20 जुलाई के संसद मार्च में ‘कॉकरोचों’ की पिटाई के बाद सोनम वांगचुक ने 24वें दिन भी अनशन जारी रखा। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर पीएम का इस्तीफा मांगा, जिसके बाद पुलिस वालों ने उन्हें मौके से हिरासत में ले लिया। अभि
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आखिर इस संसद मार्च से कॉकरोच पार्टी को क्या हासिल हुआ, इससे सरकार की मुसीबतें क्यों बढ़ सकती हैं और आगे क्या होगा; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: संसद मार्च से कॉकरोच पार्टी को क्या हासिल हुआ? जवाबः 3 बड़े हासिल हैं…
1. कॉकरोच पार्टी को उम्मीद से ज्यादा समर्थन मिला
- 20 जून के बाद शुरू हुए प्रोटेस्ट के शुरुआती 15 दिनों में जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी के समर्थन में करीब एक हजार लोगों जुट रहे थे। 28 जून को सोनम के अनशन के 16वें दिन से उनकी तबीयत बिगड़ने की चर्चा शुरू हुई। समर्थन में लोग बढ़ने लगे।
- 18 जुलाई को सोनम को जबरन उठाकर अस्पताल पहुंचाए जाने के बाद जंतर-मंतर पर भीड़ बढ़ने लगी। 19-20 जुलाई की दरम्यानी रात लगातार भीड़ बढ़ती रही।
- कॉकरोच पार्टी को भी अंदाजा नहीं था कि संसद मार्च में दिल्ली के बाहर से भी हजारों की भीड़ जुट जाएगी। कॉकरोच पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने 20 हजार के आसपास प्रदर्शनकारी जुटने की उम्मीद जताई थी।
- मीडिया रिपोर्ट्स में प्रोटेस्टर्स की संख्या 30 हजार से लेकर 1 लाख तक बताई गई है।
- प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस के लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों से छोटे-छोटे बच्चे तक घायल हुए।
- ज्यादातर जानकारों का मानना है कि इससे प्रोटेस्ट कर रहे लोगों और कॉकरोच जनता पार्टी के लिए लोगों का समर्थन बढ़ा है।
2. सरकार पहली बार बातचीत को तैयार हुई, मेमोरैंडम लिया
- कॉकरोच पार्टी के लोग सरकार की तरफ से बातचीत की मांग कर रहे थे। सोनम वांगचुक ने भी यही मांग की, लेकिन सरकार की तरफ से कोई आगे नहीं आया।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, कल संसद मार्च से पहले दिल्ली के पुलिस उपायुक्त ने सरकार और CJP के बीच बातचीत कराने के लिए संपर्क किया। सुबह 6 बजे बातचीत शुरू हुई। करीब 11:45 बजे जेपी नड्डा से मुलाकात पर सहमति बनी।
- दोपहर के आसपास जेपी नड्डा ने CJP के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका से मुलाकात की। CJP ने 3 मांगें रखीं- सोनम वांगचुक को अस्पताल से रिहा किया जाए। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। आत्महत्या करने वाले NEET छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपए मुआवजा दिया जाए।
- नड्डा ने इन मांगों का एक लिखित मेमोरैंडम लिया और कहा कि सीनियर लीडरशिप से इस बारे में बात करेंगे। ये पहली बार था कि सरकार ने प्रोटेस्टर्स से बात की। हालांकि जब रात तक सरकार की तरफ से मांगों पर कोई फैसला नहीं हुआ, तो प्रदर्शनकारी दोबारा जंतर-मंतर पर जुटने लगे।
- संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के मुताबिक, NDA संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी ने कहा है कि पेपर लीक मामले में दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी।

जेपी नड्डा को मेमोरैंडम देते CJP के प्रवक्ता सौरव दास (बीच में) और आशुतोष रांका (दाएं)।
3. राहुल जैसे विपक्षी नेताओं का सपोर्ट, राजनीतिक ताकत मिलेगी
- कॉकरोच जनता पार्टी NEET पेपर लीक के विरोध में एक ऑनलाइन मूवमेंट की तरह शुरू हुई थी। सोशल मीडिया पर तेजी से इसके फॉलोअर्स बढ़ने के बावजूद इसके जमीनी मूवमेंट बन पाने पर सवाल थे।
- सोनम वांगचुक के अनशन पर बैठने के बाद समाजवादी पार्टी के कुछ सांसद जंतर-मंतर पर पहुंचे। 16 जुलाई को AAP मुखिया केजरीवाल भी पहुंचे। प्रोटेस्ट के दिन सांसद डिंपल यादव और चंद्रशेखर आजाद जैसे इक्का-दुक्का नेता ही नजर आए।
- हालांकि संसद मार्च में पुलिस के लाठीचार्ज के बाद विपक्षी नेता CJP के समर्थन में उतर आए।
