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गुरुग्राम9 घंटे पहले

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दिल्ली में राजघाट पर सोनम वांगचुक ने अपनी पत्नी डॉ. गीतांजलि के साथ महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद वांगचुक ने मीडिया से बात की। - Dainik Bhaskar

दिल्ली में राजघाट पर सोनम वांगचुक ने अपनी पत्नी डॉ. गीतांजलि के साथ महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद वांगचुक ने मीडिया से बात की।

गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सोमवार को डिस्चार्ज हो गए। दोपहर 1:45 बजे अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वह अपनी पत्नी डॉ. गीतांजलि के साथ दिल्ली के राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।

मीडिया से बातचीत में सोनम वांगचुक ने कहा, “मैं देश को बताना चाहता हूं कि बापू का दिखाया रास्ता आज भी उतना ही सही और प्रासंगिक है, जितना 100 साल पहले था। शांतिपूर्ण आंदोलन के कारण हमारी जीत हुई है। हिंसा होती तो मामला बिगड़ सकता था। इसलिए मैंने समय से पहले अनशन खत्म किया।”

वांगचुक लद्दाख से जुड़े मुद्दों और NEET पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर 26 दिनों तक अनशन पर बैठे थे। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस ने उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के बाद गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया था।

दोपहर 1:45 बजे बजे सोनम वांगचुक गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से दिल्ली के लिए निकले थे।

दोपहर 1:45 बजे बजे सोनम वांगचुक गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से दिल्ली के लिए निकले थे।

डिस्चार्ज होने के बाद वांगचुक की चार बातें…

1. गांधी जी का तरीका आज भी काम करता है

सोनम वांगचुक ने कहा- कई लोग कहते रहे कि ऐसे शासन में गांधी जी का रास्ता काम नहीं करेगा, लेकिन मेरी समझ है कि यह रास्ता सरकार से ज्यादा जनता के दिल तक पहुंचता है। सरकार हमारी बात सुने या न सुने, लेकिन जनता जरूर सुनती है। मैंने गांधी जी के इस प्रयोग को सफल होते देखा है। इससे पहले हमने लद्दाख में भी उनके बताए रास्ते पर चलकर आंदोलन किया था। अब मुझे महसूस हुआ कि यह पूरे देश के स्तर पर भी उतना ही प्रभावी है।

2. यह रास्ता कठोर दिल को भी पिघला सकता है

वांगचुक ने आगे कहा- मैं देशवासियों से कहना चाहता हूं कि बापू के दिखाए रास्ते पर चलें। इससे समाधान जरूर निकलता है। देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं होता। जरूरी नहीं कि पहली बार में ही सफलता मिल जाए, लेकिन लगातार प्रयास करने से सफलता जरूर मिलती है। हमें दूसरों को तकलीफ देने के बजाय खुद कठिनाइयों का सामना करना चाहिए। यही रास्ता सबसे कठोर दिल को भी पिघला सकता है।

3. हिंसा से मामला बिगड़ता, इसलिए आंदोलन रोका

उन्होंने कहा- मैं देश के युवाओं को बधाई देना चाहता हूं। उन सभी लोगों का भी धन्यवाद, जिन्होंने इस आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया। हमें समझना होगा कि अगर कोई समाधान निकला है तो वह हमारी ताकत, लाठी या पत्थर से नहीं, बल्कि शांति और संयम से निकला है। हमने खुद कष्ट सहा, इसलिए बात आगे बढ़ी। अगर हिंसा होती, तो मामला और बिगड़ सकता था। इसी वजह से मुझे शांतिपूर्ण आंदोलन को भी तय समय से पहले रोकना पड़ा।”

4. इस्तीफे के बाद उम्मीद है कि सुधार होगा

शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर वांगचुक ने कहा- मुझे पूरी उम्मीद है कि सिस्टम में सुधार होगा। यह सिर्फ एक शुरुआत है। संसद में बिल पर चर्चा हो रही है। इसके बाद जो भी सही हो, उस सिस्टम को अपनाया जाए। पूरी उम्मीद है कि सभी वादे निभाए जाएंगे। जिन्होंने शांति से प्रदर्शन किया, उन पर एक्शन नहीं होगा। जहां भी जनता सवाल करे, वहां के मंत्री और नेता को जवाब देना जरूरी है।

