चंडीगढ़ रिटायर्ड डीएसपी जगबीर सिंह।
चंडीगढ़ पुलिस में वर्ष 2010 में क्लास-4 (वाटर कैरियर) के 11 पदों पर भर्ती में कथित धांधली के मामले में रिटायर्ड डीएसपी जगबीर सिंह और इंस्पेक्टर नसीब सिंह के खिलाफ जिला अदालत में ट्रायल शुरू हो गया है। एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज डॉ. हरप्रीत कौर क
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दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर गड़बड़ी कर कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता लागू होने से पहले दर्ज मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 409, 467, 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) और 13(2) के तहत मुकदमा चलाया जा रहा है।
2016 में दर्ज हुई थी एफआईआर
यह मामला वर्ष 2010 में इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) में वाटर कैरियर (क्लास-4) के 11 पदों की भर्ती से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों की शिकायत मिलने के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने पूरी भर्ती रद्द कर दी थी। मामले की जांच के बाद विजिलेंस ने वर्ष 2016 में एफआईआर दर्ज की। जांच में रिटायर्ड डीएसपी जगबीर सिंह और इंस्पेक्टर नसीब सिंह की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ करीब दो वर्ष पहले अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया था।

जिला अदालत चंडीगढ़।
डिस्चार्ज अर्जी भी हुई खारिज
दोनों आरोपित अधिकारियों ने अदालत में डिस्चार्ज अर्जी दाखिल कर आरोपमुक्त किए जाने की मांग की थी। रिटायर्ड डीएसपी जगबीर सिंह ने दलील दी कि उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस में 37 वर्ष तक बेदाग सेवा की और 30 अप्रैल 2016 को सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान 77 अभ्यर्थियों के बयान दर्ज किए गए, लेकिन किसी ने भी उनके खिलाफ आरोप नहीं लगाया। इंस्पेक्टर नसीब सिंह ने भी खुद को निर्दोष बताया। हालांकि अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त हैं, इसलिए दोनों की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी गई।
22 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने दिया था टेस्ट
भर्ती प्रक्रिया दो चरणों में आयोजित की गई थी। पहले चरण में 50 अंकों का ट्रेड टेस्ट और दूसरे चरण में 10 अंकों का इंटरव्यू होना था। ट्रेड टेस्ट के लिए तत्कालीन आईपीएस अधिकारी आर.एस. घुमन को चेयरमैन बनाया गया था, जबकि उनकी सहायता के लिए डीएसपी जगबीर सिंह और इंस्पेक्टर नसीब सिंह की ड्यूटी लगाई गई थी।
इस भर्ती के लिए 22,036 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 827 उम्मीदवार पहले चरण में सफल हुए थे। अंतिम परिणाम तैयार करते समय आईआरबी के तत्कालीन कमांडेंट अरुण कंपानी को अंक तालिका में गड़बड़ियां मिलीं। जांच में कई अभ्यर्थियों की मार्कशीट में अंक बढ़ाने और घटाने के प्रयास सामने आए, जिसके बाद पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी गई और मामला विजिलेंस जांच तक पहुंचा।
