कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार, भूमि घोटाले में FIR दर्ज:फर्जी किसान प्रमाण पत्रों से 106 कनाल जमीन खरीदी, राजस्व अधिकारी पर भी आरोप




कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार क्षेत्र में संदिग्ध भूमि सौदों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की आठवीं स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर राज्य विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (SVACB) के निर्देश पर क्राइम ब्रांच ने FIR दर्ज की है। यह FIR राजेश कुमार, उनकी पत्नी रेनू, बहन सुनीता देवी और तत्कालीन पटवारी, कानूनगो, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, सब-रजिस्ट्रार सहित अन्य अज्ञात सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS)-2023 और हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट, 1972 की धारा-118 के उल्लंघन सहित विभिन्न धाराओं में दर्ज की गई है। SIT ने वर्ष 1998 से 2025 के बीच कांगड़ा और नगरोटा बगवां तहसीलों के बिक्री विलेखों, म्यूटेशन और राजस्व अभिलेखों की जांच की। जांच में सामने आया कि राजेश कुमार, जो मूल रूप से गैर-कृषक थे, ने वर्ष 1998 में धारा-118 के तहत भूमि खरीदी थी। नियमों के अनुसार, इस खरीद का उल्लेख जमाबंदी और म्यूटेशन रिकॉर्ड में होना अनिवार्य था। तत्कालीन पटवारी और कानूनगो ने दर्ज नहीं की प्रविष्टि जांच के मुताबिक, तत्कालीन पटवारी और कानूनगो ने कथित तौर पर जानबूझकर यह प्रविष्टि दर्ज नहीं की। SIT का कहना है कि इसी चूक का लाभ उठाकर बाद में बिना वैध अनुमति और वास्तविक कृषक प्रमाण पत्र के कई स्थानों पर कृषि भूमि खरीदी गई। रिपोर्ट के अनुसार, राजेश कुमार ने कथित तौर पर फर्जी कृषक प्रमाण पत्रों के आधार पर अपने नाम पर लगभग 61.84 कनाल और पत्नी रेनू के नाम पर 44.43 कनाल कृषि भूमि खरीदी। जांच में यह भी पाया गया कि रेनू को केवल पत्नी होने के आधार पर कृषक दर्शाया गया, जबकि स्वयं राजेश कुमार का कृषक दर्जा ही जांच के दायरे में है। अवैध कृषक दर्जा हासिल कर भूमि खरीदने का आरोप वहीं, राजेश कुमार की बहन सुनीता देवी पर भी पिता के माध्यम से ‘तमलीकनामा’ के जरिए कथित तौर पर अवैध कृषक दर्जा हासिल कर भूमि खरीदने का आरोप है। SIT ने अपनी रिपोर्ट में कई बिक्री विलेखों में बिना वैध स्पेशल या जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी के हस्ताक्षर होने और इसके बावजूद दस्तावेजों के पंजीकरण का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट के अनुसार, उपहार पत्र, तमलीकनामा और तबादलानामा जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल कर धारा-118 के प्रावधानों को दरकिनार किया गया। फर्जी दस्तावेज तैयार किए, राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी जांच एजेंसी का मानना है कि यह पूरा मामला फर्जी दस्तावेज तैयार करने, राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी और सरकारी अधिकारियों की कथित मिलीभगत से की गई सुनियोजित आपराधिक साजिश का हिस्सा है। एसपी विजिलेंस नॉर्थ रेंज रमन शर्मा ने पुष्टि की कि एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर नियमित एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच जारी है। प्रत्येक आरोपी और संबंधित अधिकारी की भूमिका, अवैध भूमि लेनदेन, वित्तीय लाभ, बैंक खातों तथा अन्य संपत्तियों की जांच की जा रही है। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, जालसाजी, सार्वजनिक अभिलेखों में कूटरचना और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से संबंधित धाराओं के साथ हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट की धारा-118 के उल्लंघन को शामिल किया गया है। गगल एयरपोर्ट विस्तार क्षेत्र में बढ़ती जमीन की कीमतों के बीच सामने आए इस मामले को प्रदेश के सबसे बड़े संदिग्ध भूमि सौदों में से एक माना जा रहा है, जिसकी जांच अब कई अन्य भूमि लेनदेन तक भी पहुंच सकती है।



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