बैतूल में मानसून फिर हुआ सक्रिय:24 घंटे में 13.9 मिमी बारिश,पिछले साल से अब भी 42.5 मिमी कम बारिश; किसानों को मिली राहत




बैतूल जिले में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मंगलवार से बुधवार सुबह तक हुई रिमझिम बारिश से जिले में औसतन 13.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई। लंबे अंतराल के बाद हुई इस बारिश से खरीफ फसलों को नई संजीवनी मिलने की उम्मीद जगी है। हालांकि, इस मानसून सीजन में अब तक जिले में 324.6 मिमी औसत वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में हुई 367.1 मिमी बारिश की तुलना में 42.5 मिमी कम है। 24 घंटे में घोड़ाडोंगरी में सबसे ज्यादा बारिश जिला वर्षा रिपोर्ट के अनुसार, 21 जुलाई सुबह 8 बजे से 22 जुलाई सुबह 8 बजे तक सबसे अधिक 20 मिमी बारिश घोड़ाडोंगरी में दर्ज की गई। इसके अलावा चिचोली में 19 मिमी, भैंसदेही और भीमपुर में 17-17 मिमी, शाहपुर में 15 मिमी, मुलताई में 14.6 मिमी, बैतूल में 11.6 मिमी, प्रभातपट्टन में 8.2 मिमी, आठनेर में 8.1 मिमी तथा आमला में 8 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। संचयी वर्षा में चिचोली सबसे आगे इस मानसून सीजन में संचयी वर्षा के मामले में चिचोली 470.9 मिमी बारिश के साथ जिले में पहले स्थान पर है। इसके बाद घोड़ाडोंगरी में 439 मिमी, मुलताई में 349.4 मिमी, प्रभातपट्टन में 335.2 मिमी, भैंसदेही में 325 मिमी, शाहपुर और आमला में 300-300 मिमी, भीमपुर में 277 मिमी, आठनेर में 228.1 मिमी और बैतूल में 221 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। खरीफ फसलों को मिला नया जीवन वहीं बारिश की वापसी से जिले के किसानों ने राहत की सांस ली है। पिछले कुछ दिनों से वर्षा नहीं होने के कारण खेतों में नमी कम हो गई थी और सोयाबीन, मक्का, धान सहित खरीफ की अन्य फसलें प्रभावित होने लगी थीं। अब लगातार बारिश शुरू होने से खेतों में पर्याप्त नमी पहुंची है, जिससे फसलों की बढ़वार बेहतर होने की उम्मीद बढ़ गई है। किसान भी कृषि कार्यों में तेजी से जुट गए हैं। अगले पांच दिन ऐसा रहेगा मौसम भारतीय मौसम विभाग के अनुसार बैतूल जिले में अगले पांच दिनों तक मौसम सक्रिय बना रहेगा। इस दौरान आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने बिजली चमकने और कुछ स्थानों पर तेज बौछारें पड़ने की भी चेतावनी दी है। अधिकतम तापमान 27 से 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। लगातार बारिश से कृषि गतिविधियों को गति मिलने के साथ जल स्रोतों के भरने की भी संभावना बढ़ गई है।



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