- 21 जुलाई को राहुल और प्रियंका गांधी घायल छात्रों से मिलने दिल्ली के RML हॉस्पिटल पहुंचे। कांग्रेस सेवा दल ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए खाने की व्यवस्था की।
- कांग्रेस ने संसद सत्र के दौरान विरोध किया और फिर पीएम आवास के बाहर हाथ बांधकर प्रदर्शन किया। राहुल, अखिलेश यादव समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
- आजाद समाज पार्टी के नेता और सांसद चंद्रशेखर आजाद 20 जुलाई की रात से ही संसद के अंदर भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठे हैं।
- 21 जुलाई की दोपहर NCP (SP) नेता शरद पवार और NCP (शरद गुट) की सांसद सुप्रिया सुले छात्रों से मिलने जंतर-मंतर पहुंचे।
- कांग्रेस के राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल, शशि थरूर और सपा मुखिया अखिलेश यादव जैसे भी सरकार को घेर रहे हैं।
- उत्तर प्रदेश के लखनऊ में सपा कार्यकर्ताओं ने लाठीचार्ज के विरोध में प्रदर्शन किया। कई और जगहों से विपक्षी दलों के प्रदर्शन की खबरें आ रही हैं।

पुलिस ने राहुल गांधी से हटने की अपील की, लेकिन राहुल ने उन्हें अपने बंधे हुए हाथ दिखाए।
सवाल-2: प्रदर्शनकारियों की पिटाई से सरकार की मुश्किलें कैसे बढ़ गईं? जवाबः सरकार के लिए अब 3 बड़ी मुश्किलें हैं…
1. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज, पीएम का भी विरोध बढ़ा
- संसद मार्च के दिन कॉकरोच पार्टी की मांग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक ही सीमित थी। पुलिस के एक्शन के बाद अब पीएम मोदी और सरकार का विरोध शुरू हो गया है।
- पीएम आवास के बाहर धरने में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, खड़गे समेत कई कांग्रेसी नेताओं ने नारेबाजी की और धर्मेंद्र के अलावा पीएम मोदी का इस्तीफा मांगा।
- सीनियर पत्रकार नीलांजन मुखोपाध्याय के मुताबिक, ‘शुरुआत से सरकार की ये जताने की कोशिश थी कि पीएम मोदी CJP को लेकर जरा भी चिंतित नहीं हैं। अब विरोध बढ़ने से मोदी को ऐसी चुनौती का सामना करना पड़ेगा, जो उनके सामने पहले कभी नहीं आई।’
- नीलांजन लिखते हैं, ‘पीएम मोदी का विरोध हो, तो वो न्यूट्रल रवैया अपनाते हैं और विरोध के खुद ही ठंडा पड़ने का इंतजार करते हैं। प्रोटेस्टर्स पर गुमराह युवा, राजनीतिक रूप से प्रेरित होने, अर्बन नक्सली और एंटी-नेशनल का लेबल लगाते हैं। लेकिन CJP के मामले में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं हो पाया, क्योंकि उसने राजनीतिक दलों से दूरी बनाकर रखने की कोशिश की है।’
2. सोनम वांगचुक ने अनशन जारी रखने का ऐलान किया
- वांगचुक ने 20 जुलाई की सुबह अपना अनशन तोड़ने के लिए 3 शर्तें रखीं- ‘सरकार पेपर लीक के लिए जिम्मेदारी तय करे, CJP के प्रतिनिधियों को संसद में पार्टियों के सांसदों से मिलने की अनुमति मिले और वो भरोसा दें कि संसद में मुद्दा उठाएंगे या सांसद उनसे सफदरजंग अस्पताल में मिलकर यह भरोसा दें। यानी, वो सरकार के मंत्रियों के बजाय किसी भी पार्टी के सांसद से बातचीत पर अनशन तोड़ने को तैयार हो गए। कहा गया कि वांगचुक का रुख नरम पड़ा है।
- हालांकि शाम को सोनम ने एक और लेटर में कहा, ‘प्रदर्शनकारियों के साथ जैसी बर्बरता की जा रही है, उसे देखकर मैंने फैसला किया है कि मैं भूख हड़ताल जारी रखूंगा।
- सोनम की पत्नी गीतांजलि अंग्मो की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम को मेदांता हॉस्पिटल में शिफ्ट करने की अनुमति दे दी है।
- सोनम ने सफदरजंग अस्पताल प्रशासन से संसद मार्च में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। अगर मेदांता से उन्हें जंतर-मंतर जाने की अनुमति मिली, तो प्रोटेस्ट का दायरा फिर बढ़ जाएगा।

21 जुलाई की सुबह 7 बजे ही प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर इकट्ठा हो गए थे।
3. मानसून सत्र में बैकफुट पर रहना पड़ सकता है
- 20 जुलाई को संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले NDA सरकार ने अपने एजेंडे में बताया था कि सत्र में 7 बिल लाए जाएंगे। महिला आरक्षण से जुड़ा परिसीमन बिल भी अचानक लाया जा सकता था, जिसके लिए सरकार तैयारी कर रही थी।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस की रणनीति थी कि वह सत्र में राम मंदिर में चंदा चोरी के मुद्दे पर सरकार को घेरेगी। हालांकि संसद मार्च के बाद से कांग्रेस ने विरोध का ट्रैक बदल दिया।
