अलवर में नौकरी करने वाले एक युवक के पैन कार्ड का इस्तेमाल कर 11.95 करोड़ का कारोबार कर लिया गया। युवक खुद बिजनेस शुरू करने के लिए सीए के पास पहुंचा तो पता चला कि उसके पैन कार्ड से दिल्ली में कंपनी चल रही है।
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पीड़ित अंकित यादव ने बताया- मैं मालवीय नगर स्थित एक कृषि कंपनी में सुपरवाइजर के पद पर काम करता हूं। पेड़ पौधे लगाने का काम है। कुल 10 हजार सैलरी है। अप्रैल में कारोबार शुरू करने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) के पास गया था। वहां ऑनलाइन जांच के दौरान पता चला कि मेरे पैन कार्ड पर पहले से ही जीएसटी रजिस्ट्रेशन किया हुआ है।
इसके बाद जीएसटी और आयकर विभाग की वेबसाइट पर जानकारी जुटाई। सामने आया कि दिल्ली स्थित आकांक्षा सिंथेटिक्स नाम की फर्म मेरे पैन कार्ड का इस्तेमाल कर रही है।
कोर्ट के आदेश के बाद मामला दर्ज हुआ
इसके बाद मैंने 5 जुलाई को एसीजेएम नंबर-3 कोर्ट में परिवाद दायर किया। कोर्ट के आदेश पर 29 जुलाई को अरावली विहार थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि युवक के पैन कार्ड का इस्तेमाल कर जीएसटी रजिस्ट्रेशन किसने कराया और करोड़ों रुपए का कारोबार कैसे संचालित किया गया।

पीड़ित अंकित यादव के नाम से दो साल में 11.95 करोड़ का कारोबार हुआ।
दो साल में किया 11.95 करोड़ का कारोबार
पीड़ित ने शिकायत में बताया कि साल 2023-24 में 2 करोड़ 62 लाख 15 हजार 452 रुपए और 2024-25 में 9 करोड़ 33 लाख 56 हजार 142 रुपए का कारोबार मेरे नाम पर दिखाया गया। यानी दो साल में करीब 11 करोड़ 95 लाख 71 हजार 594 रुपए का कारोबार किया गया।
शिकायत में बताया गया कि जीएसटी रिकॉर्ड में दूसरे मोबाइल नंबर दर्ज हैं। कारोबार के लिए कोटक महिंद्रा बैंक, प्रीतमपुरा (दिल्ली) का बैंक खाता इस्तेमाल किया गया है।
अंकित का कहना है कि उसका केवल पंजाब नेशनल बैंक, दिल्ली रोड अलवर में एक बचत खाता है। उसने कभी जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं कराया, न ही उसके नाम से कोई कारोबार चलता है। संबंधित फर्म के अधिकारी, कर्मचारी और मालिक ने अन्य संबंधित लोगों से मिलीभगत कर मेरे पैन कार्ड का दुरुपयोग किया है।
एडिशनल SP दीपक कुमार ने बताया कि अरावली विहार थाने में पैन कार्ड का दुरुपयोग कर जीएसटी नंबर लेकर कारोबार करने का मामला सामने आया है। इसकी रिपोर्ट पर मामले की जांच कर रहे हैं।
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भास्कर एप ने अपनी खबर में खुलासा किया था कि अलवर समेत पूरे राजस्थान में शराब ठेकेदार गरीबों को 10 से 15 हजार रुपए का लालच देकर लाइसेंस ले रहे हैं। राजस्थान के कई शहरों में शराब माफिया ने आबकारी विभाग को ऐसे ही ठगा है। पूरे राजस्थान में विभाग का ऐसे ठेकेदारों पर करीब 160 करोड़ रुपए बकाया हो गया है। (पढ़ें पूरी खबर)
