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बिहार में 600 छात्र गिरफ्तार, इनका क्या होगा?:प्रदर्शनकारी बोले-अगर छात्रों को छोड़ा नहीं गया तो फिर प्रदर्शन,परिजन बोले–सोते बेटे को उठा ले गए




“हम स्टूडेंट्स सड़क पर किसी से लड़ने नहीं निकले थे, अपना हक मांगने निकले थे। हम दिन-रात जगकर पढ़ाई करते हैं, एग्जाम देते हैं और मेहनत करके अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। अगर परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी होती है और उसके खिलाफ आवाज उठाने पर पुलिस लाठी चलाती है, तो छात्र आखिर जाएं कहां? हमें सरकार से सिर्फ इतना चाहिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई हो। सिर्फ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से काम नहीं चलेगा। PM मोदी को भी इस्तीफा देना पड़ेगा। हमारे ऊपर लाठी चलाने की जगह शुरू में ही हमारी बात सुनी जाती, तो ये दिन नहीं आता…” ये कहना है बिहार बंद में शामिल हुए प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स का, जिनका गुस्सा अभी भी पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है। दरअसल, पेपर लीक, परीक्षा में पारदर्शिता और छात्रों पर कार्रवाई के विरोध में शनिवार (25 जुलाई) को AISA ने बिहार बंद का आवाहन किया था। इस दौरान बिहार के 4 जिलों में सबसे ज्यादा उग्र प्रदर्शन देखने को मिला। छपरा में BDO की आंख फूटी, सीवान-सीतामढ़ी में SP घायल छपरा में BDO की आंख फोड़ दी गई, सीवान-सीतामढ़ी में SP पर पत्थर फेंककर उन्हें घायल कर दिया गया। बिहार बंद के दौरान करीब 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी जख्मी हुए हैं। वहीं, पूरे बिहार से 600 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने डिनेट किया है। उनलोगों से पूछताछ की जा रही है। इतने बवाल के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस्तीफा दे दिया है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच खुशी की जगह आंदोलन को आगे जारी रखने की बात सामने आई है। छात्र संगठनों का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी तीन प्रमुख मांगों में से सिर्फ एक मांग की पूर्ति है। दो मांगें अभी बाकी हैं। इनमें निर्दोष छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेना और पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल है। ‘600 छात्र को किया गया डिटेन, क्या होगा इनका भविष्य? क्या अब आंदोलन कमजोर होगा या और बढ़ेगा? छात्र संगठनों की अब क्या बची है मांगें? डिटेन स्टूडेंट्स के परिवार में कैसा डर है… पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें देखिए… ‘धर्मेंद्र गए, अब नरेंद्र मोदी को हटाने की बारी’ मुजफ्फरपुर में NSUI जिला अध्यक्ष आदित्य कुमार करण ने कहा, ‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों के संघर्ष की एक उपलब्धि है, लेकिन आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। अभी धर्मेंद्र प्रधान गए हैं, अब नरेंद्र मोदी को हटाने की बारी है। छात्रों पर जिस तरह अत्याचार हुआ और बेरहमी से लाठीचार्ज किया गया, उसी के विरोध में अब आंदोलन होगा। अगर निर्दोष छात्रों पर दर्ज FIR वापस नहीं लिया गया और जिन छात्रों के साथ अत्याचार हुआ है, उनके परिवारों को मुआवजा नहीं मिला तो हमलोग फिर बड़े आंदोलन के लिए सड़क पर उतरेंगे।’ आदित्य कुमार करण ने कहा कि आंदोलन को देशभर के छात्रों और युवाओं ने मिलकर मजबूत किया है। जिन लोगों ने दिन-रात संघर्ष किया, उनके दबाव के कारण सरकार को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा। तीन मांगों में एक पूरी, दो अभी बाकी NSUI नेता ने बताया, छात्र संगठनों की तीन प्रमुख मांगें थीं। पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी, जो पूरी हो चुकी है। दूसरी मांग पेपर लीक या परीक्षा संबंधी गड़बड़ी के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की है। तीसरी मांग निर्दोष छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ सिर्फ एक मांग पूरी हुई है। बाकी दो मांगों पर केंद्र सरकार की ओर से अभी तक लिखित आदेश नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि जब तक बाकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं माना जाएगा।।” Gen-Z के युवा वोट से बनाएंगे भविष्य वहीं, पटना में प्रदर्शन में शामिल हुईं 12वीं की छात्रा भाव्या ने कहा, वह करीब दो साल बाद मतदान के लिए योग्य हो जाएंगी। आज छात्रों के साथ जो कुछ हो रहा है, उसे Gen-Z के युवा भविष्य में अपने वोट के जरिए जरूर याद रखेंगे। इस एजुकेशन सिस्टम के फेल्योर की वजह से हमें जो कुछ सहना पड़ा है, उसे हम अपने वोट के जरिए जरूर दिखाएंगे। हम लोग बीजेपी की सरकार से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं। अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, लेकिन देश का लोकतंत्र रहना चाहिए। इसलिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहती हूं कि क्या यही उनका लोकतंत्र है? ‘पेपर लीक न हो, परीक्षा समय पर और पारदर्शी हो’ प्रदर्शन में शामिल सुप्रिया ने सरकार और प्रशासन पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि छात्रों को मौजूदा व्यवस्था से कोई उम्मीद नहीं रह गई है। ऐसी कोई जगह नहीं है जहां करप्शन न हो। प्रदर्शन में जितनी पुलिस तैनात की गई है, अगर उतनी पुलिस लड़कियों की सुरक्षा के लिए तैनात रहे और सही तरीके से व्यवस्था संभाले तो हर रेपिस्ट जेल में होगा।पुलिस और प्रशासन की नाकामियों की वजह से कई आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। सुप्रिया ने कहा कि छात्रों की सबसे बड़ी चिंता परीक्षा व्यवस्था को लेकर है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि परीक्षा से ठीक पहले छात्रों को बताया जाए कि सेंटर बदल गया है। छात्र कई दिनों और महीनों तक तैयारी करते हैं। उन्होंने आगे कहा, मंत्रियों के बेटे-बेटियां विदेशों में पढ़ रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि इंडिया का एजुकेशन सिस्टम खराब है। आम छात्रों को इसी व्यवस्था में पढ़ना पड़ता है और परीक्षा, पेपर लीक और सेंटर जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हम चाहते हैं कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को ऐसा बनाए कि हर छात्र को बराबरी का अवसर मिले। ‘युवाओं की आवाज सुनने के लिए सरकार के पास 7 सेकंड नहीं’ प्रदर्शन कर रहे एक छात्र ने बताया, देश के युवाओं की आवाज सुनने के लिए सरकार के पास सात सेकंड का समय नहीं है। हमारे छात्र सड़कों पर हैं, उनके भविष्य का सवाल है, उनकी परीक्षा और रोजगार का सवाल है, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अगर सिर्फ सात सेकंड लाइव आकर देश के छात्रों की बात सुन लेते तो शायद उन्हें पता चलता कि युवाओं के मन में कितना गुस्सा और कितनी पीड़ा है। एक तरफ हमारे देश के युवा अपनी पढ़ाई, परीक्षा और भविष्य को लेकर सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं, दूसरी तरफ प्रधानमंत्री विदेश में जाकर मेलोनी को चॉकलेट देने में व्यस्त हैं। सवाल यह है कि प्रधानमंत्री को सात समंदर पार जाकर दूसरे देश के नेता से मिलने का समय मिल सकता है, लेकिन भारत के करोड़ों युवाओं की आवाज सुनने के लिए सात सेकंड का समय क्यों नहीं मिल सकता? हम हिंसा नहीं चाहते। हम चाहते हैं कि हमारी बात सुनी जाए। अगर सरकार छात्रों से संवाद कर लेती तो शायद सड़क पर उतरने की जरूरत ही नहीं पड़ती। प्रदर्शनकारी