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विष्णुपद मंदिर सुरक्षा अब बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के हवाले:पितृपक्ष मेले से पहले श्रद्धालुओं की सुरक्षा होगी मजबूत, बिहार स्पेशल आर्म्ड पुलिस के बारे में जानिए




गयाजी में विष्णुपद मंदिर की सुरक्षा अब बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (BSAP) संभालेगी। बिहार सरकार ने पितृपक्ष मेले से पहले यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस कदम को श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। विष्णुपद मंदिर समिति के अध्यक्ष शंभू लाल विट्ठल ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि मंदिर की सुरक्षा के लिए विशेष बल की तैनाती की मांग लंबे समय से की जा रही थी। सरकार के इस निर्णय से लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित माहौल मिलेगा। पितृपक्ष मेले में BSAP के जवानों की तैनाती से सुरक्षा और मजबूत होगी पितृपक्ष मेला धार्मिक दृष्टि से वैश्विक महत्व रखता है। इस दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गया पहुंचते हैं। वे अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म करते हैं। इसके बाद श्रद्धालु भगवान विष्णु के चरणों में पूजा-अर्चना करते हैं। अध्यक्ष विट्ठल ने बताया कि पितृपक्ष मेले में विष्णुपद मंदिर और आसपास लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ होती है। बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस की तैनाती से मंदिर परिसर की सुरक्षा मजबूत होगी। साथ ही, भीड़ नियंत्रण, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आपात स्थितियों से निपटने में भी सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि विष्णुपद मंदिर देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि पितृपक्ष मेले में यह संख्या कई लाख तक पहुंच जाती है। ऐसे में प्रशिक्षित विशेष पुलिस बल की तैनाती समय की आवश्यकता थी। सरकार ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर की गरिमा को ध्यान में रखते हुए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। ‘देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं में सुरक्षा का भरोसा और बढ़ेगा’ मंदिर समिति के अनुसार, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के जिम्मा संभालने के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक व्यवस्थित, आधुनिक तथा प्रभावी होगी। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं में सुरक्षा का भरोसा और बढ़ेगा। पितृपक्ष मेले के दौरान श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के अपने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर सकेंगे। गयाजी का विष्णुपद मंदिर हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु के चरणचिह्न यहीं स्थापित हैं और यहीं पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी वजह से हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।



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