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हिमाचल में बनी 46 दवाओं के सैंपल फेल।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की जून माह की ड्रग अलर्ट रिपोर्ट में देशभर की कुल 159 दवाएं और कॉस्मेटिक उत्पाद गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश की 46 दवाएं भी शामिल हैं, जो राज्य की 34 दवा निर्माण इकाइयों में बनी थ
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सबसे गंभीर मामला कालाअंब में निर्मित एडेनोसिन इंजेक्शन के एक बैच का है, जिसे औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 17.बी के तहत नकली (स्प्यूरियस) घोषित किया गया है। हिमाचल प्रदेश के बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) औद्योगिक क्षेत्र से सबसे अधिक 30 उत्पाद गुणवत्ता जांच में असफल रहे। राज्य के बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड, दवनी, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा स्थित दवा निर्माण इकाइयों के उत्पाद इस सूची में शामिल हैं।
बुखार की दवाएं, बच्चों के सिरप भी शामिल
फेल हुए नमूनों में एंटीबायोटिक, हृदय रोग, दर्द निवारक, बुखार की दवाएं, बच्चों के सिरप, खांसी की दवाएं, पेट संबंधी दवाएं, आंखों की दवाएं, इंजेक्शन और विटामिन उत्पाद शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बरोटीवाला के मंधाला स्थित एक इकाई में निर्मित टेल्मिसार्टन 40 एमजी टैबलेट डिसॉल्यूशन और कंटेंट परीक्षण में फेल पाई गई। भुड स्थित कंपनी की टेल्मिसार्टन-एम्लोडिपिन टैबलेट भी डिसॉल्यूशन परीक्षण में असफल रही।
इबुप्रोफेन 400 एमजी गुणवत्ता मानकों पर फेल
इसी तरह, इबुप्रोफेन 400 एमजी और नालागढ़ स्थित उद्योग की एटोडोलैक टैबलेट भी गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं। इंजेक्शन और आई ड्रॉप में भी कमियां पाई गईं। बद्दी में निर्मित थियोकोलचिकोसाइड इंजेक्शन विवरण, पार्टिकुलेट मैटर और स्टेरिलिटी जैसे तीन महत्वपूर्ण परीक्षणों में असफल रहा, जबकि एडेनोसिन इंजेक्शन पीएच परीक्षण में फेल पाया गया।
नियमानुसार कार्रवाई होगी: राज्य दवा नियंत्रक
राज्य दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ (NSQ) घोषित बैचों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसमें संबंधित बैच को बाजार से वापस मंगवाना (रिकॉल), बिक्री पर रोक लगाना, निर्माण इकाई का निरीक्षण करना, कारण बताओ नोटिस जारी करना और आवश्यकता पड़ने पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई करना शामिल है।
