भास्कर सीरीज ‘स्पाई फाइल्स’ में आप पढ़ रहे हैं- ‘जासूस माता हारी’ की कहानी। पार्ट-1 में आपने पढ़ा- 15 अक्टूबर 1917 को फ्रांसिसी सैनिकों ने एक साथ 12 गोलियां मारकर एक महिला को मौत की सजा दी। मौत से पहले महिला ने खास श्रृंगार किया। चिट्ठियां लिखीं- बेट
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ये महिला थी- माता हारी। दुनिया की वो खूबसूरत जासूस, जो डांस करते-करते निर्वस्त्र हो जाती थी। यूरोप के तमाम फौजी अफसर, सेना के जनरल और नेता इस महिला के दीवाने थे। इसके एक-एक शो का खर्च करोड़ों में था।
माता हारी की जासूसी से कैसे फ्रांस के 80 हजार सैनिक मारे गए…जानते हैं पार्ट-2 में…
1905 की एक शाम। फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक आलीशान बंगला। हॉल में हल्की रोशनी, हवा में घुली इत्र और शराब की खुशबू। संगीत बज रहा था। माता हारी नृत्य कर रही थी।
जैसे-जैसे धुन चढ़ती जा रही थी, वो नाचते हुए एक-एक करके अपने कपड़े उतारती जा रही थी। वहां मौजूद लोग अपनी सांसें रोके ये सब देख रहे थे।
डांस के आखिरी क्लाइमेक्स पर पहुंचकर माता हारी ने सारे कपड़े उतार दिए। शरीर पर बस कुछ गहने बचे थे। अब वो थिरकते-थिरकते मंच पर रखी शिव की एक मूर्ति के पास पहुंची। हाथ जोड़े और अपनी एड़ियों के बल बैठ गई।
तभी हॉल का दरवाजा खुला। शहर के चार-पांच रसूखदार लोग अंदर दाखिल हुए। उनके चेहरे पर गुस्सा था। एक ने चीखते हुए कहा- ‘बंद करो ये अपना फूहड़ डांस। तुम अश्लीलता फैला रही हो।’
तभी दूसरे शख्स ने कहा- ‘इसे पुलिस के हवाले कर दो।’
माता हारी धबरा गई। उसने फर्श पर गिरा रेशमी कपड़ा उठाया और खुद को ढंकते हुए धीरे से बोली- ‘रुक जाइए, प्लीज। मैं कोई अश्लीलता नहीं फैला रही हूं।’
उस शख्स ने गुस्से में कहा- ‘इस तरह सरेआम कपड़े उतारना अश्लीलता नहीं है, तो क्या है?’
माता हारी धीरे से बोली- ‘यह पवित्र आर्ट है। ईश्वर को खुश करने की कला। मैं खुद को उन्हें समर्पित कर रही हूं।’
वो आदमी जोर से चिल्लाया- ‘नाटक बंद करो। हमने पूरे पेरिस में ऐसा नृत्य नहीं देखा।’

13 मार्च 1905, पेरिस में नृत्य करती हुई माता हारी। सोर्स : विकिमीडिया कॉमन्स
माता हारी फर्श पर घुटनों के बल बैठ गई। हाथ जोड़ लिए। फिर बोली- ‘मेरी छोटी सी कहानी सुन लीजिए, फिर जो चाहे सजा दे दीजिएगा।’
लोग कानाफूसी करने लगे। तभी एक अधेड़ बोल पड़ा- ‘इसकी कहानी सुनने में क्या हर्ज है? सुनाओ।’
माता हारी ने आंसू पोंछे। गहरी सांस लेकर बताना शुरू किया-
‘मेरा जन्म भारत के एक दक्षिणी राज्य में हुआ था। मां एक मंदिर में देवदासी थी। बचपन में उनकी शादी मंदिर के देवता कंडास्वामी से करा दी गई। वो भगवान की सेवा करती और उनके सामने यही नृत्य करती थी।
जब वो 14 साल की थी, तब मेरा जन्म हुआ, लेकिन मैं मां का मुंह भी नहीं देख पाई। उसी रोज उनकी मौत हो गई। पुजारियों ने मुझे गोद ले लिया। उन्होंने ही मुझे पाला और मां वाला पवित्र नृत्य सिखाया।
13 साल की उम्र में मैंने पहली बार कंडास्वामी के सामने अपने वस्त्र उतारकर नृत्य किया। उसके बाद से यह मेरी दिनचर्या बन गया।’
अब माता हारी चुपचाप खड़ी हो गई। हॉल में सन्नाटा था। तभी एक शख्स ने पूछा- ‘लेकिन तुम भारत से पेरिस कैसे आ गई?’
