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अक्सर कहा जाता है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक धार्मिक होती हैं, लेकिन अब ये धारणा बदल रही है। गैलप के 2024-25 के विश्लेषण के अनुसार, अमेरिका के 42% युवा पुरुषों ने धर्म को जीवन में ‘बहुत महत्वपूर्ण’ बताया, जबकि दो साल पहले आंकड़ा 28% था। इसी अवधि में युवा महिलाओं का प्रतिशत 29% रहा, यानी पहली बार पुरुष महिलाओं से आगे रहे। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि पहचान की राजनीति व रूढ़िवादी विचार बड़ी वजह है। पुरुष, धर्म को वैचारिक पहचान का हिस्सा मान रहे हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर पुरुषों की भूमिका व रूढ़िवादी सोच को बढ़ावा देने वाले कंटेंट का बढ़ता प्रभाव भी वजह है। महिलाओं की दूरी की वजह लैंगिक असमानता एक्सपर्ट्स के मुताबिक जेंडर गैप कम होने का दूसरा कारण युवा महिलाओं का धर्म से विमुख होना है। पब्लिक रिलिजन रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, 2013 में 29% युवा महिलाएं खुद को किसी धर्म से जुड़ा नहीं मानती थीं, जो 2025 में 43% हो गया। वजह धार्मिक संस्थानों में पितृसत्तात्मक सोच व भेदभाव है। वहीं, महिलाओं की भूमिका को लेकर पुरानी सोच, धार्मिक संस्थानों में महिलाओं की सीमित भागीदारी जैसी वजहों से कई युवा महिलाएं दूरी बनाने लगीं। #MeToo जैसे आंदोलनों का भी प्रभाव पड़ा। धर्म को अपनी पहचान से जोड़ रहे युवा पुरुष गैलप के विश्लेषण में अमेरिका में धार्मिकता बढ़ने का बड़ा बदलाव रिपब्लिकन विचारधारा वाले युवा पुरुषों में दिखा। यूनिवर्सिटी ऑफ नोट्रे डेम के प्रोफेसर डेविड कैंपबेल के मुताबिक हाल के वर्षों में युवा पुरुषों में रिपब्लिकन पहचान मजबूत हुई है। कई लोग धर्म को अपनी राजनीतिक व वैचारिक पहचान का हिस्सा मानने लगे हैं। इसी वजह से धर्म और राजनीति दोनों का प्रभाव पड़ा है। भारत में तस्वीर अलग, 64% महिलाएं ज्यादा धार्मिक भारत में अमेरिका जैसा ट्रेंड नहीं है। प्यू रिसर्च सेंटर की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, 64% भारतीय महिलाएं रोज प्रार्थना करती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 56% है। यानी महिलाओं की भागीदारी अधिक है।
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42% युवाओं के लिए धर्म अहम, 2साल में 14% बढ़े:अमेरिका में जेन-जी लड़कों का धर्म की ओर झुकाव लड़कियों से ज्यादा; भारत में उल्टा
