्रदर्शन काफी खराब था। पार्टी ने 2012 में हरीश द्विवेदी को इस सीट से चुनाव लड़ने को कहा। हरीश चुनाव लड़े और 32 हजार से कुछ अधिक वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। उनकी हार जरूर हुई थी लेकिन उनके पूर्ववर्ती भाजपा प्रत्याशियों के मुकाबले उनका प्रदर्शन काफी अच्छा था। यही कारण था कि 2014 के लोकसभा चुनाव में वह भाजपा से प्रत्याशी बने और बस्ती में उस समय के सबसे ताकतवर नेता व तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह के छोटे भाई बृजकिशोर सिंह को शिकस्त देकर उन्होंने जीत दर्ज की। 2019 में एक और कद्दावर नेता रामप्रसाद चौधरी को हराने में कामयाब रहे। बढ़ती गई संगठनात्मक जिम्मेदारी 2019 की लोकसभा में दोबारा सांसद बनने के बाद एक बार फिर उनके संगठनात्मक सूझबूझ का उपयोग पार्टी ने किया। उन्हें राष्ट्रीय सचिव बनाकर नेशनल टीम में शामिल किया गया। असम राज्य का प्रभारी बनाया गया और साथ ही कई अन्य दायित्व भी दिए गए। हर जगह उनका प्रदर्शन बेहतर रहा। जिसके बाद उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई। हाल ही में उन्हें राजस्थान नगर निकाय चुनाव का प्रभारी भी बनाया गया है। भाजपा में संगठनात्मक एवं चुनाव प्रबंधक के रूप में बेहतर कार्य करने वाले चुनिंदा नए नेताओं में उनकी गिनती होने लगी है। ब्राह्मण मतदाताओं को साधने में मिलेगी मदद
हरीश द्विवेदी के जरिए पार्टी को ब्राह्मण मतदाताओं को साधने में भी मदद मिलेगी। पूर्वांचल में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी है और नई पीढ़ी में वह ब्राह्मण नेता के रूप में मजबूत नाम बनकर उभरे हैं। अब पार्टी ने उनका कद बढ़ाकर उनके नाम को और बड़ा बना दिया है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *