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वन टर्न एट ए टाइम: हाउ ए रूबिक क्यूब एट 45 चेंज्ड एवरीथिंग… यह किताब एक 45 वर्षीय प्रोफेशनल की कहानी है, जिन्होंने मुंबई एयरपोर्ट पर रुबिक क्यूब खरीदकर जीवन बदल लिया। पूरी तरह खुद से सीखकर वे पहेली डिजाइनर बने, लगभग 150 नए डिजाइन बनाए, 18 देशों में अपना आविष्कार बेचा और यूट्यूब पर लाखों व्यूज हासिल किए। किताब के लेखक मनीष राठौड़ अब 54 वर्ष के हो गए और बढ़ती उम्र में उनकी सक्रियता बढ़ती ही जा रही है। इस किताब से 4 बातें सीख सकते हैं, जो आपको सक्रिय व दिमाग को तेज रखेंगी। बस रोजाना एक छोटा कदम उठाएं, एक टर्न लें, बाकी सब अपने आप होता चला जाएगा 1.उम्र बाधा नहीं है – 45 साल की उम्र में रुबिक क्यूब खरीदकर मनीष ने साबित किया कि नई चीज सीखने के लिए कोई सही उम्र नहीं होती। बुढ़ापे में भी अगर मन में इच्छा है तो कोई भी काम सीखा जा सकता है। 2. हर कदम बदलाव लाता है – जैसे पूरी क्यूब एक साथ नहीं सुलझती। छोटी-छोटी कोशिशें काम आती हैं। यही नियम बढ़ती उम्र में लागू होता है और आपको सक्रिय बनाए रखता है। 3. गलतियां सीखने का हिस्सा हैं – क्यूब सुलझाते समय बार-बार उलझ जाती है। इसी तरह बुढ़ापे में कोई नई तकनीक या स्किल सीखते समय गलती होना स्वाभाविक है, लेकिन डरें नहीं बस बार-बार कोशिश करते रहें। 4.रोजाना नए स्किल सीखते रहिए – बुजुर्गों के लिए कोई भी नया शौक जैसे- पहेली, संगीत, बागवानी, डिजिटल स्किल दिमाग को सक्रिय रखते हैं। इससे अकेलापन भी दूर होता है।
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बुजुर्गों को सक्रिय और दिमाग तेज रखेंगी ये 4 बातें:बढ़ती उम्र में रुबिक क्यूब की तरह अपने जीवन की मुश्किलें सुलझाते रहिए
