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पाकुड़ जिले में मंगलवार को मां विपत्तारिणी की पूजा-अर्चना पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई। शहर के सिंह वाहिनी मंदिर, हिरणपुर प्रखंड के देवपुर मोड़ और लिट्टीपाड़ा के सार्वजनिक दुर्गा मंदिर सहित विभिन्न स्थानों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। खासकर सुहागिन महिलाओं ने बड़ी संख्या में व्रत रखकर पूजा में हिस्सा लिया। अपने परिवार की सुख-समृद्धि व संकटों से रक्षा की कामना की। मंदिरों में भक्तिमय माहौल बना रहा। पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा। देवपुर मोड़ में 24 प्रहर परिसर में विशेष आयोजन हिरणपुर प्रखंड के देवपुर मोड़ स्थित 24 प्रहर परिसर में भी विशेष पूजा का आयोजन किया गया, जहां तोड़ाई, मनीपुर, खिदिरपुर और मुर्गाडांगा समेत आसपास के गांवों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। यहां पुरोहित तापस बनर्जी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा संपन्न कराई। श्रद्धालुओं ने मां विपत्तारिणी की प्रतिमा के समक्ष 13 प्रकार के फल, फूल और मिष्ठान अर्पित कर विधिवत पूजा की। प्रतिमा का निर्माण पश्चिम बंगाल के मूर्तिकार अरूप चक्रवर्ती द्वारा किया गया था, जिसे आकर्षक ढंग से सजाया गया था। लिट्टीपाड़ा में भी दिखी आस्था लिट्टीपाड़ा प्रखंड के सार्वजनिक दुर्गा मंदिर परिसर में भी मां विपत्तारिणी की पूजा श्रद्धा के साथ की गई। यहां बंगाली समाज की सैकड़ों महिलाओं ने पुरोहित लालू चक्रवर्ती के मार्गदर्शन में पूजा-अर्चना की। व्रतियों ने उपवास रखकर परिवार पर आने वाली विपत्तियों से मुक्ति की कामना की। पूजा के दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे की मांग में सिंदूर लगाया और परिजनों के हाथ में लाल धागा बांधकर उनके सुरक्षित और सुखी जीवन की प्रार्थना की। बंगाली समाज में विशेष महत्व पूजा को लेकर बाजारों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। फल, फूल और पूजा सामग्री की दुकानों पर दिनभर भीड़ लगी रही। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां विपत्तारिणी को माता दुर्गा का ही एक रूप माना जाता है। यह पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। पूजा के बाद हाथ में बांधा जाने वाला लाल धागा जीवन की विपत्तियों से रक्षा का प्रतीक माना जाता है, जिससे इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है।
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पाकुड़ में मां विपत्तारिणी पूजा, सैकड़ों श्रद्धालु उमड़े:सुहागिन महिलाओं ने की सुख-समृद्धि की कामना, मंदिरों में सुबह से लगी श्रद्धालुओं की भीड़
