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जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान गाली देती लड़की पर FIR, बचाव में अभिजीत दीपके का बयान और पीएम मोदी का माफ करने वाला वीडियो। पिछले 48 घंटे के इन तीन घटनाक्रम से सवाल उठा- क्या गाली देना क्राइम है? कुछ लोग ये भी कहे रहे कि जेन-जी के लिए गाली ‘न्यू नॉर्मल’ है। आखिर प्रोटेस्ट में खुलेआम गाली देने के पीछे जेन-जी की साइकोलॉजी क्या है और गाली देना कानूनी अपराध है या नहीं; आज के एक्सप्लेनर में समझेंगे… सवाल-1: गाली देने की वजह से लड़की पर FIR का पूरा मामला क्या है? जवाबः जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान एक लड़की का वीडियो वायरल है। वो पीएम मोदी के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करती है और गालियां देती है। 30 जुलाई को नोएडा पुलिस ने शांतिभंग, अपमानित करने और मानहानि के लिए BNS की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत FIR दर्ज कर ली। लड़की की मां ने कहा, ‘हमने पुलिस को माफीनामा दिया है। जो हुआ उसका बहुत अफसोस है।’ 31 जुलाई की रात पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो मैसेज में कहा, ‘जंतर-मंतर पर कुछ शरारती बच्चों ने भद्दी-भद्दी गालियां बोलीं। मुझे और मेरी स्वर्गीय माता को भी गालियां दीं। गुमराह बच्चों को गले लगाकर राह दिखाना हमारा काम है। सजा देने से परिस्थितियां नहीं बदलेंगी। मैं उन्हें माफ करना चाहता हूं।’ इधर CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने लड़की के समर्थन में कहा, ‘एक लड़की पर गाली देने के लिए केस हुआ। बीजेपी IT सेल के लोगों पर केस कब होंगे, जो सालों से ऑनलाइन लड़कियों को गालियां दे रहे थे। बीजेपी सांसद रमेश बिधूड़ी ने एक सांसद के लिए कैसे शब्द इस्तेमाल किए थे। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी जर्नलिस्ट गालियां दी थीं।’ अभिजीत ने आगे कहा, ‘गाली देना कोई क्राइम नहीं है। गाली देना बुरा हो सकता है, लेकिन उसको समझाइए कि गाली मत दो।’ सवाल-2: क्या वाकई गाली देना अपराध नहीं है? जवाबः 2 सिनैरियो हैं… 1. अगर ‘इरादा’ गलत न हो, तो गाली अपराध नहीं 2. अगर ‘इरादा’ गलत हो, तो गाली अपराध है गाली देने पर, मुख्य रूप से BNS की दो धाराओं में मुकदमा दर्ज होता है- धारा 352: शांति भंग के इरादे से किसी का अपमान करना। धारा 351: आपराधिक धमकी देना। दोनों धाराओं में अधिकतम 2 साल की जेल या जुर्माना हो सकता है। हालांकि केस-टू-केस कुछ और धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। जैसे- किसी महिला को गाली दी जाए, जो उसकी मर्यादा के खिलाफ हो, तो BNS की धारा 74 के तहत यौन अपराध का मुकदमा भी चल सकता है। इसी संदर्भ में विराग गुप्ता दो और सवाल उठाते हैं… सवाल-3: क्या गाली देना जेन-जी के लिए न्यू-नॉर्मल बन गया है? जवाबः हां, एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस पीढ़ी में गालियां देना सामान्य चलन बन रहा है, जिसके पीछे 3 बड़ी वजहें हैं… 1. OTT, स्टैंडअप से एब्यूसिव भाषा का चलन 2. जेन-Z के एथिकल-मोरल फ्रेमवर्क में हिचक नहीं 3. हर जगह एक जैसे ‘इन्फॉर्मल’ हो रहे जेन-Z सवाल-4: क्या पहले भी इस तरह विरोध प्रदर्शनों में गालियां दी जाती थीं? जवाब: 1975 की इमरजेंसी के बाद इंदिरा गांधी के खिलाफ नारे लगे थे, ‘इंदिरा हटाओ, देश बचाओ।’ 1980 के बोफोर्स घोटाले के बाद पीएम राजीव गांधी के खिलाफ नारे लगे थे, ‘गली-गली में शोर है, राजीव गांधी चोर है।’ हालांकि जंतर-मंतर प्रोटेस्ट से पहले भारत के किसी आंदोलन में सार्वजनिक गाली-गलौच का कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं है। इस प्रदर्शन में कॉकरोच पार्टी के नेताओं ने भी गालियों, अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं किया। उनके समर्थन में आए कुछ लोगों ने आपत्तिजनक बातें कहीं। वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी कहते हैं, ‘अपने समय में हमने भी आंदोलन किए, लाठियां खाईं और पत्थर भी फेंके, लेकिन तब ऐसी भाषा नहीं इस्तेमाल होती थी। अश्लील रील बनाने के लिए एक सीरियस मुद्दे का इस्तेमाल करना गलत था।’ ———– ये खबर भी पढ़िए… संसद पहुंचा वास्तेगुना-हुइंया और कुचु-पुचु; 56 साल औसत उम्र वाली लोकसभा अचानक जेन-जी की भाषा क्यों बोलने लगी 56 साल औसत उम्र वाली लोकसभा में इन दिनों 14 से 29 साल वाली जेन-जी के स्लैंग गूंज रहे हैं। कोई सांसद ‘वास्तेगुना-हुइंया’ और ‘कुच्चु-पुच्चु’ बोल रहा, तो किसी के भाषण में ‘डेलुलू’ और ‘क्लॉक्ड इट’ का इस्तेमाल हुआ। पूरी खबर पढ़िए…
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आज का एक्सप्लेनर:गाली देना क्राइम कब बन जाता है, दोषी को कितनी सजा; आखिर जेन-जी के लिए गाली देना न्यू-नॉर्मल कैसे बन गया
