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छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत को चुनौती देने वाली प्रवर्तन निदेशालय (ED) और एंटी करप्शन ब्यूरो/आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ACB/EOW) की अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही हाईकोर्ट से मिली जमानत बरकरार रहेगी। हाईकोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था। शुक्रवार को कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए चैतन्य बघेल को राहत दी। ED और ACB/EOW ने हाईकोर्ट के आदेश को अवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। चैतन्य बघेल 18 जुलाई से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उन्हें पहले प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत गिरफ्तार किया था। इसके बाद भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में ACB/EOW ने भी उन्हें जेल में रहते हुए गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों के गंभीर आरोप ED का दावा है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच कथित शराब सिंडिकेट के संचालन में चैतन्य बघेल की अहम भूमिका थी। एजेंसी के अनुसार उन्होंने करीब 1,000 करोड़ रुपए के लेन-देन को व्यक्तिगत रूप से संभाला। वहीं ACB/EOW का आरोप है कि उन्हें कथित तौर पर 200 से 250 करोड़ रुपए का हिस्सा मिला और पूरे शराब घोटाले की राशि 3,200 करोड़ रुपए से अधिक हो सकती है। हालांकि इन आरोपों पर अभी न्यायिक प्रक्रिया जारी है और अदालत ने दोष तय नहीं किया है।
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शराब घोटाला केस…चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से राहत:हाईकोर्ट से मिली बेल को दी थी चुनौती, ED-EOW की याचिका खारिज
