Headlines

हिमाचल हाईकोर्ट का पति-बच्चों से दूरी पर बड़ा फैसला:बोला- बिना उचित कारण ऐसा करना मानसिक क्रूरता, तलाक बरकरार रखा, पत्नी की याचिका डिसमिस




हिमाचल हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि बिना किसी उचित कारण के पति का घर छोड़ देना और अपने ही बच्चों से संपर्क पूरी तरह खत्म कर लेना मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है। जस्टिस अजय मोहन गोयल और जस्टिस योगेश जसवाल की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद फैमिली कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पति को क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक के आदेश दिए गए थे। हाईकोर्ट ने पत्नी की अपील खारिज कर दी। मामले के अनुसार, दोनों पक्षों की शादी 21 जून 2007 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। शादी के बाद दोनों करीब 10 साल तक साथ रहे। इस दौरान उनके दो बच्चे, एक बेटा और एक बेटी हुए। बिना बताए मायके चली जाती थी पत्नी पति की ओर से आरोप लगाया गया कि शादी के कुछ समय बाद पत्नी के व्यवहार में बदलाव आने लगा। वह बिना बताए मायके चली जाती थी और उसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां देती थी। पति का यह भी आरोप था कि घर छोड़ने के बाद पत्नी ने न तो बच्चों से मिलने की कोशिश की और न ही उनसे फोन पर बात की। वहीं, पत्नी की ओर से आरोप लगाया गया कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और उसके साथ मारपीट की गई। इसी वजह से उसे वैवाहिक घर छोड़ना पड़ा। याचिकाकर्ता के आरोप कोर्ट ने नहीं माने हाईकोर्ट ने पत्नी के इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया। बेंच ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि दोनों पक्ष सितंबर 2019 से अलग रह रहे हैं और उनके बीच वैवाहिक संबंध पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं। बिना न्यायसंगत कारण के घर छोड़ा: कोर्ट कोर्ट ने कहा कि पत्नी ने बिना किसी न्यायसंगत कारण के वैवाहिक घर छोड़ा। इसके अलावा, अपने बच्चों से दूरी बनाए रखना और उनसे संपर्क तक नहीं करना भी महत्वपूर्ण तथ्य है। कोर्ट के अनुसार, इन परिस्थितियों में पत्नी का आचरण पति और उसके परिवार के प्रति मानसिक क्रूरता को दर्शाता है। इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *