'बेटी की शादी अटकी, बैंक ने कहा- सिविल खराब है':महिलाओं का एजेंसी पर फूटा गुस्सा, मशरूम क्लस्टर के नाम पर जीविका दीदियों पर चढ़ा कर्ज




मुजफ्फरपुर में मशरूम उत्पादन के नाम पर कथित करोड़ों रुपए के ऋण घोटाले से परेशान जीविका दीदियों का गुस्सा गुरुवार को फूट पड़ा। मुशहरी और बोचहां प्रखंड की सैकड़ों महिलाएं समाहरणालय पहुंचीं। ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। महिलाओं ने एजेंसी पर उनके नाम पर करोड़ों रुपए का लोन निकालने, काम नहीं देने। अब उनकी वजह से बैंक की ओर से वसूली का दबाव बन रहा, इसका आरोप लगाया। प्रदर्शन कर रही महिलाओं की सबसे बड़ी मांग थी कि उनके नाम पर लिए गए ऋण को खत्म कराया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। महिलाओं ने समाहरणालय परिसर में कंपनी के निदेशक आशुतोष मंगलम को बाहर बुलाने की मांग करते हुए नारेबाजी की। स्थिति को देखते हुए सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें समझाया, जिसके बाद सभी को समाहरणालय सभागार में बैठक के लिए बुलाया गया। बैठक में उप विकास आयुक्त (डीडीसी) निशांत सिहारा, जीविका की जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) अनीशा गांगुली और कंपनी के निदेशक आशुतोष मंगलम मौजूद थे। यहां भी महिलाओं ने हंगामा करते हुए एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई और अपने ऊपर लादे गए कर्ज से मुक्ति की मांग उठाई। अधिकारियों ने किसी तरह सभी को शांत कराया और एक-एक कर उनकी शिकायतें सुनीं। ‘बेटी की शादी अटकी, बैंक ने कहा- सिविल खराब है…’ सबसे मार्मिक तस्वीर उन महिलाओं की रही, जिनकी जिंदगी इस कथित फर्जीवाड़े के बाद पूरी तरह प्रभावित हो गई है। मुशहरी की किरण देवी ने कहा कि उनके नाम पर बैंक से लोन दिखाया जा रहा है, जबकि उन्हें एक रुपए भी नहीं मिला। अब बैंक नया ऋण देने से इनकार कर रहा है क्योंकि उनका सिविल स्कोर खराब हो गया है। “बेटी की शादी करनी है, लेकिन बैंक कह रही है कि पहले पुराना लोन चुकाइए। जब हमने पैसा लिया ही नहीं तो चुकाएं कैसे? न हमें पैसा मिला, न काम मिला, ऊपर से हम कर्जदार बना दिए गए। हमारी मांग है कि हमें नो-ड्यूज दिया जाए, ताकि हमारी जिंदगी फिर से सामान्य हो सके।” बैंक लगातार भेज रहा है नोटिस बोचहां की गीता देवी, मुशहरी की मुन्नी देवी, माला देवी, काजल देवी और अन्य महिलाओं ने भी बताया कि परिवार के लोग उन्हें रोज ताने दे रहे हैं। बैंक लगातार नोटिस भेज रहा है और ऋण नहीं चुकाने पर कुर्की-जब्ती तक की चेतावनी दी जा रही है। इससे पूरा परिवार मानसिक तनाव में है। “लखपति दीदी” बनाने का सपना दिखाया महिलाओं ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में जीविका के माध्यम से उन्हें मशरूम उत्पादन कर आत्मनिर्भर और “लखपति दीदी” बनाने का सपना दिखाया गया था। इसके तहत स्मार्ट हट बनाने और हर महीने 20 हजार रुपए वेतन के साथ दो कर्मचारियों के लिए 12-12 हजार रुपए अतिरिक्त देने का वादा किया गया था। इसी भरोसे में उनसे कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करा लिए गए। बाद में पता चला कि उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उनके नाम पर लाखों रुपए का बैंक ऋण स्वीकृत कर उसकी निकासी कर ली गई। महिलाओं का दावा है कि उस राशि का एक भी रुपया उन्हें नहीं मिला और न ही तय योजना के अनुसार स्मार्ट हट का संचालन शुरू हो सका। बैंक से ऋण चुकाने के नोटिस आने के बाद हुई जानकारी महिलाओं के अनुसार, पूरे मामले की जानकारी तब हुई जब बैंक से ऋण चुकाने के नोटिस आने लगे। बैंक पहुंचने पर पता चला कि उनके नाम पर लाखों रुपए का लोन बकाया है। दो साल से ऋण की किस्त जमा नहीं होने के कारण उनका सिविल स्कोर खराब हो गया है। कई महिलाओं के पासबुक बैंक में रखे हुए हैं और वित्तीय लेन-देन भी प्रभावित हो गया है। पीड़ित महिलाओं ने जीविका की जिला परियोजना प्रबंधक अनीशा गांगुली पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि बेहतर भविष्य और रोजगार का भरोसा दिलाकर उनसे कागजातों पर हस्ताक्षर कराए गए, लेकिन बाद में उनके नाम पर ऋण निकाल लिया गया। महिलाओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। जानकारी के अनुसार, मुशहरी और बोचहां प्रखंड में जीविका समूहों के लिए करीब 110 स्मार्ट हट स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। एकरारनामे के अनुसार एजेंसी को महिलाओं को स्मार्ट हट उपलब्ध कराना था, लेकिन अधिकांश जगह काम पूरा नहीं हुआ। बैंक का एजेंसी पर आरोप बैंक की ओर से भी मामले को गंभीर मानते हुए कार्रवाई की गई थी। बोचहां ग्रामीण बैंक शाखा की तत्कालीन प्रबंधक पल्लवी मिश्रा ने कथित गबन के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसी तरह मुशहरी में भी मामला दर्ज हुआ। पिछले वर्ष सितंबर में ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी की संचालक शिवांगी कुमारी और निदेशक आशुतोष मंगलम के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। एजेंसी बोली- बैंक से समय पर नहीं मिली राशि बैठक के दौरान कंपनी के निदेशक आशुतोष मंगलम ने एक सप्ताह के भीतर काम शुरू करने का आश्वासन दिया। उनका कहना था कि बैंक से समय पर राशि नहीं मिलने के कारण परियोजना में देरी हुई। उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्होंने बैंक को नोटिस भी भेजा था। उन्होंने कहा कि रिवाइवल प्रोग्राम के तहत 3 क्लस्टर 10 अगस्त तक शुरू कर दिया जाएगा। कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की बात कही उप विकास आयुक्त निशांत सिहारा ने कहा कि सभी पक्षों की बात सुनी गई है। कंपनी ने एक सप्ताह के भीतर काम शुरू करने की बात कही है और इसकी कार्ययोजना बैंक को भी उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि तय समय में काम शुरू नहीं हुआ तो कंपनी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन से न्याय की उम्मीद फिलहाल इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सपना दिखाया गया, वे आज बिना पैसा पाए करोड़ों रुपये के ऋण की देनदार कैसे बन गईं। जिनके नाम पर लोन निकाला गया, वे अब बैंक के नोटिस, खराब सिविल स्कोर और बेटियों की शादी जैसी पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच न्याय की उम्मीद लगाए प्रशासन के दरवाजे पर खड़ी हैं।



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