छात्र बोले-‘यह सिर्फ केंद्र का नहीं, राज्यों का भी मुद्दा है’ औरंगाबाद में प्रदर्शन कर रहे छात्र का कहना है, यह सिर्फ केंद्र सरकार का मुद्दा नहीं है, बल्कि राज्यों का भी उतना ही बड़ा मुद्दा है। पेपर लीक, भ्रष्टाचार और परीक्षा में पारदर्शिता को लेकर कोई नेता गंभीरता से बात नहीं कर रहा है। नेताओं के लिए चुनाव जरूरी है, लेकिन छात्रों की परीक्षा और भविष्य का मुद्दा पीछे क्यों चला जाता है? कोरोना के समय भी चुनाव हुए, लेकिन जब छात्रों के भविष्य की बात आती है तो उनकी समस्याओं को क्यों टाल दिया जाता है? हम छात्र आखिर क्या करें? हमारे पास ऑपशन क्या बचा है? हम दरोगा की परीक्षा देते हैं तो उसमें भी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते हैं। हमें कह दिया जाता है कि कोई गड़बड़ी नहीं हुई, लेकिन हम उस व्यवस्था पर भरोसा कैसे करें, जब लगातार पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं की खबरें सामने आती रहती हैं? BPSC की परीक्षाओं में भी जांच की बात सामने आती है। बिहार में दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की स्थिति भी छात्रों के सामने है। 2023 में फॉर्म भरने के बाद अगर कई साल तक परीक्षा की तारीख ही स्पष्ट नहीं हो, तो छात्र क्या करें? हम अपनी उम्र और अपने कई साल सिर्फ परीक्षा का इंतजार करने में कैसे निकाल दें? हमने सरकार को चुना है, इसलिए सरकार से उम्मीद करना हमारा अधिकार है। हम कोई गलत मांग नहीं कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि परीक्षा निष्पक्ष हो, पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर रोक लगे और भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी हो। हम हिंसा के समर्थक नहीं हैं। हम गांधी जी के अहिंसा के रास्ते पर चलकर अपनी मांग रखना चाहते हैं। हमारा आंदोलन छात्रों के भविष्य के लिए है। हम सरकार से लड़ना नहीं चाहते, हम सरकार से सिर्फ अपने भविष्य का भरोसा मांग रहे हैं। अगर सरकार हमारी बात सुने और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाए, तो छात्रों को सड़क पर उतरने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। बिना कुछ बोले हमला कर दिया, दो-चार लाठियां भी मारीं’ बिहार बंद के दौरान सीतामढ़ी में प्रदर्शनकारियों के हमले में घायल हुए प्रमोद कुमार ने बताया, मैं अपनी बहन का इलाज करवा कर अस्पताल से घर लौट रहा था। इसी दौरान कुछ लोग अचानक मेरे कार के सामने आ गए। उन्होंने हमला करना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी बोल रहे थे- मारो-मारो…हमला में मुझे भी 2-4 लाठी लगी है। मेरे शरीर से खून निकल रहा है। ‘धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से खुशी, लेकिन पेपर लीक पर सख्त कानून बने’ पटना के रहने वाले छात्र रेवंत रावल ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा, छात्रों के लंबे विरोध के बाद इस्तीफा हुआ है, लेकिन केवल इस्तीफे से समस्या खत्म नहीं होगी। पेपर लीक और परीक्षा में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार को सख्त कानून बनाना चाहिए। रेवंत ने कहा कि अगर भविष्य में दोबारा पेपर लीक या परीक्षा में गंभीर अनियमितता सामने आती है तो छात्र फिर सड़क पर उतरेंगे। छात्र अपने भविष्य के साथ समझौता नहीं कर सकते। हमारी मांग है कि परीक्षा व्यवस्था पारदर्शी हो और जो लोग पेपर लीक या फर्जीवाड़े में शामिल हैं, उनके खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई हो कि भविष्य में कोई ऐसा करने की हिम्मत न करे। “हम बिहार के छात्र हैं। अगर कोई हमसे छात्र होने का प्रमाण मांगता है तो हम अपना स्टूडेंट प्रूफ दिखाने के लिए तैयार हैं। हमारा मुद्दा बिल्कुल स्पष्ट है छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। 