नई दिल्ली1 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

केंद्र सरकार ने आज यानी 20 जुलाई को साफ कर दिया है कि घरेलू और रिटेल निवेशकों के लिए इक्विटी ट्रांजैक्शन पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को खत्म करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।
इस स्पष्टीकरण के साथ ही पिछले कुछ महीनों से बाजार के जानकारों और निवेशकों के बीच चल रही उस अटकलबाज़ी पर विराम लग गया है, जिसमें टैक्स हटाने की मांग की जा रही थी। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोक सभा में एक सवाल के लिखित उत्तर में यह स्पष्टीकरण दिया।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोक सभा में एक सवाल के लिखित उत्तर में यह स्पष्टीकरण दिया। (फाइल फोटो)
लोक सभा में वित्त राज्य मंत्री ने लिखित जवाब में दी जानकारी
सदन में उनसे पूछा गया था कि सरकार रिटेल और डोमेस्टिक निवेशकों के लिए LTCG टैक्स को कब तक खत्म करेगी, ताकि मार्केट सेंटीमेंट को सुधारा जा सके, घरेलू निवेशकों के हितों की रक्षा हो सके और विदेशी व भारतीय निवेशकों के बीच एक समान अवसर सुनिश्चित किया जा सके। इस पर वित्त राज्य मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फिलहाल ऐसा कोई भी प्रस्ताव नहीं है।
बजट प्रक्रिया के दौरान समय-समय पर होती है टैक्स नीतियों की समीक्षा
वित्त राज्य मंत्री ने अपने जवाब में यह भी बताया कि कैपिटल गेन्स टैक्स रेट सहित सभी टैक्स नीतियों की बजट प्रक्रिया के दौरान समय-समय पर समीक्षा की जाती है। सरकार अर्थव्यवस्था की पूरी स्थिति को देखकर ही टैक्स दरों में बदलाव का फैसला करती है।
1 साल में 79% बढ़ा सरकार का LTCG टैक्स कलेक्शन
इक्विटी ट्रांजैक्शन पर LTCG टैक्स से सरकार की कमाई में बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, टैक्स कलेक्शन सालाना आधार पर करीब 79% बढ़ा है। वित्त वर्ष 2023-24 में जहां यह कलेक्शन ₹72,249 करोड़ था, वहीं असेसमेंट ईयर वित्त वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर ₹1,29,158 करोड़ पर पहुंच गया। इन दो सालों में सरकार ने शेयर बाजार के लॉन्ग-टर्म मुनाफे से कुल ₹2.01 लाख करोड़ का टैक्स वसूला है।
क्या होता है LTCG टैक्स और यह कब लगता है?
लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स उस मुनाफे पर लगाया जाता है जो किसी कैपिटल एसेट जैसे प्रॉपर्टी, शेयर या म्यूचुअल फंड को बेचने से होता है।
- समय सीमा: लिस्टेड इक्विटी शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड को केवल तभी लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट माना जाता है, जब उन्हें खरीदने के बाद 12 महीने के बाद बेचा हो।
- टैक्स दर: इनकी बिक्री से होने वाले लॉन्ग-टर्म मुनाफे पर 12.5% की फ्लैट दर से टैक्स लगता है। हालांकि, यह टैक्स तभी लागू होता है जब एक वित्तीय वर्ष में आपका कुल मुनाफा ₹1.25 लाख से अधिक हो जाता है।
- शॉर्ट-टर्म टैक्स: दूसरी ओर, यदि लिस्टेड शेयरों को 12 महीने से कम समय तक रखकर बेचा जाता है, तो उस शॉर्ट-टर्म मुनाफे (STCG) पर 20% की दर से टैक्स वसूला जाता है।

