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हर्ष फायरिंग केस:साहेबगंज से BJP विधायक राजू सिंह को झटका:दिल्ली HC का दोष सिद्धि पर रोक से इनकार, याचिका खारिज; विधानसभा सदस्यता पर संकट गहराया




दिल्ली हाईकोर्ट से मुजफ्फरपुर के साहेबगंज से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह हो झटका लगा है। हर्ष फायरिंग केस में दोष सिद्धि पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। जिसके बाद राजू सिंह की कानूनी और राजनीतिक मुश्किलें बढ़ गई हैं। इससे पहले जुलाई 2026 में हाईकोर्ट ने विधायक राजू सिंह की 4 साल की जेल की सजा निलंबित करते हुए उन्हें जमानत दी थी। कानूनी जानकारों के अनुसार, दोष सिद्धि बरकरार रहने से उनकी विधानसभा सदस्यता पर संकट गहरा गया है। यह मामला 31 दिसंबर 2018 की रात का है। दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस में न्यू ईयर पार्टी चल रही थी। हर्ष फायरिंग के दौरान महिला आर्किटेक्ट डॉ. अर्चना गुप्ता के सिर में लगी थी। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। निचली अदालत ने सुनाई थी सजा इसी वर्ष जुलाई 2026 में दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट (राउज एवेन्यू कोर्ट) ने इस मामले की सुनवाई पूरी करते हुए राजू सिंह को दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें आईपीसी की धारा 304 पार्ट-2 (गैर इरादतन हत्या) और आर्म्स एक्ट के तहत 4 साल के साधारण कारावास और 25 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। यह जुर्माना राशि पीड़ित परिवार को मुआवजे के तौर पर दी जानी तय हुई है। दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की थी निचली अदालत के फैसले के बाद विधायक राजू सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने विधायक के वकीलों की दलीलों पर सुनवाई करते हुए उनकी सजा पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी और जमानत याचिका स्वीकार कर ली थी। राजू कुमार सिंह मुजफ्फरपुर जिले की साहेबगंज विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक हैं। वह नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार में पर्यटन मंत्री भी रह चुके हैं। विधायकी पर गहराया संकट जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के कड़े नियमों के अनुसार, यदि किसी भी सांसद या विधायक को 2 साल या उससे अधिक की सजा मिलती है, तो उसकी सदन की सदस्यता स्वतः ही समाप्त हो जाती है। इस नियम की वजह से मुजफ्फरपुर जिले की साहेबगंज सीट से भाजपा विधायक राजू सिंह की सदस्यता समाप्त जाएगी। हाईकोर्ट से दोष सिद्धि पर स्टे न मिलने के कारण अब वे अपनी सदस्यता बहाल कराने के योग्य नहीं रह गए हैं। इस तगड़े झटके के बाद अब उनके पास राहत के लिए देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का रुख करने का ही एकमात्र विकल्प शेष बचा है।



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