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गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड निवासी दीपक कुमार एमसीए की पढ़ाई के साथ आधुनिक खेती में मिसाल बन गए हैं। वो अपनी चार एकड़ बंजर जमीन पर ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन उगाकर हर महीने 70 हजार रुपए की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी यह सफलता क्षेत्र के युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। दीपक ने अपनी मेहनत और आधुनिक कृषि तकनीक का उपयोग कर इस बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया है। उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाई है, जिससे पानी की बचत के साथ-साथ फसल का उत्पादन और गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। गांव में अपनी जमीन पर खेती शुरू की दीपक ने बताया कि एमसीए की पढ़ाई के बाद उन्होंने मुंबई में कुछ दिनों तक जॉब किया पर खुद के कारोबार की ललक ने उन्हें गांव वापस आने का आइडिया दिया। गांव में अपनी जमीन पर उन्होंने खेती शुरू की और आज वो सफल किसान बन गए हैं। दीपक ग्राफ्टेड पौधों का उपयोग करते हैं, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। इससे फसलों को नुकसान कम होता है और उत्पादन में वृद्धि होती है। उन्हें आधुनिक खेती की प्रेरणा छत्तीसगढ़ से मिली। वहां किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करते देख उन्होंने अपने गांव में भी इसे अपनाने का निश्चय किया। छत्तीसगढ़ से मंगवाया ग्राफ्टेड पौधे दीपक ने छत्तीसगढ़ से 12 रुपए प्रति पौधे की दर से 2,500 ग्राफ्टेड बैंगन और 1,500 ग्राफ्टेड टमाटर के पौधे मंगाकर खेती शुरू की। दीपक ने बताया कि ग्राफ्टेड पौधे तैयार करने के लिए जंगली बैंगन की मजबूत जड़ का उपयोग किया जाता है, जो रोगों और कीटों के प्रति अधिक प्रतिरोधी होती है। ऊपरी भाग (सायन) के रूप में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों का प्रयोग होता है। उन्होंने बैंगन में बीएनआर-212 और टमाटर में साहू किस्म का उपयोग किया है। ग्राफ्टेड बैंगन और टमाटर की खेती से सामान्य पौधों की तुलना में काफी अधिक उत्पादन मिलता है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है। आने वाले दिनों में मासिक आय बढ़ने की उम्मीद साथ ही पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर रहने से किसानों को अच्छी गुणवत्ता की उपज और अधिक आमदनी मिलती है। यही कारण है कि उन्होंने ग्राफ्टेड बैंगन और टमाटर की खेती शुरू की है। दीपक ने बताया कि वर्तमान में बैंगन और टमाटर की खेती से उन्हें प्रतिमाह लगभग 70 हजार रुपए की आमदनी हो रही है। फसल का उत्पादन बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में उनकी मासिक आय एक लाख से डेढ़ लाख रुपए तक पहुंचने की संभावना है। गांवों से पलायन को भी काफी हद तक रोका जा सकता है: दीपक दीपक का कहना है कि खेती को यदि वैज्ञानिक तरीके से किया जाए तो यह किसी भी नौकरी से कम लाभदायक नहीं है। दीपक की इस पहल से गांव के अन्य लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। वर्तमान में उनकी खेती में 10 से 12 लोग नियमित रूप से कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा उनके कई रिश्तेदार और आसपास के किसान भी उनसे प्रेरित होकर आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। दीपक का मानना है कि खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाकर गांवों से पलायन को भी काफी हद तक रोका जा सकता है। अगले सीजन में गोभी की खेती की तैयारी उन्होंने बताया कि इससे पहले वे शिमला मिर्च, मिर्च और तरबूज की खेती भी कर चुके हैं, जिसमें उन्हें अच्छा लाभ मिला था। अब वे अगले सीजन में गोभी की खेती की तैयारी कर रहे हैं और नई तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। दीपक ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि यदि उन्हें सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंप उपलब्ध कराया जाए तो सिंचाई की लागत काफी कम हो जाएगी और उत्पादन में और वृद्धि होगी। इसके अलावा यदि कोली हाउस तथा पौधशाला (नर्सरी) स्थापित करने में सरकारी सहयोग मिले तो वे आसपास के किसानों के लिए स्थानीय स्तर पर ग्राफ्टेड पौधे तैयार कर सकेंगे। इससे किसानों को बाहर से महंगे पौधे मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और क्षेत्र में आधुनिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। दीपक कुमार की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि शिक्षा और खेती एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सोच और कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि क्षेत्र के किसानों और युवाओं के सामने आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल भी पेश की है।
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ग्राफ्टेड टमाटर-बैंगन की खेती ने बदली किस्मत:70 हजार रुपए हर माह हो रही आमदनी, 10 लोगों को रोजगार से जोड़ा; बने प्रेरणा के स्रोत