सोनम वांगचुक ने अस्पताल से डिस्चार्ज होने से पहले वीडियो जारी कर कहा कि मेरे शरीर में ताकत लौट रही है।

सोनम वांगचुक ने अस्पताल से डिस्चार्ज होने से पहले वीडियो जारी कर कहा कि मेरे शरीर में ताकत लौट रही है।

VIDEO जारी कर बोले- आगे भी आवाज उठाता रहूंगा

डिस्चार्ज होने से पहले सोनम वांगचुक ने वीडियो जारी कर कहा- “अब मेरी तबीयत पहले से काफी बेहतर है। मैं धीरे-धीरे खाना खा रहा हूं और शरीर में भी ताकत लौट रही है। जैसे स्विट्जरलैंड से लौटने के बाद अनशन शुरू करने से पहले राजघाट जाकर बापू को श्रद्धांजलि दी थी और फिर जंतर-मंतर पहुंचा था, उसी परंपरा को आज भी दोहराया जाएगा। इसके बाद मैं अपने घर लद्दाख के लिए रवाना हो जाऊंगा।

देशभर से छोटे-बड़े, पास-दूर सभी लोगों ने एकजुट होकर इस मुहिम में अपनी आवाज मिलाई। सभी के सहयोग से यह आंदोलन सफल हुआ है और भविष्य में भी जनहित के मुद्दों पर इसी तरह मिलकर आवाज उठाई जाती रहेगी।”

अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि वांगचुक के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ है। उनकी सभी मेडिकल रिपोर्ट सामान्य हैं और वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। अब वह बिना किसी परेशानी के चलने-फिरने में सक्षम हैं।

अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि वांगचुक के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ है। उनकी सभी मेडिकल रिपोर्ट सामान्य हैं और वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। अब वह बिना किसी परेशानी के चलने-फिरने में सक्षम हैं।

अस्पताल से वांगचुक ने 4 VIDEO जारी किए

  • 22 जुलाईः पहला वीडियो, जिसमें उन्होंने कहा ‘अभी भी जिंदा हूं।’ सरकार से छात्रों पर कोई कार्रवाई न होने का आश्वासन मिलने पर अनशन समाप्त करने को तैयार हूं।
  • 24 जुलाईः दूसरा वीडियो, जिसमें उन्होंने 26 दिन का अनशन समाप्त करने की घोषणा की और केंद्र सरकार के साथ हुई बातचीत और लिखित आश्वासन की जानकारी दी।
  • 25 जुलाईः तीसरा वीडियो, जिसमें उन्होंने सफदरजंग अस्पताल से मेदांता शिफ्ट किए जाने के दौरान घटनाक्रम और अनुभव साझा किए।
  • 27 जुलाईः चौथा वीडियो, जिसमें बताया कि फाइनली अस्पताल से डिस्चार्ज हो रहा हूं। गांधी जी को श्रद्धांजलि देने राजघाट जाऊंगा।

लद्दाख से जुड़ी मांग को लेकर भी अनशन कर चुके

यह सोनम वांगचुक का पहला अनशन नहीं था। इससे पहले उन्होंने मार्च 2024 में लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने, पूर्ण राज्य का दर्जा, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर 21 दिन की भूख हड़ताल की थी। इसके बाद सितंबर 2024 में वे ‘दिल्ली चलो पदयात्रा’ लेकर निकले, लेकिन दिल्ली सीमा पर हिरासत में ले लिए गए।

2025 में लद्दाख में आंदोलन के दौरान हिंसा भड़कने के बाद प्रशासन ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया था। बाद में मार्च 2026 में केंद्र सरकार ने NSA के तहत उनकी नजरबंदी का आदेश वापस ले लिया और उन्हें रिहा कर दिया। अब उन्होंने NEET पेपर लीक और परीक्षा सुधार की मांग को लेकर 26 दिन तक अनशन किया, जिसे सरकार से तीन प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद समाप्त किया।

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गुरुग्राम में वांगचुक बोले- शिक्षा ही नहीं, शासन भी बदलेगा:धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बताया आगे का प्लान, इस्तीफा शुरुआत, देश चलाने का तरीका बदलेगा

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