36 दिन की मेहनत, पूरे GEN-Z की जीत छात्र नेता ने कहा, हमारे आह्वान पर देशभर के युवा खुद-ब-खुद सड़कों पर निकलकर आए। 36 दिनों तक भारत की हर गली, हर मोहल्ले और हर जिले से युवाओं ने अपनी आवाज बुलंद की। यह सिर्फ किसी एक संगठन की जीत नहीं है, बल्कि पूरे छात्र समुदाय और छात्र शक्ति की जीत है। धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे दिया। यह जीत उन तमाम संघर्षों की जीत है, उन माता-पिताओं के संघर्ष की जीत है, जिनके बेटे-बेटियों ने अपने भविष्य के लिए सड़कों पर संघर्ष किया। यह उन सभी युवाओं की जीत है, जिन्होंने एक-दूसरे का हाथ थामकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाया। आने वाले समय में भी छात्र संगठन इसी तरह छात्र हित के मुद्दों पर कदम से कदम मिलाकर संघर्ष करते रहेंगे। कोई भी सरकार आए या जाए, अगर वह तानाशाही रवैया अपनाएगी और छात्रों, युवाओं की आवाज को दबाने की कोशिश करेगी तो हम लोकतांत्रिक तरीके से उसका विरोध करेंगे। लोकतंत्र की बात आती है तो मुझे अटल बिहारी वाजपेयी जी की वह बात याद आती है कि सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, लेकिन देश रहना चाहिए और देश का लोकतंत्र रहना चाहिए। हम इसी लोकतंत्र को बचाने के लिए निकले हैं। हम पूरे देश के युवाओं और छात्रों से अपील करते हैं कि अगर भविष्य में दोबारा छात्रों के अधिकारों और लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश हुई तो हम एकजुट होकर उसका विरोध करेंगे। हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति या किसी एक सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकार, पारदर्शी व्यवस्था और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए है।” खुशबू कुमारी बोलीं-‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कोई खुशी की बात नहीं बेगूसराय की छात्रा खुशबू ने कहा, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया है। इसमें खुश होने की क्या बात है? जो सामान्य तौर पर होना चाहिए था, वही हुआ है। लेकिन उस सामान्य कार्रवाई के लिए इतने सारे छात्र घायल हुए, उनका इतना खून बहा और कई छात्रों को जेल तक भेज दिया गया। ऐसे में खुशी मनाने की कोई वजह नहीं है। धर्मेंद्र प्रधान इस पूरे मामले में सिर्फ एक प्यादा हैं। असली जिम्मेदारी उन लोगों की है, जिन्होंने पूरी व्यवस्था को चलाया। पुलिस धर्मेंद्र प्रधान के अधीन नहीं आती। अगर छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ, उन्हें पीटा गया और जेल में डाला गया तो इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को नौकरी पर रखा गया है और वह अपना काम ठीक से नहीं करता है तो उसे हटाया जाता है। लेकिन उसे हटाने के लिए छात्रों को पीटा नहीं जाता, उन्हें घायल नहीं किया जाता और जेल में नहीं डाला जाता। इतने सारे छात्र घायल हुए, लेकिन जिन लोगों की इस पूरी व्यवस्था में मुख्य जिम्मेदारी थी, उनके खिलाफ अभी तक क्या कार्रवाई हुई? इसलिए सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बड़ी जीत बताकर खुश होने का कोई मतलब नहीं है। यह एक सामान्य कार्रवाई थी, जो पहले ही हो जानी चाहिए थी। अब पढ़िए परिजनों का दर्द…. घर में सोते हुए बेटे को उठाकर ले गई पुलिस गिरफ्तार छात्र अंकित की मां रिंकू ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, मेरा बेटा रात में घर पर सो रहा था। पुलिस आई और उसे नींद में ही उठाकर ले गई। इतना ही नहीं उसका मोबाइल फोन भी अपने साथ ले गई। जब मैंने उनसे पूछा कि कहां ले जा रहे हैं। इसपर उन्होंने कुछ जवाब नहीं दिया। अब मेरा बेटा जेल में बंद है। अंकित किसी बड़े अपराध में शामिल नहीं था। वह पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की