शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे ही दिया। जंतर-मंतर पर 35 दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और देश-दुनिया के कई शहरों में हो रहे प्रदर्शन से सरकार दबाव में थी।
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12 साल की सरकार में दूसरा मौका है, जब ऐसे प्रदर्शन के सामने झुकना पड़ा है। 2021 में किसान आंदोलन के बाद तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े थे।
आज के एक्सप्लेनर में जानिए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के 5 बड़े फैक्टर और अब आगे क्या होगा…

- 20 जून को कॉकरोच जनता पार्टी, CJP ने जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट शुरू किया। 8 दिन बाद सोनम वांगुचक भूख-हड़ताल पर बैठे। प्रोटेस्ट में असली मोड़ आया 18 जुलाई को, जब दिल्ली पुलिस ने सफेद चादरों में लपेटकर सोनम को उठा लिया। सहानुभूति में प्रोटेस्ट साइट पर भीड़ बढ़ने लगी।

दिल्ली पुलिस सिविल कपड़ों में आकर सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरगंज अस्पताल ले गई थी।
- 20 जुलाई को संसद मार्च में सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया। उसके वीडियो वायरल हुए, तो पूरे देश में आक्रोश बढ़ गया।
- न्यूयॉर्क टाइम्स जैसी इंटरनेशनल मीडिया ने लिखा, ‘खून बहा, लाठियां चलीं, आंसू गैस के गोले दागे गए, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे।’
- 21 जुलाई को राहुल गांधी अचानक पीएम आवास के बाहर धरना पर बैठ गए। अलग-अलग शहरों और दुनियाभर में प्रदर्शन होने लगे।
- ब्रिटेन, जर्मनी, नीदरलैंड्स, आयरलैंड, कनाडा और अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्र भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करने लगे थे। लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर 1000 से ज्यादा छात्र जमा हो गए थे।
- कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा- अब ये प्रोटेस्ट कॉकरोच जनता पार्टी के दायरे से बाहर चला गया है। देशव्यापी आंदोलन की धमकी दी थी।
- सरकार ने 24 घंटे का समय मांगा था, साढ़े तीन बजे कॉकरोच पार्टी से मुलाकात का समय था, लेकिन इससे पहले ही धर्मेंद्र ने इस्तीफा दे दिया।

1. जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी का प्रोटेस्ट: कॉकरोच जनता पार्टी 35 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन कर रही थी। 20-30 हजार युवा हर वक्त वहां मौजूद थे। 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान ‘पुलिस एक्शन’ के बाद भीड़ और बढ़ने लगी।
2. राहुल गांधी की अगुवाई में आक्रामक विपक्ष: 21 जुलाई को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेता पीएम आवास के पास धरने पर बैठे। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह मनाने पहुंचे ,तो राहुल ने कहा कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता, तब तक कोई चर्चा नहीं होगी। राहुल पीएम मोदी के माफीनामे पर भी अड़ गए। इसके बाद रोजाना राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। पूरा विपक्ष इस मामले में एकट्ठा रहा। एक हफ्ते से संसद नहीं चलने दी।

पीएम आवास के पास धरने दे रहे राहुल गांधी को सुरक्षा का हवाला देकर दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।
3. पार्टी के भीतर नेताओं और सेलिब्रिटीज की उठती आवाजेंः बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने भी छात्रों की मांगों और चिंता का समर्थन किया। क्रिकेटर्स, बॉलीवुड सेलिब्रिटी, साउथ फिल्मों के स्टार्स, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर भी युवाओं के विरोध प्रदर्शन से जुड़ने लगे थे। पेपर लीक को गंभीर मुद्दा बता रहे थे।

- 23 जुलाई को मुरली मनोहर जोशी ने सोशल मीडिया पोस्ट किया- देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवा छात्रों को कई दिनों से नई दिल्ली की सड़कों पर इकट्ठा देखना दुखद है। युवा लड़कियों के साथ भी बर्बर दुर्व्यवहार देखना बेहद दुखद है।
- 24 जुलाई को RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, ‘नई पीढ़ी सवाल पूछती है। हमें उन्हें तर्क समझाना होगा। हमें उन्हें बहुत स्नेह देना होगा। हमें उनके साथ समय बिताना होगा। हमें उनसे संवाद करना होगा।’ हालांकि भागवत ने सीधे तौर पर प्रदर्शन पर तो कुछ नहीं कहा
- अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने बीजेपी सूत्रों के हवाले से लिखा, ‘राहुल गांधी ने पीएम मोदी के आवास के बाहर अचानक धरना देकर सत्ताधारी खेमे को चौंका दिया और उसे बैकफुट पर धकेल दिया। बीजेपी और NDA सहयोगी दलों के सांसदों ने 20 जुलाई की घटना से पैदा हुई निगेटिव इमेज पर नाराजगी जाहिर की।’
- एक बीजेपी सांसद ने कहा, ‘इस मामले को बेहतर तरीके से सुलझाया जा सकता था। इसे इस स्तर तक क्यों पहुंचने दिया गया? हमारे पास हर तरह की मशीनरी थी, फिर भी हमसे मिस-मैनेज हुआ।’
- अंग्रेजी अखबार द हिंदू से NDA के सीनियर सांसद ने बताया, ‘दुर्भाग्यवश, स्थिति को बिल्कुल भी ठीक से नहीं संभाला गया। इससे भी ज्यादा परेशानी की बात है कि सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद प्रोटेस्ट लीडरलेस लग रहा है।’