- 20 जुलाई को कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के विरोध के चलते संसद की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। 21 जुलाई को हंगामा और बढ़ गया।
- कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने लाठीचार्ज की निंदा में स्थगन प्रस्ताव दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में सरकार से प्रदर्शनकारियों और नड्डा के बीच बातचीत का ब्यौरा मांगा।
- लोकसभा की कार्यवाही सिर्फ 15 मिनट चल पाई और सदन को 22 जुलाई के लिए स्थगित कर दिया गया।
- विपक्ष का विरोध जारी रहा, तो सरकार के लिए संसद में नए बिल लाना या परिसीमन बिल जैसे संविधान संशोधन बिलों पर वोटिंग करवाना मुश्किल होगा।
सवाल-3: प्रोटेस्ट आगे बढ़ा, तो सरकार क्या कदम उठा सकती है? जवाबः सरकार के सामने 2 रास्ते हैं…
1. मांगों पर CJP से बात आगे बढ़ाए
सरकार CJP के लीडर्स के साथ उनकी मांगों पर बात आगे बढ़ा सकती है, जैसा 2020-21 के किसान आंदोलन के समय हुआ था।
सीनियर जर्नलिस्ट नीलांजन मुखोपाध्याय कहते हैं, ‘प्रधानमंत्री ये मांगें तभी मानेंगे, जब उन्हें लगेगा कि CJP का जनसमर्थन इतना बढ़ गया है कि वो बीजेपी का कोर वोटबैंक खींचना शुरू कर सकती है।’
2020-21 में किसानों ने दिल्ली में घुसने के सभी सीमाई रास्ते- अटारी बॉर्डर, सिंघु, गाजीपुर, टिकरी वगैरह पर कब्जा कर लिया था। करीब 700 किसानों की मौत हो गई थी। पूरे देश में किसानों के समर्थन में लोग खड़े होने लगे थे, तब सरकार को झुकना पड़ा और किसान कानून वापस लेने पड़े।
2. धर्मेंद्र प्रधान को दूसरे रास्ते से हटाए
बीजेपी का अघोषित नियम है कि किसी राजनीतिक दबाव में किसी किसी मंत्री का इस्तीफा नहीं होता। इसके बजाय मोदी सरकार में परफॉरमेंस के आधार पर मंत्रियों को हटाने या उनका विभाग बदलने का पैटर्न है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई कहते हैं कि सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा ले लिया, तो संदेश जाएगा कि सरकार से गलती हुई है।
सरकार एक और कठोर रुख अख्तियार कर सकती है- प्रोटेस्टर्स पर गंभीर मुकदमे दर्ज करके आंदोलन कमजोर करने की कोशिश। दिल्ली पुलिस ने प्रोटेस्ट में शामिल अज्ञात लोगों के खिलाफ 5 FIR दर्ज की हैं। इनमें दंगा करने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी कर्मचारियों पर हमले जैसी गंभीर धाराएं हैं।
2020 में CAA के खिलाफ शाहीन बाग में हुए प्रोटेस्ट और फिर 2023 में रेसलिंग फेडरेशन के अध्यक्ष ब्रजभूषण सिंह पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिला पहलवानों के प्रदर्शन के दौरान ऐसा हुआ है- पुलिस ने झड़प के बाद हिरासत में लेकर जंतर-मंतर खाली करवा लिया था।
सवाल-4: कॉकरोच पार्टी अब आगे क्या करेगी? जवाबः कॉकरोच पार्टी फिलहाल जंतर-मंतर से प्रोटेस्ट जारी रखेगी…
- जेपी नड्डा से मिलने के बाद आशुतोष रांका ने कहा था, ‘बैठक पूरी तरह बेकार रही। हमारे 4 घंटे बर्बाद हुए। अब सरकार को जंतर-मंतर आकर हमसे बात करनी होगी। जब तक प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे, तबतक आंदोलन जारी रहेगा।’
- अभिजीत ने कहा है, हमारी वहीं पुरानी मांगें हैं। ये लंबी लड़ाई है, हम न सिर्फ इसे लड़ेंगे, बल्कि जीतेंगे भी।’
दीपके ने कहा था कि 11 मार्च को दोबारा संसद मार्च करेंगे, हालांकि अब उन्होंने साफ किया है कि संसद की तरफ दोबारा कूच की कोई योजना नहीं है।
दीपके ने कहा, ‘अब सरकार को यहां जंतर-मंतर पर आना होगा, अब हम उनके पास नहीं जाएंगे। हम मार्च इसलिए नहीं निकाल रहे हैं, क्योंकि पुलिस ने छात्रों का खून बहाया है। इन्हें छात्रों की परवाह नहीं, लेकिन हमें है। सोनम सर अपना अनशन जारी रखेंगे और आंदोलन भी जारी रहेगा।’

अभिजीत ने धरने वाली जगह से एक तस्वीर शेयर की है, इसमें सोनम की तस्वीर, संविधान की कॉपी, चरखा, रामचरित मानस रखी हुई नजर आ रही है।
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