माता हारी ने उदासीभर मन से कहा- ‘वो मंदिर दुनिया में मशहूर है। उस रोज एक ब्रिटिश अफसर आया था। मंदिर में भीड़ नहीं थी। वह मंदिर के बारे में जानना चाहता था। पुजारी ने भी सहजता से उसे गर्भगृह के पास जाने की इजाजत दे दी।
उस वक्त मैं श्रृंगार करके भगवान के सामने नृत्य में कर रही थी। वह चुपचाप आया और एक कोने में बैठकर मुझे देखने लगा।
नृत्य खत्म होने के बाद अपने कपड़े समेटकर जैसे ही मैं आगे बढ़ी, वह सामने खड़ा था। उसने कहा- ‘तुम अद्भुत हो। आजतक मैंने ऐसा नृत्य नहीं देखा।’
मैंने उससे कुछ कहा नहीं और अपने कमरे की तरफ चली गई।
उस दिन के बाद वह लगातार एक हफ्ते तक आता रहा। धीरे-धीरे हमारे बीच बातें होने लगीं… फिर हमें प्यार हो गया। एक रात… वह मौका पाकर मुझे उस मंदिर से भगा ले गया। हमने शादी कर ली।’

माता हारी नीदरलैंड्स में पैदा हुई थी, लेकिन उसने भारत में पैदा होने की मनगढ़ंत कहानी बनाई।
अब माता हारी की आंखों में आंसू थे। वो थोड़ा रुकी और फिर बोलना शुरू किया- ‘मेरी किस्मत खराब थी। शादी के कुछ साल बाद ही वो आदमी मुझे छोड़कर कहीं और चला गया।
मैंने कुछ महीने उसका इंतजार किया, लेकिन वो नहीं लौटा। मेरे पास जिंदा रहने का कोई और जरिया नहीं था। तब सोचा… क्यों न मैं अपनी उसी पवित्र कला को दोबारा शुरू करूं।’
माता हारी की कहानी सुनने के बाद वो रसूखदार शख्स आगे बढ़ा। माता हारी को सहारा देकर उठाया और कहा- ‘हम सब आपके साथ हैं। आप इस कला को जारी रखिए।’
यहां से माता हारी का सफर चल पड़ा। वो इतनी मशहूर हो गई कि महंगी सिगरेट के पैकेट और शराब की बोतलों पर उसकी फोटो और नाम छपने लगा।
नीदरलैंड्स के फ्राइज म्यूजियम की रिपोर्ट के मुताबिक, उस दौर में माता हारी एक शो के लिए आज के हिसाब से करीब चालीस लाख रुपए लेती थी। एक फ्रांसीसी बैंकर ने तो उसके लिए आलीशान महल और बड़ा विला किराए पर ले रखा था। उसके एक प्रेमी ने विदाई के तोहफे के तौर पर इतनी बड़ी रकम दी, जो आज के 9 करोड़ रुपए के बराबर है।
हालांकि, माता हारी पैसे बचा नहीं पाती थी। वह जितना कमाती, उतना ही अपनी विलासिता पर उड़ा भी देती थी।