- भारत में आधी आबादी 29 साल से कम उम्र की है। करीब एक-चौथाई वोटर्स भी युवा हैं। CSDS-लोकनीति के मुताबिक, 2014, 2019 और 2024 में बीजेपी को एक-तिहाई से ज्यादा युवा वोटर्स ने वोट दिया। लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन, शिक्षा और बेरोजगारी को लेकर युवाओं में सरकार को लेकर नाराजगी भी पैदा हो रही थी।
- पॉलिटिकल रिसर्च एजेंसी ‘VoteVibe’ ने CJP और उसके प्रोटेस्ट को लेकर सर्वे किया, जिसके मुताबिक, 87% लोग CJP को जानते हैं और एक-तिहाई लोग प्रदर्शन का समर्थन करते हैं। 41.4% लोगों का मानना है कि इस प्रदर्शन से बीजेपी और NDA सहयोगियों को नुकसान होगा।
- ऐसे में अगर सराकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं लेती और प्रदर्शन लंबे वक्त तक चलता तो बीजेपी और उसके सहयोगियों को चुनावी नुकसान उठाना पड़ता और जमीनी स्तर पर नाराजगी बढ़ती।

- उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड की विधानसभाओं का कार्यकाल 2027 में खत्म हो रहा है। यहां फरवरी-मार्च 2027 में चुनाव हो सकते हैं। NEET पेपर लीक का मुद्दा और प्रोटेस्ट लंबा खिंचने का असर चुनाव के लिहाज से बीजेपी के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और पंजाब में आम आदमी पार्टी मजबूत स्थिति में है। उत्तराखंड में कांग्रेस 10 साल से सत्ता से बाहर है। ये पार्टियां पेपर लीक और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर खुलकर सामने आई हैं। उत्तर प्रदेश के कई शहरों में सपा कार्यकर्ताओं ने अपने प्रोटेस्ट भी ऑर्गनाइज किए।
- सीनियर जर्नलिस्ट अरुण दीक्षित के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा न होता, तो पार्टियां इसे बीजेपी के खिलाफ बड़ा चुनावी मुद्दा बना सकती थीं। राजधानी से लगे इन तीनों राज्यों के युवा भारी तादाद में दिल्ली में रहते हैं। दिल्ली प्रोटेस्ट का असर इन राज्यों में भी बढ़ सकता था। इससे निश्चित तौर पर बीजेपी को नुकसान होता।
- 2029 में लोकसभा चुनाव होना है। यह आंदोलन जिस हिसाब से बढ़ रहा था, इसकी 1974 के जेपी आंदोलन और तुलना 2011 के अन्ना आंदोलन से होने लगी थी। दोनों आंदोलनों के बाद देश की सरकार बदल गई थी।

2011 में हुए अन्ना आंदोलन के कारण तत्कालीन यूपीए सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और 2014 में हुए आम चुनाव के बाद यूपीए सत्ता हासिल नहीं कर सकी।
- 20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद राहुल गांधी युवाओं के विरोध में शामिल हो गए थे। कांग्रेस हर तरफ से सरकार को घेरने की कोशिश कर रही थी। पीएम आवास के बाहर भी धरना हुआ। अगर कांग्रेस इस मुद्दे को भुना लेती, तो बीजेपी को 2029 में सत्ता गवाने का खतरा हो सकता था।
क्या अब आंदोलन खत्म हो जाएगा?
CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि जब तक बाकी मांगो पर लिखित आश्वासन नहीं मिल जाती, हम हटने वाले नहीं हैं। दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी की जो 3 प्रमुख मांगे थी- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, NEET पेपर लीक के कारण सुसाइड करने वाले छात्रों के परिवारवालों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न हो।
धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा होने के बाद जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके ने कहा- मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी 2 और मांगे हैं। हम ऐसे नहीं जाएंगे। कॉकरोच एक बार घुसता है, तो निकलता नहीं है। जिन बच्चों ने सुसाइड किया उनके परिवार को एक करोड़ मुआवजा मिले। पुलिस वालों पर एक्शन होना चाहिए।

धर्मेंद्र प्रधान के बाद जंतर-मंतर पर जश्न मनाते अभिजीत दिपके, CJP कार्यकर्ता और प्रदर्शनकारी।
कल 24 जुलाई को सौरव दास ने कहा था कि CJP पुलिस एक्शन को लेकर एक वेबसाइट तैयार कर रही है।
पॉलिटिकल एनालिस्ट विजय त्रिवेदी कहते हैं, ‘जब कोई विवाद बातचीत की टेबल पर आ जाता है, तो फिर विरोध दोबारा नहीं बढ़ता, जो भी मुद्दे बचे हैं, वो भी जल्दी सॉल्व हो जाएंगे। ऐसा नहीं लगता कि प्रोटेस्ट इसी तरह जारी रहेगा।’
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