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भारत में फेफड़ों के कैंसर के 40-50% मरीज नॉन-स्मोकर्स:सिर्फ स्मोकिंग नहीं; जेनेटिक्स और प्रदूषण से भी लंग कैंसर का खतरा




फेफड़ों का कैंसर दुनिया के सबसे जानलेवा कैंसर में से एक है। आमतौर पर इसे सिर्फ धूम्रपान से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन धूम्रपान के अलावा वायु प्रदूषण, पैसिव स्मोकिंग, चूल्हे का धुआं और कुछ हानिकारक रसायनों के संपर्क में आने से भी इसका खतरा बढ़ सकता है। भारत में 40-50 फीसदी मरीज ऐसे हैं, जिन्होंने कभी स्मोकिंग की नहीं। आज वर्ल्ड लंग कैंसर डे के मौके पर जानते हैं कि धूम्रपान के अलावा लंग कैंसर किन कारणों से हो सकता है और उससे कैसे बचाव संभव है…। लंग कैंसर से जुड़े सभी जरूरी सवाल- जवाब 1. फेफड़ों का कैंसर कितना जानलेवा है? WHO की रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, 2024 में लंग कैंसर से 18.6 लाख मौतें हुई और 26 लाख नए मामले आए। उसी साल भारत में 81,700 नए मामले दर्ज हुए। आमतौर पर लंग कैंसर की वजह धूम्रपान माना जाता है, लेकिन ICMR के अनुसार भारत में 40-50% मरीज ऐसे हैं, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। 2.धूम्रपान के अलावा और क्या कारण जिम्मेदार हैं? लंबे समय तक वायु प्रदूषण, पैसिव स्मोकिंग, रैडॉन गैस, लकड़ी-कोयले के चूल्हे और डीजल का धुआं व कुछ औद्योगिक रसायनों के संपर्क रहना लंग कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने वायु प्रदूषण और PM2.5 जैसे प्रदूषक कणों को कैंसर पैदा करने वाला माना है। 3. जेनेटिक्स से भी खतरा बढ़ सकता है? अगर परिवार में माता-पिता, भाई-बहन या किसी करीबी रिश्तेदार को लंग कैंसर है या पहले कभी रहा है, तो आपका जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में धूम्रपान और पैसिव स्मोकिंग से बचें। अगर लंबे समय तक खांसी रहे, खांसी में खून आए या बिना वजह वजन घटने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं। 4. इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं? लगातार खांसी, थकान, खांसी में खून आना, सांस फूलना, सीने में दर्द, बार-बार फेफड़ों का संक्रमण, वजन घटना, भूख कम लगना इसके मुख्य संकेत हैं। लंग कैंसर की जांच के लिए चेस्ट एक्स-रे, CT स्कैन और गांठ होने पर बायोप्सी की सलाह दी जाती है। 5. किन लोगों को स्क्रीनिंग करानी चाहिए? लो-डोज CT स्कैन (LDCT) 50-80 साल के उन लोगों के लिए हर साल कराना जरूरी है, जिन्होंने 20 साल तक रोज 1 पैकेट या 10 साल तक रोज 2 पैकेट धूम्रपान किया हो या पिछले 15 साल के भीतर छोड़ चुके हों। आमतौर पर नॉन-स्मोकर्स के लिए नियमित स्क्रीनिंग की सलाह नहीं दी जाती। 6. किन आदतों से खतरा कम किया जा सकता है डब्ल्यूएचओ के मुताबिक फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए सबसे जरूरी है कि धूम्रपान और पैसिव स्मोकिंग से बचें। अगर प्रदूषण वाले इलाकों में रहते हैं, तो बाहर कम निकलें और जरूरत पड़ने पर मास्क इस्तेमाल करें। अगर काम के दौरान धूल, डीजल के धुएं या रसायनों के संपर्क में आते हैं, तो सुरक्षा उपकरण पहनें। साथ ही नियमित व्यायाम करें, संतुलित भोजन करें और वजन नियंत्रित रखें। (डॉ. पवन कुमार- सीनियर मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, जयपुर)



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