1907 की बात है। माता हारी जर्मनी की राजधानी बर्लिन में शो कर रही थी। हॉल खचाखच भरा था। तभी बर्लिन पुलिस चीफ हेर वॉन जागो रिवॉल्वर लिए अंदर दाखिल हुए। उनके साथ चार और पुलिस वाले थे।
पुलिस चीफ सीधे मंच पर चढ़े। संगीत रुक गया। माता हारी के कदम पीछे की ओर हटने लगे। पुलिस चीफ ने चिल्लाते हुए कहा- ‘जर्मनी में इस तरह के लिबास में डांस करना अपराध है। मुझे तुम्हारे कपड़ों की जांच करनी है।’
पुलिस चीफ के इशारे पर सिपाहियों ने माता हारी को घेर लिया। वे उसे मंच के कोने में बने एक बंद कमरे में ले गए। दरवाजा बंद होते ही माता हारी ने वही पुरानी देवदासी वाली कहानी दोहरानी शुरू कर दी।
पुलिस चीफ ने उसे डांटते हुए कहा- ‘बनावटी कहानी मत सुनाओ। तुम्हारा असली ठिकाना जेल है। वहीं पर अपनी परफॉर्मेंस दिखाना।’
माता हारी ने पुलिस चीफ की तरफ देखा। धीरे से उनका हाथ पकड़ा और कान में कुछ फुसफुसाई। पुलिस चीफ मुस्कुराने लगे। उन्होंने पुलिस से कहा- ‘छोड़ दो इसे। सबसे सामने गिरफ्तार करना ठीक नहीं है। हम फिर आएंगे।’

बर्लिन के पुलिस चीफ के साथ माता हारी। AI इमेज
कुछ दिन बाद माता हारी को बर्लिन के सबसे महंगे इलाके में एक अपार्टमेंट मिल गया। इसकी देखरेख, नौकरों की तनख्वाह और रखरखाव का पूरा खर्च जर्मन सरकार का खुफिया विभाग उठाता था। वहां काम करने वाले नौकर जर्मन पुलिस के जासूस थे।
एक रोज एक विदेशी जनरल बर्लिन पहुंचा। किसी ने उसे माता हारी के बारे में बताया, तो वो सीधे मिलने पहुंच गया। रात के करीब 10 बज रहे थे। जनरल नशे में धुत था। माता हारी उसका हाथ पकड़कर बेडरूम में ले गई। अपने हाथों से जाम पिलाने लगी।
इधर, दो नौकर पर्दे के पीछे छिपकर सबकुछ देख रहे थे। विदेशी जनरल ने लड़खड़ाती जुबान में कहा- ‘तुम सच में एक अप्सरा हो। तुम्हारे लिए मैं सबकुछ दांव पर लगा सकता हूं।’
माता हारी ने धीमे से कहा- ‘जनरल साहब। आप जैसे मर्द जब मोर्चे पर होते हैं, तो हम औरतें सलामती की दुआ करती हैं। वैसे, सुना है आपकी फौज अगले महीने उत्तर की तरफ कूच कर रही है? आप मुझे छोड़ कर चले जाएंगे?’
