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Sonam Wangchuk Hunger Strike End Update; JP Nadda


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नई दिल्ली1 दिन पहले

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केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार देर रात वांगचुक को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। - Dainik Bhaskar

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार देर रात वांगचुक को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया।

सोनम वांगचुक ने शुक्रवार रात 10:53 बजे एक और वीडियो मैसेज जारी किया है। उन्होंने कहा- 26 दिन भूखा रहने के बाद 11 किलो वजन कम हो गया है, क्या मुझे किसी से कैरेक्टर सर्टिफिकेट लेना पड़ेगा कि मेरा अनशन कितना पवित्र था। उन्होंने कहा-

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क्या मुझे जवाब देना पड़ेगा कि इसके हाथों अनशन क्यों तोड़ा, क्या डील हुई? मुझे कई लोगों ने बताया कि बहुत सवाल उठाए जा रहे हैं कि केंद्रीय मंत्रियों से अनशन क्यों तुड़वाया? अगर कोई डील करनी होती तो क्या 26 दिन भूखा रहता।

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वहीं सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल तुड़वाने में कांग्रेस सांसद का रोल सामने आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने सरकार और वांगचुक के बीच के गतिरोध को खत्म किया।

करीब 3 दिन तक बैक चैनल बातचीत चली। कई स्तरों पर कोशिशें की गई। इसके बाद सहमति बनाने में कामयाबी मिली। तन्खा पहले भी वांगचुक के NSA मामले में सुप्रीम कोर्ट में उनकी ओर से पैरवी कर चुके हैं।

दोनों के बीच अच्छे रिश्ते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि बातचीत में लद्दाख के कुछ नेताओं ने भी मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

अनशन तोड़ने के बाद वांगचुक ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार ने कोई आश्वासन नहीं दिया है। उनके लिए सबसे अहम बात छात्रों पर कार्रवाई रुकवानी थी। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इतना जरूरी नहीं था।

NEET पेपर लीक के खिलाफ वांगचुक 27 दिन से भूख हड़ताल पर थे। उन्होंने गुरुवार देर रात 12:30 बजे अपना अनशन खत्म कर दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे, जहां नड्डा ने वांगचुक को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया।

अनशन खत्म करने की 3 तस्वीरें…

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार रात वांगचुक को जूस पिलाकर अनशन खत्म करवाया।

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार रात वांगचुक को जूस पिलाकर अनशन खत्म करवाया।

नड्डा ने वांगचुक को लिखित आश्वासन का पत्र सोंपा।

नड्डा ने वांगचुक को लिखित आश्वासन का पत्र सोंपा।

वांगचुक के साथ जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और उनका इलाज कर रही डॉक्टरों की टीम।

वांगचुक के साथ जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और उनका इलाज कर रही डॉक्टरों की टीम।

वांगचुक की 5 बड़ी बातें…

वांगचुक ने शुक्रवार सुबह जारी वीडियो संदेश में कहा कि पिछले दो दिन से सरकार के साथ उनकी लगातार बातचीत चल रही थी। इस दौरान उनकी तीन प्रमुख मांगों पर चर्चा हुई। सरकार की ओर से इन मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने भूख हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया। वांगचुक ने कहा,

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सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर केस दर्ज नहीं करने, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजन को उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया।

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  1. 65 सांसदों का मिला समर्थन: विभिन्न दलों के करीब 65 सांसद उनसे मिले या उन्होंने संदेश भेजकर भरोसा दिलाया कि वे संसद में NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली का मुद्दा उठाएंगे।
  2. दो दिन तक चली बातचीत के बाद बनी सहमति: सरकार के साथ लिखित आश्वासन को लेकर लगातार दो दिन बातचीत हुई। इसी वजह से उन्होंने अनशन दो दिन और जारी रखा और आखिरकार सहमति बनने पर इसे समाप्त किया।
  3. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर समझौता नहीं हुआ: सरकार की ओर से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई आश्वासन नहीं मिला, लेकिन उन्होंने इसे अनशन खत्म करने की अनिवार्य शर्त नहीं माना।
  4. आगे की लड़ाई के लिए जान बचाना जरूरी: उनके सामने दो रास्ते थे, या तो अनशन जारी रखकर अपनी जान जोखिम में डालें या फिर आगे भी आंदोलन जारी रखने के लिए अनशन खत्म करें। हजारों लोगों की अपील के बाद उन्होंने दूसरा रास्ता चुना।
  5. छात्रों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता: उनके लिए सबसे अहम मुद्दा यह था कि आंदोलन में शामिल छात्रों पर कोई केस न हो। बाकी मुद्दों, जैसे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पर आगे भी दूसरे तरीकों से संघर्ष जारी रहेगा।

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विपक्षी सांसदों ने भी अनशन खत्म करने को कहा था

22 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के दौरान विभिन्न विपक्षी दलों के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचा, जहां सोनम वांगचुक भर्ती थे। प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के विवेक तन्खा, तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष, सीपीआई(एम) के जॉन ब्रिटास, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह समेत कई सांसद शामिल थे।

सांसदों ने वांगचुक को एक संयुक्त पत्र सौंपकर अनशन समाप्त करने की अपील की और भरोसा दिया कि NEET पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही का मुद्दा संसद के मानसून सत्र में मजबूती से उठाया जाएगा। शुरुआत में करीब 55 सांसदों ने पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, बाद में यह संख्या बढ़कर लगभग 65 हो गई।

कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा और अन्य विपक्षी सांसदों ने 22 जुलाई को वांगचुक से मुलाकात की थी।

कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा और अन्य विपक्षी सांसदों ने 22 जुलाई को वांगचुक से मुलाकात की थी।

वांगचुक ने 28 जून को भूख हड़ताल शुरू की थी

सोनम वांगचुक इस आंदोलन से 28 जून को जुड़े, जब उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की।

लद्दाख से जुड़ी मांग को लेकर भी अनशन कर चुके वांगचुक

यह सोनम वांगचुक का पहला अनशन नहीं था। इससे पहले उन्होंने मार्च 2024 में लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने, पूर्ण राज्य का दर्जा, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर 21 दिन की भूख हड़ताल की थी। इसके बाद सितंबर 2024 में वे ‘दिल्ली चलो पदयात्रा’ लेकर निकले, लेकिन दिल्ली सीमा पर हिरासत में ले लिए गए।

2025 में लद्दाख में आंदोलन के दौरान हिंसा भड़कने के बाद प्रशासन ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया था। बाद में मार्च 2026 में केंद्र सरकार ने NSA के तहत उनकी नजरबंदी का आदेश वापस ले लिया और उन्हें रिहा कर दिया। अब उन्होंने NEET पेपर लीक और परीक्षा सुधार की मांग को लेकर 26 दिन तक अनशन किया, जिसे सरकार से तीन प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद समाप्त किया।

इरोम ने 16 साल तक अनशन किया, जानें ऐसी ही 5 हड़तालें

देश में पहले भी कई नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर लंबी भूख हड़ताल कर चुके हैं। महात्मा गांधी से लेकर जी.डी. अग्रवाल तक कई लोगों ने अनशन का सहारा लिया। सबसे लंबी भूख हड़ताल का रिकॉर्ड इरोम शर्मिला के नाम है।

इरोम शर्मिला ने मणिपुर से सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) हटाने की मांग को लेकर करीब 16 साल (2000-2016) तक भूख हड़ताल की थी। इस दौरान उन्हें जीवित रखने के लिए नाक के जरिए तरल आहार (फोर्स-फीडिंग) दिया जाता था।

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