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हिमाचल- कॉरपोरेट राज के खिलाफ किसान-मज़दूर का प्रदर्शन:शिमला में धारा 163 तोड़ी; नारेबाजी करते हुए मॉल रोड पहुंचे प्रदर्शनकारी, भारत-अमेरिका ट्रेड डील रद्द हो




हिमाचल प्रदेश में वाम दल और किसान-मजदूर संगठनों ने सोमवार को विभिन्न मांगों को लेकर जगह-जगह प्रदर्शन किए। शिमला में भी प्रदर्शनकारी शाम साढ़े पांच बजे मॉल रोड स्थित पुलिस कंट्रोल रूम के बाहर नारेबाजी करते हुए गिरफ्तारी देने पहुंचे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मॉल पर लागू धारा 163 का उल्लंघन किया। प्रदर्शनकारियों ने श्रमिक और किसान नीतियों का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि मोदी सरकार श्रम कानूनों में बदलाव कर मजदूरों के अधिकारों को कमजोर कर रही है। उनका कहना था कि लंबे संघर्ष के बाद मजदूरों को आठ घंटे की कार्यप्रणाली का अधिकार मिला है, लेकिन अब काम के घंटे बढ़ाकर 12 घंटे करने की कोशिश की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि काम के घंटे बढ़ाने के बजाय मजदूरों की सुविधाएं और वेतन बढ़ाया जाए। खेती की बढ़ती लागत पर सरकार को घेरा इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने किसानों व मजदूरों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि खाद, बीज, डीजल-पेट्रोल, बिजली और अन्य कृषि संसाधनों की कीमत बढ़ने से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। किसानों को उनकी उपज का उचित लाभ नहीं मिल रहा है। संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकार की योजनाओं का लाभ किसानों तक कागजों के बजाय जमीन पर पहुंचना चाहिए। निजीकरण का भी विरोध वाम संगठनों ने सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण का विरोध किया। उनका कहना था कि निजीकरण से रोजगार की सुरक्षा कमजोर हो रही है और कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। ठेका व्यवस्था बढ़ने से श्रमिकों का शोषण भी बढ़ रहा है। महंगाई बेरोजगारी का मुद्दा भी उठाया संगठनों ने महंगाई और बेरोजगारी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि आम परिवारों पर लगातार आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, जबकि रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से श्रमिकों और किसानों के हित में नीतियों में बदलाव करने की मांग की। शिमला में प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े। प्रशासन की ओर से लागू धारा 163 के बावजूद प्रदर्शन करने पर पुलिस-प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी गई। वहीं, प्रदेश के अन्य जिलों में भी जिला और ब्लॉक स्तर पर संगठनों ने धरने और प्रदर्शन कर अपनी मांगें उठाईं। रामपुर में चक्का जाम शिमला के अलावा अन्य जिलों व ब्लॉक में भी प्रदर्शन और चक्का जाम किए गए। रामपुर में प्रदर्शनकारियों ने एनएच-5 पर लगभग 10 मिनट तक चक्का जाम किया। इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मजदूरों और किसानों की मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रदर्शन के बाद, कार्यकर्ताओं ने एसडीएम रामपुर के माध्यम से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में चारों लेबर कोड रद्द करने, मनरेगा के तहत साल में 200 दिन काम और 600 रुपए प्रतिदिन मजदूरी देने की मांग की गई। इसके अतिरिक्त, न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की भी मांग उठाई गई।



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