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रक्षाबंधन की पूर्णिमा यानी 28 अगस्त की सुबह आसमान में गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा। इस दौरान चंद्रमा का 96.3% हिस्सा पृथ्वी की घनी छाया में आ जाएगा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा तांबे जैसा लाल दिखाई दे सकता है, लेकिन भारत में यह खगोलीय घटना दिखाई नहीं देगी। इसकी वजह यह है कि ग्रहण के समय भारत में चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा। नेशनल अवॉर्ड प्राप्त खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि भारतीय समय के अनुसार ग्रहण सुबह शुरू होगा। भारत में उस समय चंद्रमा दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां से ग्रहण का अवलोकन संभव नहीं होगा। यह घटना उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में देखी जा सकेगी। 3 घंटे 18 मिनट चलेगा आंशिक ग्रहण सारिका के अनुसार आंशिक चंद्र ग्रहण सुबह 8 बजकर 3 मिनट 54 सेकंड पर शुरू होगा और दोपहर 11 बजकर 21 मिनट 59 सेकंड पर समाप्त होगा। इस तरह इसकी कुल अवधि करीब 3 घंटे 18 मिनट रहेगी। चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। जब पृथ्वी की गहरी छाया चंद्रमा के पूरे हिस्से को ढकने के बजाय उसके कुछ हिस्से को ही ढकती है, तो इसे आंशिक चंद्र ग्रहण या पार्शियल लूनर इक्लिप्स कहा जाता है। 41% आबादी देख सकेगी ग्रहण सारिका ने बताया कि गणितीय अनुमान के अनुसार दुनिया की करीब 41% आबादी इस ग्रहण को देख सकेगी। हालांकि भारत में इसकी दृश्यता शून्य रहेगी। 12 अगस्त को हुए सूर्य ग्रहण के करीब 15 दिन बाद यह चंद्र ग्रहण हो रहा है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर 15 दिन के अंतर से ग्रहण होने को लेकर कई तरह की बातें कही जा रही हैं। सारिका ने स्पष्ट किया कि इसका वैज्ञानिक रूप से किसी अनिष्ट से संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि ग्रहण अकेले नहीं आते, बल्कि सामान्य तौर पर ग्रहण जोड़ी के रूप में करीब 15 दिन के अंतराल पर होते हैं। इसलिए 12 अगस्त के सूर्य ग्रहण के बाद 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण होना कोई असामान्य या अनोखी घटना नहीं है। आगे कब-कब होंगे ग्रहण
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28 अगस्त की सुबह लगेगा गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण:रक्षाबंधन की पूर्णिमा पर 96.3% चंद्रमा पृथ्वी की घनी छाया में रहेगा