नशे में डूबे जनरल ने कहा- ‘अरे नहीं… उत्तर तो बस दिखावा है। हमारी असली फौज तो पूरब की तरफ कूच करने वाली है।’
कमरे में लगा सीक्रेट कैमरा, जनरल की हरकतों को कैद कर रहा था। पर्दे के पीछे खड़े नौकर डायरी में उसकी बातें नोट कर रहे थे। माता हारी, जनरल के और करीब आ गई। ग्लास में शराब भरते हुए बोली- ‘तो फिर एक जाम और हो जाए…’
जनरल पहले ही बहुत पी चुका था। एक-दो घूंट बाद वह बेसुध पड़ गया। माता हारी ने उसकी जेब से दस्तावेज निकाले, डायरी पर कुछ नोट किया और फिर सबकुछ जस का तस रखकर वहां से चली गई।
धीरे-धीरे माता हारी के लिए यह सब रोज की बात हो गई। जर्मन पुलिस उसके जरिए बड़े-बड़े रसूखदारों और विदेशी मेहमानों की जासूसी करवाने लगी। माता हारी को भी इस काम में मजा आने लगा था।

साल 1906, एक शो के दौरान नृत्य करती हुई माता हारी। सोर्स : विकिमीडिया कॉमन्स
1910 में जर्मन अफसरों को लगा कि माता हारी को प्रोफेशनल ट्रेनिंग देना चाहिए। पैसों के लिए माता हारी राजी भी हो गई। उसे जर्मनी के लोराख इलाके में भेजा गया, जहां सरकार जासूसों के लिए ट्रेनिंग स्कूल चलाती थी।
माता हारी को कोड वर्ड समझना, सीक्रेट मैसेज लिखना, नक्शे पढ़ना और पुरुषों को मनोवैज्ञानिक तरीके से वश में करने का कोर्स करवाया गया। ट्रेनिंग के बाद माता हारी ने कई फौजी अफसरों और नेताओं की जासूसी की। इससे जर्मनी पुलिस को कई अहम डिटेल्स मिलीं।
अब तो माता हारी अपने मेहमानों की निजी तस्वीरें और दस्तावेजों की फोटो खींचकर रखने लगी थी। कुछ साल यह सब चलता रहा। माता हारी को पैसे और महंगे-महंगे तोहफे भी मिलते रहे।
इसी बीच 28 जून 1914 को कुछ चरमपंथियों ने सर्बिया में ऑस्ट्रिया के राजकुमार और उनकी पत्नी की हत्या कर दी। ऑस्ट्रिया ने इसके लिए सीधे तौर पर सर्बिया को जिम्मेदार माना। जल्द ही दो देशों की ये लड़ाई प्रथम विश्वयुद्ध में बदल गई।
एक तरफ फ्रांस, रूस और ब्रिटेन जैसे मित्र राष्ट्र थे, तो दूसरी तरफ जर्मनी, ऑस्ट्रिया और हंगरी जैसी केंद्रीय शक्तियां।
इसी दौरान फ्रांस और रूस के बीच एक गोपनीय समझौता हुआ। इस समझौते के मसौदे को बर्लिन से होते हुए पेरिस ले जाना था। एक रूसी एजेंट मसौदा लेकर बर्लिन पहुंचा। वह एक आलीशान होटल में ठहरा हुआ था।
वहां मौजूद रूसी एंबेसी के अफसर उसकी सीक्रेसी का खासा ध्यान रखे हुए थे, लेकिन जर्मनी के एजेंटों को इसकी भनक लग गई। जर्मनी के एजेंटों ने उस होटल में माता हारी को डांसर बनाकर भेज दिया।
रूसी एजेंट ने माता हारी का नाम और तारीफें सुन रखी थी। उसे जैसे यह बात पता चली, फौरन रिसेप्शन में फोन लगा दिया। उसने कहा- ‘मुझे पूरी रात के लिए माता हारी चाहिए। जितने पैसे चाहिए मिल जाएंगे।’
थोड़ी देर बाद माता हारी उसके साथ कमरे थी। दोनों बैठकर शराब पी रहे थे। तभी वेटर ने दरवाजा खटखटाया। उसने रूसी एजेंट से कहा- ‘मैंने आपका सामान रख दिया है। मुझे कुछ सामानों की लिस्ट बनानी है। क्या आपका पेन मिल सकता है?’
रूसी एजेंट हिचकिचाया, फिर माता हारी की तरफ देखते हुए अपनी जैकेट से पेन निलाकर वेटर को दे दिया। वेटर ने एक पेपर पर कुछ लिखा और पेन रूसी एजेंट को वापस कर दिया।

माता हारी पर बनी फिल्म ‘माता हारी’ का सीन। स्वीडिश एक्ट्रेस ग्रेटा गार्बो ने माता हारी का रोल प्ले किया था।
वेटर के जाने के बाद माता हारी ने रूसी एजेंट को इतनी शराब पिलाई गई कि वह अपना होश खो बैठा। जर्मनी के जासूस इसी मौके की तलाश में थे। उन लोगों ने रूसी एजेंट के कपड़ों और सूटकेस में मिले दस्तावेजों की फोट खींची और चुपचाप बाहर निकल गए।
सुबह जब रूसी एजेंट की आंख खुली, तो उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था। कमरे में सामान बिखरा पड़ा था। घबराकर उसने जेब में हाथ डाला। उसका पेन सुरक्षित था। उसने राहत की सांस ली, पर अंदर से उसे किसी अनहोनी का डर सता रहा था। उसने बैग पैक किया और वहां से निकल गया।
इधर, जर्मनी के खुफिया विभाग में हंगामा मचा था। पुलिस चीफ, अफसरों को डांट रहे थे- ‘तुम लोगों ने 100 तस्वीरें खींची है, लेकिन कोई भी तस्वीर उस मसौदे से जुड़ी नहीं है। वो मसौदा गया कहां?’
