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इस्लामाबाद में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी रिजवान हनीफ ने दावा किया है कि पिछले तीन-चार साल में उनके संगठन के 30 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। उसके मुताबिक ये हमले पेशावर, कराची, रावलपिंडी, रावलकोट और मुजफ्फराबाद में अज्ञात हमलावरों ने किए। उसने आरोप लगाया कि ये हमलावर भारतीय एजेंट थे। इससे जुड़ा एक वीडियो सामने आया है। इसमें हनीफ कहता है, हमारे लोगों को भारतीय खुफिया एजेंसियों ने आजाद कश्मीर में अमन और चेन से नहीं रहने दिया। अपने एजेंट्स के जरिए उन्होंने हमारे लोगो को शहीद किया। पाकिस्तान के 5 बड़े आतंकियों की मौत पाकिस्तान में पिछले 5 बड़े आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। इनके पीछे अज्ञात हमलावर का हाथ बताया जा रहा है, हालांकि इनकी पुष्टि नहीं हो पाई है। 1. अल-बद्र आंतकी संगठन का कमांडर- हमजा बुरहान 2019 के पुलवामा आतंकी हमले में शामिल आतंकी हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में गोली मारकर हत्या कर दी गई। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक हमजा पर गुरुवार को मुजफ्फराबाद के AIMS कॉलेज के बाहर अज्ञात हमलावरों ने कई गोलियां चलाईं, जिनमें से तीन उसके सिर में लगीं। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। हमजा बुरहान जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला था। वह पहले आतंकी संगठन अल बद्र से जुड़ा था और बाद में अल बराक के लिए काम करने लगा। वह मुजफ्फराबाद के चीला बांदी इलाके में भारी सुरक्षा के बीच रह रहा था। उसके पास कमांडो सुरक्षा, बुलेटप्रूफ गाड़ी और एस्कॉर्ट वाहन भी थे। भारत ने 2022 में उसे UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था। वह अबू दुजाना, अबू कासिम, बुरहान वानी और जाकिर मूसा का करीबी सहयोगी माना जाता था। उसके पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से भी करीबी संबंध थे। 2. लश्कर आतंकी- मोहम्मद कासिम गुज्जर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी मोहम्मद कासिम गुज्जर की फरवरी 2026 में पाकिस्तान के पेशावर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अज्ञात बंदूकधारियों ने उस पर हमला किया था। हालांकि इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई। कासिम गुज्जर उर्फ सलमान/सुलेमान को भारत सरकार ने 2024 में UAPA के तहत घोषित आतंकवादी घोषित किया था। भारतीय एजेंसियों के अनुसार, वह कई आतंकी गतिविधियों में शामिल था और जम्मू-कश्मीर में नए आतंकी मॉड्यूल तैयार करने का काम कर रहा था। उस पर आतंकियों को हथियार और फंडिंग पहुंचाने, सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए भर्ती करने और कई आतंकी हमलों में भूमिका निभाने के आरोप थे। 3. जैश-ए-मोहम्मद कमांडर- सलमान अजहर अप्रैल 2026 में पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के सीनियर कमांडर सलमान अजहर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, वो एक ‘हिट-एंड-रन’ जैसी घटना का शिकार हुआ। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स इसे टारगेट किलिंग बताया गया था। इसकी भी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई। सलमान अजहर को जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर का करीबी सहयोगी माना जाता था। जैश-ए-मोहम्मद वही आतंकी संगठन है जिसे भारत, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं। सलमान अजहर संगठन के ऑपरेशनल नेटवर्क और भर्ती अभियान से जुड़ा हुआ था। बहावलपुर को लंबे समय से जैश का प्रमुख ठिकाना माना जाता रहा है। 4. लश्कर कमांडर- शेख यूसुफ अफरीदी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी की अप्रैल 2026 को अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। यूसुफ अफरीदी को लश्कर-ए-तैयबा के बड़े नेटवर्क से जुड़ा माना जाता था। वह कथित तौर पर संगठन के लॉजिस्टिक्स और कम्युनिकेशन सिस्टम को संभालता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे हाफिज सईद का करीबी भी माना जाता था। 5. हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर- सज्जाद अहमद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मई 2026 में हिजबुल मुजाहिदीन का सीनियर कमांडर सज्जाद अहमद संदिग्ध परिस्थितियों में मारा गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाया। हालांकि पाकिस्तान सरकार की ओर से घटना पर ज्यादा आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी। सज्जाद अहमद मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के बारामूला इलाके का रहने वाला था। कहा जाता है कि वह 1990 के दशक के अंत में पाकिस्तान चला गया था, जहां उसने आतंकी ट्रेनिंग ली। बाद में वह हिजबुल मुजाहिदीन के लिए फंडिंग, ट्रेनिंग और नेटवर्किंग जैसे काम संभालने लगा। वह पाकिस्तान से कश्मीर में आतंकी एक्टिविटी के कॉर्डिनेशन में एक्टिव रोल निभा रहा था। हिजबुल मुजाहिदीन लंबे समय तक घाटी में एक्टिव प्रमुख आतंकी संगठनों में शामिल रहा है। 40 साल पहले हुआ लश्कर ए तैयबा का गठन लश्कर-ए-तैयबा की स्थापना 1987 में पाकिस्तान में हुई थी। यह संगठन सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान बने जिहादी नेटवर्क से निकला था। ओसामा बिन लादेन के मेंटर माने जाने वाले अब्दुल्ला अज्जाम और उसके दो साथियों ने मिलकर मरकज-अद-दावा-वल-इरशाद नाम के धार्मिक संगठन की स्थापना की। मरकज-अद-दावा-वल-इरशाद संगठन का सशस्त्र (मिलिटेंट) विंग बाद में लश्कर-ए-तैयबा कहलाया। अरबी में इसका अर्थ है पवित्र लोगों की सेना। शुरुआती दौर में संगठन के लड़ाके अफगानिस्तान में सोवियत सेना के खिलाफ लड़ने के लिए भेजे जाते थे। 1989 में सोवियत सेना की वापसी के बाद संगठन का फोकस जम्मू-कश्मीर पर आ गया। भारत, अमेरिका और कई पश्चिमी देशों का आरोप रहा है कि लश्कर-ए-तैयबा को लंबे समय तक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का समर्थन मिलता रहा। पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर इन आरोपों से इनकार करता है।
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लश्कर-ए-तयैबा का आतंकी बोला- हमारे 30 लोग मारे गए:भारतीय खुफिया एजेंसियों ने एजेंट भेजकर हत्या कराई
