नई दिल्ली46 मिनट पहले
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ईरान जंग के बीच कच्चे तेल के दाम बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए थे। फाइल फोटो
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी है। ब्रेंट क्रूड ऑयल आज 4% बढ़कर 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो पिछले 6 हफ्तों का उच्चतम स्तर है। वहीं अमेरिकी क्रूड भी $89.50 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत में महंगाई और एनर्जी संकट बढ़ा दिया है। इससे भारतीय रुपए और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के फ्लो पर असर पड़ने की संभावना है।
दूसरी ओर, कच्चे तेल के महंगे होने से भारत की ऑइल मार्केटिंग कंपनियों के रिटेल फ्यूल मार्जिन पर भारी दबाव पड़ा है, जिससे डीजल पर कंपनियों को प्रति लीटर 20.4 रुपए का घाटा हो रहा है।

लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमला, हूतियों ने नाकेबंदी का ऐलान किया
तेल की कीमतों में अचानक आए इस उछाल की बड़ी वजह पश्चिम एशिया का बिगड़ता माहौल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के साथ अब यह विवाद फारसी खाड़ी के अन्य हिस्सों में भी फैल गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमला कर दिया है। यह हमला हुती ग्रुप की ओर से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी की घोषणा करने के ठीक एक दिन बाद हुआ है, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।

तेल कंपनियों के शेयर 2.5% तक टूटे
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर पड़ा है…
- हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL): शेयर में 2.50% की गिरावट दर्ज की गई।
- इंडियन ऑयल (IOCL) : शेयर 2% तक नीचे आ गया।
- भारत पेट्रोलियम (BPCL): शेयर में लगभग 1% की कमजोरी देखी गई।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। क्रूड महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ने की आशंका रहती है।

अक्टूबर तक LNG सप्लाई अटकने के आसार
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कतर एनर्जी मिड-अक्टूबर तक लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी LNG के शिपमेंट पर ‘फोर्स मैज्योर’ को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
कतर ने जून में ही एशिया और यूरोप के कुछ ग्राहकों को सूचित किया था कि अगस्त और सितंबर के कार्गो रद्द रहेंगे। अगर यह पाबंदी अक्टूबर तक खिंचती है, तो सर्दियां शुरू होने से पहले गैस का ग्लोबल संकट और गहरा सकता है, क्योंकि यूरोप और एशियाई देश सीमित LNG सप्लाई के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करेंगे।
सेंसेक्स 364 और निफ्टी 127 अंक गिरी
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर बिकवाली का भारी दबाव बन गया है। 23 जुलाई को सेंसेक्स 364 अंक की गिरावट के साथ 76,391 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 127 अंक की गिरावट रही, ये 23,870 पर बंद हुआ। रियल्टी, एनर्जी और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा बिकवाली रही।
मई में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े थे
मई में IOC, BPCL और HPCL ने महंगे अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों का हवाला देते हुए किस्तों में पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में ₹7.50-₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। देश के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों में से 90% से अधिक पर इन तीनों सरकारी कंपनियों का नियंत्रण है।

आगे क्या?
पश्चिम एशिया में अगर यह गतिरोध लंबा खींचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर सकती हैं। इससे आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार, खासकर बैंकिंग, ऑटो और पेंट कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।
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