जर्मनी के एजेंटों के पास इसका जवाब नहीं था।
अगले दिन रूसी जासूस बेल्जियम पहुंच चुका था। एक रात वो फिल्म देखकर होटल लौट रहा था, तभी गली में एक शख्स ने उसका रास्ता रोक लिया।
जासूस ने फौरन पिस्तौल निकाल ली, तभी वो शख्स बोल पड़ा- ‘सर, मैं वो वेटर हूं, जिसने बर्लिन में आपका पेन लिया था। मेरा पेन भी हुबहू वैसा ही है। गलती से मैंने अपना पेन आपको दे दिया।’
रूसी जासूस ने गाली देते हुए कहा- ‘यह क्या बकवास है?’
वेटर ने आराम से कहा- ‘सर, ये पेन लीजिए। इसके निचले हिस्से में सीक्रेट मसौदा अभी भी सुरक्षित है। जर्मनी के जासूसों से मैंने इसे बचा लिया।’
रूसी जासूस ने हकलाते हुए कहा- ‘लेकिन… तुम तो जर्मनी के हो?’ वेटर हंसने लगा।
असल में वो वेटर फ्रांस का जासूस था। उसने जर्मनी पुलिस के सामने दस्तावेज ढूंढने का नाटक किया, लेकिन चुपके से पूरे दस्तावेज की तस्वीरें खींचकर फ्रांस भेज दिया था।
अब तारीख आई 3 अगस्त 1914, जर्मनी ने फ्रांस के खिलाफ जंग का एलान कर दिया। तब माता हारी बर्लिन के एक होटल में पुलिस चीफ हेर वॉन जागो के साथ थी। होटल में बड़े-बड़े फौजी अफसर ठहरे हुए थे। जंग के माहौल में अपने फौजियों की एक झलक पाने के लिए भीड़ ने होटल को बाहर से घेर लिया था। देशभक्ति नारे लग रहे थे।
तभी पुलिस चीफ, माता हारी का हाथ पकड़कर होटल से बाहर निकले। भीड़ ने उनका जोरदार स्वागत किया। पुलिस चीफ ने माता हारी को कार में बैठाकर पूरा बर्लिन घूमाया। इसी दौरान फ्रांस के जासूसों की नजर माता हारी पर पड़ी। उन्हें पता चल गया कि यह महिला जर्मनी पुलिस की करीबी है।

बर्लिन पुलिस के साथ होटल में माता हारी। AI इमेज
इधर, युद्ध के कुछ ही महीने के भीतर यूरोप के हालात बदल गए। थिएटरों पर ताले लटक गए। जर्मन सरकार ने माता हारी को शत्रु देश फ्रांस का नागरिक घोषित कर दिया। उसकी सारी संपत्ति और महंगे गहने जब्त कर लिए। माता हारी को धक्का लगा। वह जिस देश के लिए जासूसी कर रही थी, उसी ने उसे रातों-रात कंगाल बना दिया।
कुछ दिनों बाद जैसे-तैसे करके वो हॉलैंड पहुंची। वहां फिर से अपना मशहूर नृत्य करना शुरू किया, लेकिन पहले की तरह जादू नहीं रहा। माता हारी की ढलती उम्र इसकी बड़ी वजह थी।
उन दिनों हॉलैंड, जर्मनी के खुफिया नेटवर्क का प्रमुख केंद्र था। जर्मनी की खुफिया विभाग को ऐसे मोहरों की जरूरत थी, जो बिना रोक-टोक के मित्र राष्ट्र देशों में आ-जा सकें। माता हारी इसके लिए मुफीद थी, क्योंकि उसके पास हॉलैंड का पासपोर्ट था और पेरिस के ऊंचे हलकों में संबंध।
हॉलैंड में तैनात जर्मन खुफिया अफसर कार्ल क्रामर ने एक रोज माता हारी को अपने दफ्तर बुलाया। जब माता हारी, क्रामर के पास पहुंची, तो वह एक नक्शे पर गोल घेरा बना रहा था। उसने माता हारी को कुर्सी पर बैठने का इशारा किया।
क्रामर ने कहा- ‘तुम्हें फौरन पेरिस जाना होगा।’
माता हारी- ‘पेरिस? वहां क्यों जाना है?’
