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Supreme Court Plea Against Pellet Gun Use


नई दिल्ली10 मिनट पहले

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पूर्व IPS अधिकारी यशोवर्धन आजाद और दो अन्य लोगों ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है। इनमें दो लोगों का दावा है कि दिल्ली में 20 जुलाई को हुए ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान वे पैलेट गन से घायल हो गए थे।

याचिकाकर्ता यशोवर्धन आजाद, प्रशांत कुमार और शेख इरशाद मंसूरी ने वकील वृंदा ग्रोवर के जरिए यह याचिका दायर की है। याचिका में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की गई है।

20 जुलाई को CJP के चलो संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी।

20 जुलाई को CJP के चलो संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी।

बिना उकसावे के फायरिंग का आरोप

याचिकाकर्ता प्रशांत कुमार ने दावा किया कि वह 20 जुलाई को संसद चलो मार्च में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के रूप में शामिल हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी ओर से बिना किसी उकसावे या आक्रामकता के रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों ने उन पर पैलेट गन से फायरिंग की।

वहीं, 26 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी ने बताया कि वह पासपोर्ट और वीजा संबंधी काम के बाद कनॉट प्लेस में थे। इसी दौरान आरएएफ की पैलेट फायरिंग में वे घायल हो गए थे।

राहुल गांधी ने 24 जुलाई को अपने आवास 10 जनपथ पर छात्रों के प्रदर्शन में पैलेट गन से घायल एक स्टूडेंट के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की ती।

राहुल गांधी ने 24 जुलाई को अपने आवास 10 जनपथ पर छात्रों के प्रदर्शन में पैलेट गन से घायल एक स्टूडेंट के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की ती।

पुलिस पर मनमानी का आरोप

याचिका में कहा गया है कि 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी ने संसद चलो मार्च निकाला था। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने भीड़ प्रबंधन के लिए आरएएफ जवानों की भी मदद ली थी। शाम करीब 4 से 4.30 बजे के बीच पुलिस और आरएएफ ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।

याचिका के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को कनॉट प्लेस के इनर सर्कल की ओर धकेला गया। इस दौरान न तो पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया गया और न ही बल प्रयोग की कोई चेतावनी दी गई।

प्रदर्शनकारी जब भाग रहे थे और कई सरेंडर के लिए हाथ ऊपर उठाए हुए थे, तब आरएएफ ने उन पर अचानक पैलेट गन से फायरिंग कर दी। इससे कई स्टूडेंट्स के साथ वे भी घायल हो गए थे।

हथियार को बताया असंवैधानिक

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि संविधान के तहत सभा करने की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है। उन्होंने तर्क दिया कि पैलेट गन शांतिपूर्ण सभाओं को तितर-बितर करने के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हैं। पैलेट की अनिश्चित गति के कारण यह भीड़ नियंत्रण के लिए एक खतरनाक और मनमाना उपकरण है।

याचिका में मांग की गई है कि 20 जुलाई को नई दिल्ली में हुई इस कार्रवाई में पैलेट गन से घायल हुए सभी पीड़ितों को मुआवजा दिया जाए। साथ ही, उनके पूर्ण इलाज, देखभाल और पुनर्वास सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए जाएं।

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