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हिमाचल की ITI में 50% सीटें रह गई खाली:49 दिन देरी से आवेदन मांगे; स्टूडेंट्स दूसरे राज्यों-स्कूलों में गए, प्राइवेट संचालकों में रोष




हिमाचल प्रदेश में इस साल इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI) में एडमिशन लगभग 50 दिन की देरी से कई गई। इससे सरकारी और प्राइवेट ITI में लगभग 50 फीसदी सीटें खाली रह गई हैं। कई ट्रेड में तो 60 से 65 फीसदी सीटों पर स्टूडेंट नहीं मिल पाए। इन्हें भरना अब चुनौतीपूर्ण हो गया है। आईटीआई में हर साल दाकिले के लिए आवेदन प्रक्रिया मई-जून में शुरू कर दी जाती थी। वर्ष 2025 में भी 26 मई को प्रवेश के लिए आवेदन मांगे गए। मगर इस साल 13 जुलाई को आईटीआई में प्रवेश प्रक्रिया शुरू की गई। यानी पिछले साल की तुलना में इस बार करीब 49 दिन की देरी हुई। यही देरी अब आईटीआई में खाली पड़ी सीटों की बड़ी वजह मानी जा रही है। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने इस साल 10वीं कक्षा का रिजल्ट 10 मई को घोषित कर दिया था। रिजल्ट आने के बाद विद्यार्थियों के सामने आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल, कॉलेज और आईटीआई जैसे विकल्प होते हैं। ऐसे में प्राइवेट आईटीआई संचालकों का सवाल है कि जब विद्यार्थियों को समय पर आगे का विकल्प नहीं दिया गया तो वे दो महीने तक आईटीआई में प्रवेश का इंतजार क्यों करेंगे? दूसरे राज्यों में शिफ्ट हुए कुछ स्टूडेंट्स संचालकों के मुताबिक, 10 मई को रिजल्ट आने के बाद यदि मई-जून में ही आईटीआई की प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी जाती तो विद्यार्थियों को समय पर सीट मिल सकती थी। मगर 12 जुलाई तक आवेदन प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। इससे कुछ बच्चे बाहरी राज्यों की ITI में गए या फिर स्कूल-कॉलेज में दाखिला लिया। इसी वजह से आईटीआई में आधी सीटें खाली रह गई है। प्राइवेट आईटीआई संचालकों में इसे लेकर खासा आक्रोश है और वह तकनीकी शिक्षा विभाग पर इसका ठीकरा फोड़ रहे हैं। पहले ही एक चौथाई ट्रेड प्रशिक्षकों की कमी से बंद आईटीआई में दाखिलों की समस्या ऐसे समय सामने आई है, जब प्रदेश की कई आईटीआई पहले से अनुदेशकों की कमी के कारण लगभग 200 यूनिट बंद हो चुके है। यदि 200 यूनिट बंद नहीं होते तो आईटीआई में खाली सीटों की संख्या 60 से 70 फीसदी होती।
प्रदेश में 133 सरकारी और करीब 92 निजी आईटीआई हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में करीब 133 सरकारी और 92 निजी आईटीआई हैं। इन संस्थानों में हर साल लगभग 12 हजार विद्यार्थी दाखिला लेते हैं। आईटीआई में विभिन्न तकनीकी और व्यावसायिक ट्रेड के माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगार और स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। भारत सरकार की अप्रूवल पर होती है एडमिशन: डायरेक्टर तकनीकी शिक्षा निदेशक रोहित राठौर ने बताया कि ITI में एडमिशन स्टेट के लेवल पर नहीं होती। यह भारत सरकार की अप्रूवल के बाद शुरू होती है। अनुदेशक की मैपिंग के कारण यह समस्या पूरे देश में आई है। उन्होंने बताया कि 14 अगस्त को दूसरे राउंड की काउंसलिंग पूरी होगी। उसके बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी कि कितनी सीटें खाली रहती है।



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