क्रामर ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘वही काम , जो तुम सबसे बेहतर जानती हो। पेरिस जाओ, वहां के मंत्रियों और फौजी अफसरों से नजदीकियां बढ़ाओ।’
माता हारी झट से बोल पडी- ‘अब मैं जासूसी के बदले सौदा करूंगी। मुझे 10 हजार फ्रैंक चाहिए। बोलो मंजूर है?’
क्रामर ने अपनी दराज खोला और नोटों की एक गड्डी माता हारी की तरफ सरकाते हुए कहा- ‘तुम्हें 20 हजार फ्रैंक मिलेंगे।’ 20 हजार फ्रैंक, यानी आज के हिसाब से करीब 23 लाख रुपए।
माता हारी ने क्रामर की तरफ फ्लाइंग किस उछालते हुए कहा- ‘समझो तुम्हारा काम हो गया।’
क्रामर ने माता हारी को अदृश्य स्याही की तीन शीशियां दीं। साथ में एक पर्ची। जिस पर लिखा था- H21. ये कोड वर्ड में माता हारी का नाम था।

फ्रांसिसी खुफिया विभाग के अफसर के साथ माता हारी। AI इमेज
पहले विश्व युद्ध में कैप्टन व्लादिमीर मौरोव नाम का एक रूसी पायलट फ्रांस की तरफ से लड़ रहा था। एक रोज उसकी मुलाकात माता हारी से हुई। धीरे-धीरे उनका मिलना-जुलना बढ़ने लगा और फिर माता हारी को उससे प्यार हो गया।
इसी बीच एक रोज कैप्टन मैरोव का विमान क्रैश हो गया। वह गंभीर रूप से घायल हो गया। फेफड़ों में जहरीली गैस भर गई। उसे विटेल के मिलिट्री अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। विटेल प्रतिबंधित इलाका था, लेकिन माता हारी उससे मिलने के लिए बेचैन थी।
एक रोज वह परमिशन लेने फ्रांस के खुफिया विभाग पहुंच गई। फ्रांस को पहले से माता हारी पर शक था। वहां मौजूद अफसर ने कहा- ‘हम तुम्हें हॉस्पिटल जाने देंगे, लेकिन बदले में तुम्हें हमारे लिए जासूसी करनी होगी।’
माता हारी ने बिना सोचे समझे कहा- ‘ठीक है, मैं तैयार हूं, लेकिन बदले मुझे दस लाख फ्रैंक चाहिए।’ अभी के हिसाब से करीब 11.82 करोड़ रुपए। फ्रांसीसी अफसर इस भारी भरकर रकम पर भी राजी हो गया।
इस तरह अब माता हारी डबल एजेंट बन चुकी थी। फ्रांस और जर्मनी दोनों देशों की जासूस।
विटेल के उस इलाके में रूसी और फ्रांसीसी पायलटों का आना-जाना आम था। लड़ाई से थक-हारकर आने वाले पायलट माता हारी के साथ वक्त बिताना पसंद करते थे।
1915 के अगस्त महीने की बात है। फ्रांस, जर्मनी पर एक बड़े हमले की तैयारी कर रहा था। माता हारी को इसकी भनक रूसी पायलटों से मिल गई थी, लेकिन तारीख पता नहीं थी।
एक रात वेटल के एक होटल में 30-35 साल का रूसी पायलट नशे में धुत्त होकर बेड पर पड़ा था। बगल में लेटी माता हारी चुपचाप बिस्तर से उठी, पायलट की जेब में हाथ डाला। एक छोटा सा कागज मिला, जिस पर कोड वर्ड में कुछ लिखा था।
