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राजस्थान में अंतर-मंडल तबादले के बाद वरिष्ठता खत्म होने के नियम से करीब 25 हजार वरिष्ठ अध्यापक प्रभावित हैं। वर्षों की सेवा और अनुभव के बावजूद नए मंडल में उन्हें सबसे कनिष्ठ मान लिया जाता है, जिससे पदोन्नति में अपने जूनियर साथियों से भी पीछे हो रहे हैं। शिक्षक संघ रेसटा का कहना है कि 2011 के बाद राज्य स्तरीय भर्ती से नियुक्त शिक्षकों की यह समस्या लगातार बनी हुई है। संघ 2012 से वरिष्ठता बचाने की मांग कर रहा है और अब राजस्थान सेवा नियम 1971 में संशोधन की मांग उठाई है। 2011 से राज्य स्तरीय भर्ती, तबादले पर नए मंडल में सबसे कनिष्ठ शिक्षक संघ रेसटा के अनुसार 2011 से वरिष्ठ अध्यापक भर्ती राज्य स्तर पर होने लगी, जबकि इससे पहले भर्ती मंडल स्तर पर होती थी। अब चयनित शिक्षकों को वरीयता क्रमांक के आधार पर मंडल आवंटित किए जाते हैं, लेकिन अंतर-मंडल तबादले के बाद नए मंडल में उन्हें सबसे कनिष्ठ कर दिया जाता है। संघ का कहना है कि 2011 के बाद करीब 25 हजार वरिष्ठ अध्यापक इससे प्रभावित हुए हैं। संघ के मुताबिक कई शिक्षक एसीपी का लाभ ले चुके हैं और उनका वेतन व्याख्याता के बराबर है, लेकिन पदोन्नति में वे पीछे हो रहे हैं। संघ का कहना है कि अन्य विभागों में पूरी वरिष्ठता खत्म नहीं होती, इसलिए यहां भी शिक्षक को सिर्फ संबंधित भर्ती या चयन वर्ष के साथियों से कनिष्ठ किया जाना चाहिए। 2012 से मांग, राजस्थान सेवा नियम में संशोधन की मांग रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया कि संघ 2012 से मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सामने यह मांग रख रहा है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय पर धरना भी दिया गया था और पूर्व शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया था, लेकिन समस्या बनी हुई है। सलावद के अनुसार स्थायी वरिष्ठता सूची जारी करने से पहले विभाग ने आपत्तियां मांगी थीं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया। कोर्ट ने भी विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है। संघ की मांग है कि राजस्थान सेवा नियम 1971 में संशोधन कर प्रथम नियुक्ति तिथि या आरपीएससी वरीयता क्रमांक के आधार पर राज्य स्तरीय वरिष्ठता तय की जाए। संघ का कहना है कि इससे सरकार पर कोई आर्थिक भार नहीं पड़ेगा और करीब 25 हजार वरिष्ठ शिक्षकों को राहत मिलेगी।
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25 हजार वरिष्ठ अध्यापकों की वरिष्ठता पर संकट:मंडल बदलते ही नए मंडल में सबसे कनिष्ठ, प्रमोशन में नुकसान