आर्थिक मदद के लिए अंडे की दुकान भी चलाता है। गरीब का बच्चा है, इसलिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के साथ ही काम भी करता है। उसका सपना है सरकारी नौकरी हासिल कर परिवार की स्थिति को सुधारना है, लेकिन पुलिस के इस एक्शन से मेरे बेटे पर गहरा असर पड़ेगा। रिंकू देवी ने आगे बताया, मेरा बेटा दुकान से कुछ सामान खरीदने बाजार गया था। इसी दौरान वहां पर कुछ बच्चों ने प्रोटेस्ट शुरू कर दिया। इसमें अंकित भी शामिल हो गया, क्योंकि वो भी एग्जाम की तैयारी करता है। उसे भी कई दिक्कतें होती थी। अगर वो इस प्रदर्शन में शामिल हो भी गया तो क्या पुलिस उसे इस तरह से उठाकर ले जाएगी। अगर उसने कोई गलती की थी तो थाने बुलाकर पूछताछ करती। घर में सो रहे बच्चे को छत के रास्ते से आकर उठाकर ले जाना और फिर मारपीट करना कहां का न्याय है? ‘मोबाइल रिचार्ज-सत्तू लेने निकला था बेटा, पुलिस ने पकड़ लिया’ गिरफ्तार छात्र प्रेम कुमार के पिता सुभाष पासवान ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है, मेरा बेटा किसी प्रदर्शन में शामिल होने नहीं गया था। वह मोबाइल रिचार्ज कराने और सत्तू लाने के लिए घर से निकला था। करीब 4 बजे घर वापस भी आ गया था। घर आने के बाद वह अपने काम में लगा हुआ था। देर शाम ड्यूटी के लिए निकल रहा था। उसी समय पुलिस हमारे घर आई और मेरे बेटे को अपने साथ ले गई। सुभाष पासवान का आरोप है कि, हम अपने बच्चे से मिलने के लिए थाना गए थे, लेकिन हमें मिलने नहीं दिया गया। वहां पुलिस सबको मार रही थी। हमें भी डर लगा, इसलिए हम वहां से भागकर आ गए। गार्जियन को भी बच्चे से मिलने नहीं दिया गया। प्रेम कुमार के पिता का कहना है कि, मेरा बच्चा पथराव में शामिल नहीं था। पुलिस के पास अगर कोई फुटेज है तो उसमें दिखा दे कि मेरे बेटे ने पथराव किया है। वह किसी हिंसा में शामिल नहीं था। हो सकता है कि मोबाइल रिचार्ज कराने और सत्तू लेने जाते समय वह प्रदर्शन वाली भीड़ के पास चला गया हो। भीड़ में अगर कोई छात्र खड़ा है तो सिर्फ इसी आधार पर उसे पकड़ लेना सही नहीं है। “मेरा बच्चा पढ़ता है। उसने बीए फाइनल किया है। अभी अपने भाई के साथ कंपनी में काम करता था। वह कोई अपराधी नहीं है। मेहनत करके अपना भविष्य बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में अगर उस पर केस हो गया या उसे जेल भेज दिया गया तो उसकी जिंदगी और भविष्य दोनों खराब हो सकती है। उपद्रवियों को चिन्हित कर कार्रवाई होगी पटना SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा, बंद के दौरान काफी उपद्रव हुआ है। उपद्रवियों की ओर से पत्थरबाजी की गई। सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया है। इस मामले में कई लोगों को डिटेन किया गया है और अन्य को चिन्हित कर रहे हैं। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी। हमलोग अभी दूसरे इलाकों में भी गश्त कर रहे हैं। जहां जरूरत है वहां चेकिंग की जा रही है। कुछ जगहों पर उपद्रवियों की तरफ से पथराव हुआ है। पुलिस की गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचा है और कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। कई जगहों पर पथराव की घटनाएं हुई हैं और इसमें कुछ लोग घायल भी हुए हैं। तेजस्वी यादव का ट्वीट वहीं, तेजस्वी यादव ने विदेश में बैठकर अपने X से ट्वीट कर लिखा, सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर सीधी फायरिंग की। AK-47 से भी फायरिंग की गई। जब 7 हत्याओं का आरोपी अपराधी मुख्यमंत्री बन जाए तब लोकतंत्र में प्रदर्शन कर रहे निर्दोष छात्रों पर पुलिस ऐसे ही गोलियां चलाती है। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।



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