माता हारी ने पायलट की तरफ देखा… वो अब भी गहरी नींद में था। उसने एक पेपर पर वो खुफिया मैसेज नोट किया और लिपस्टिक के डिब्बे के पीछे रखकर ढक्कन बंद कर दिया।

रूसी पायलट के सो जाने के बाद माता हारी खुफिया मैसेज नोट कर रही है। AI इमेज
2 दिन बाद… हॉलैंड के एक होटल में जर्मन खुफिया अफसर क्रामर परेशान बैठा था। तभी एक एजेंट हांफते हुए आया। उसने एक सीलबंद लिफाफा देते हुए कहा- ‘इसे H21 ने भेजा है।’
क्रामर ने फौरन लिफाफा खोला। जिस पर लिखा हुआ था- ‘25 सितंबर 1915 को फ्रांस बड़ा हमला करने वाला है।’
क्रामर खुशी से चिल्लाया- ‘फौरन बर्लिन कनेक्ट करो, माता हारी ने अपना काम कर दिया है।’
खुफिया मैसेज के बाद जर्मनी ने चुपचाप उस मोर्चे पर बटालियनों की संख्या 90 से बढ़ाकर 192 कर दी। वहां भारी तोपें और मशीनगनें तैनात कर दी।
अब तारीख आई 25 सितंबर 1915, फ्रांसीसी पैदल सेना के हजारों जवान नारा लगाते हुए आगे बढ़े। शुरुआती कुछ चौकियों पर उन्हें कामयाबी मिली, लेकिन जैसे ही वे मुख्य मैदान में पहुंचे, घात लगाकर बैठी जर्मन सेना ने हमला कर दिया।
अचानक चारों तरफ से तोपों और मशीनगनों से ऐसा हमला हुआ कि फ्रांसीसी सैनिक संभल नहीं पाए। देखते-देखते लाशों के ढेर लग गए। जंग खत्म हुई तो पता चला कि फ्रांस के 80 हजार सैनिक मारे गए। ये युद्ध बैटल ऑफ लूस नाम से जाना जाता है।
हार के बाद फ्रांस का मानना था कि उसके साथ किसी ने गद्दारी की है। 2 साल बाद यानी जनवरी 1917, फ्रांस के जासूसों को एक कोड वर्ड मिला- H21. फ्रांसीसी खुफिया विभाग ने जब कड़ियों को जोड़ा, तो वे दंग रह गए। वह कोड नेम माता हारी का था।
13 फरवरी 1917 को फ्रांस पुलिस ने पेरिस से माता हारी को गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेश किया गया। दोनों तरफ की तमाम दलीलों और जिरहों के बाद कोर्ट ने माता हारी को सरेआम गोली मारकर मृत्युदंड की सजा सुनाई।
15 अक्टूबर 1917 को एक साथ 12 सैनिकों ने गोली मारकर माता हारी को मौत की सजा दे दी।
जासूस माता हारी की पहली कड़ी भी पढ़िए :
रेफरेंस :
1. Mata Hari: Courtesan and Spy : By Major Thomas Coulson
2. Mata Hari’s Last Dance: By Michelle Moran
3. Mata Hari, the True Story : By Russell Warren Howe
4. The fatal lover : By Julie Wheelwright
5. The Spy: A Novel of Mata Hari : By Paulo Coelho
6. A Tangled Web: Mata Hari: By Mary W. Craig
