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लुधियाना के मलकपुर पंचायत फंड घोटाले का केस:पूर्व इंस्पेक्टर ने की थी शिकायत, पूर्व बीडीपीओज, सरपंच, पंचायत सचिव, एई और ग्राम सेवक नामजद




लुधियाना जिले के गांव मलकपुर में पंचायत फंड के कथित बहु-करोड़ रुपये के घोटाले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों में तत्कालीन ब्लॉक डेवलपमेंट एंड पंचायत ऑफिसर (बीडीपीओ), पंचायत सचिव, सरपंच, सहायक अभियंता (एई) और ग्राम सेवक शामिल हैं। मामला डिप्टी कमिश्नर के आदेश पर हुई विस्तृत जांच के बाद पुलिस कमिश्नर के निर्देशों पर दर्ज किया गया। थाना पीएयू पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पूर्व इंस्पेक्टर ने की थी शिकायत
यह शिकायत गांव मलकपुर निवासी और पूर्व इंस्पेक्टर नाजर सिंह ने डिप्टी कमिश्नर को दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2013 से 2024 के दौरान गांव की दो पंचायतों में करोड़ों रुपये के सरकारी फंड का अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की मिलीभगत से दुरुपयोग किया गया। बाइपास के लिए मिले थे 13.74 करोड़ रुपये
एफआईआर के अनुसार, वर्ष 2017-18 में बाइपास परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे के रूप में सरकार ने पंचायत के खाते में करीब 13.74 करोड़ रुपये जमा करवाए थे। इसके अलावा विभिन्न सरकारी अनुदान और ग्रामीण विकास निधि (आरडीएफ) की राशि भी पंचायत खातों में आई। आरोप है कि इन पैसों का अधिकांश हिस्सा गांव की गलियों और नालियों के निर्माण पर खर्च दिखाया गया, जबकि भुगतान निर्धारित सरकारी प्रक्रिया और तकनीकी मंजूरी के बिना किए गए। कैश बुक के पन्ने गायब, वर्षों तक नहीं हुआ ऑडिट
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 के बाद ग्राम सभा के खातों का ऑडिट नहीं कराया गया। जांच के दौरान कैश बुक और कार्यवाही रजिस्टर के कई पन्ने भी गायब मिले। शिकायत में कहा गया कि विभागीय अधिकारियों को इन अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद ग्रामीणों की लिखित और मौखिक शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
डिप्टी कमिश्नर के आदेश पर एडिश्नल कमिश्नर (ग्रामीण विकास) की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई थी। जांच लंबे समय तक लंबित रही और मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा। हाईकोर्ट ने निर्धारित समय सीमा में जांच पूरी करने के निर्देश दिए थे। सूत्रों के अनुसार, अंतिम जांच रिपोर्ट में पाया गया कि 2017 से 2023 के बीच विभिन्न अधिकारियों के कार्यकाल में भुगतान करते समय निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। पंचायत स्तर पर प्रस्ताव पारित कर चेक जारी किए गए, लेकिन आवश्यक तकनीकी स्वीकृति नहीं ली गई। इन अधिकारियों को बनाया गया आरोपी
एफआईआर में जिन लोगों को नामजद किया गया है, उनमें तत्कालीन बीडीपीओ रूपिंदरजीत कौर, गुरमेल सिंह, धनवंत सिंह, मलकीत सिंह भट्टी और राजिंदर कौर, सहायक अभियंता जसविंदर सिंह, ग्राम सेवक तेजा सिंह, पंचायत सचिव बलदेव सिंह, सुखमिंदर सिंह, जगरूप सिंह, किरणपाल सिंह और कमल भारती, तथा तत्कालीन सरपंच मलकीत कौर शामिल हैं। इनमें से कुछ अधिकारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। पुलिस जुटी रिकॉर्ड और बैंक खातों की जांच में
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में विस्तृत पुलिस जांच की सिफारिश की थी। समिति ने यह भी उल्लेख किया कि कुछ नामजद अधिकारी पूछताछ के दौरान उपस्थित नहीं हुए, जिससे उनकी भूमिका को लेकर संदेह और गहरा गया। फिलहाल पुलिस पंचायत से जुड़े बैंक खातों, वित्तीय दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और अन्य सरकारी अभिलेखों की जांच कर रही है ताकि सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग की पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके।



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