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22 साल की याशिका बनीं अकलेरा नगर पालिका चेयरमैन:17 वोट से जीता चुनाव, लट्ठ चलाने में भी हैं माहिर




झालावाड़ के अकलेरा में महज 22 साल की याशिका मेवाड़ा नगर पालिका चेयरमैन चुनी गई हैं। उन्होंने चेयरमैन पद का चुनाव 17 मतों से जीतकर नगर पालिका की कमान संभाली है। याशिका को हाड़ौती की सबसे कम उम्र की नगर पालिका चेयरमैन बताया जा रहा है। खास बात यह है कि याशिका पिछले करीब चार साल से दिल्ली में रहकर UPSC की तैयारी कर रही थीं। परिवार के आग्रह पर उन्होंने चुनाव लड़ा और वार्ड 25 से भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की। याशिका पढ़ाई के साथ संघ से भी जुड़ी रही हैं और दंड यानी लट्ठ चलाने में प्रशिक्षित हैं। वे महिला शक्ति से जुड़े कई कार्यक्रमों में लट्ठ चलाने की कला का प्रदर्शन कर चुकी हैं। अब UPSC की तैयारी के साथ उनके सामने अकलेरा नगर पालिका के विकास और शहर की जिम्मेदारी संभालने की चुनौती है। 35 में से 25 वार्ड भाजपा के खाते में इस बार अकलेरा नगर पालिका में चेयरमैन का पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित था। नगर पालिका चुनाव में भाजपा ने 35 में से 25 वार्डों में जीत हासिल कर बहुमत हासिल किया। इसके बाद चेयरमैन पद के चुनाव में भाजपा की याशिका मेवाड़ा ने जीत दर्ज की। कांग्रेस की ओर से चेयरमैन पद के लिए मजबूत प्रत्याशी नहीं उतारा जा सका। पार्टी ने चुनाव में हार चुकी प्रत्याशी को ही चेयरमैन पद के लिए नामांकन करवाया। ऐसे में याशिका ने 17 मतों से चुनाव जीतकर अकलेरा नगर पालिका की जिम्मेदारी संभाल ली। मां की जगह बेटी ने संभाला मोर्चा परिजनों के अनुसार शुरुआत में याशिका की मां के चुनाव लड़ने पर सहमति बनी थी, लेकिन आवश्यक दस्तावेज समय पर तैयार नहीं हो पाने के कारण परिवार ने दिल्ली में रह रही याशिका से संपर्क किया। शुरुआत में याशिका ने UPSC की तैयारी का हवाला देते हुए चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। बाद में परिवार के आग्रह और पिता की राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया। इसके बाद याशिका दिल्ली से अकलेरा पहुंचीं और वार्ड 25 से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरीं। चुनाव जीतने के बाद अब महज 22 वर्ष की उम्र में उन्हें नगर पालिका की कमान मिली है। चार साल से दिल्ली में कर रहीं UPSC की तैयारी याशिका ने झालावाड़ कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है। इसके बाद पिछले करीब चार साल से दिल्ली में रहकर UPSC की तैयारी कर रही थीं। पढ़ाई के साथ-साथ वे सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रही हैं। परिजनों के अनुसार बचपन से ही उनका संघ से जुड़ाव रहा है। उन्होंने संघ के प्रशिक्षण के दूसरे साल तक ट्रेनिंग ली है। इसी दौरान उन्हें घोष वादन और दंड यानी लट्ठ चलाने का प्रशिक्षण भी मिला। महिला शक्ति से जुड़े कई कार्यक्रमों में वे लट्ठ चलाने का प्रदर्शन कर चुकी हैं। इसके अलावा आत्मरक्षा प्रशिक्षण के दौरान अचानक होने वाले हमलों से बचाव के तरीके भी सीखे हैं। परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि याशिका का परिवार लंबे समय से भाजपा और संघ से जुड़ा रहा है। उनके दादा बीरमचंद मेवाड़ा वर्ष 1989 में भाजपा से चुनाव लड़ चुके हैं। उनके पिता राजमल पारेता भाजपा के कार्यकर्ता हैं और इससे पहले संघ से जुड़े रहे हैं। उनके चाचा संदीप पारेता भी संघ से जुड़े हैं, जबकि चाची आकांक्षा पारेता भाजपा से पार्षद रह चुकी हैं। परिवार के अनुसार राजनीतिक और सामाजिक माहौल के बीच पली-बढ़ी याशिका की बचपन से ही सामाजिक कार्यों में रुचि रही है। इसी माहौल ने उन्हें सार्वजनिक जीवन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। अब UPSC और नगर पालिका की दोहरी जिम्मेदारी याशिका के सामने अब एक ओर UPSC की तैयारी जारी रखने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर अकलेरा नगर पालिका चेयरमैन के रूप में शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं की जिम्मेदारी भी है। कम उम्र में मिली इस जिम्मेदारी के चलते अकलेरा की राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में उनकी भूमिका पर नजर रहेगी।



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