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प्रदेश में बढ़ रहे जमीन फ्रॉड के बीच छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट वेलफेयर एसोसिएशन सोसायटी ने प्रदेशवासियों के लिए एडवायजरी जारी करते हुए जमीन, प्लॉट और कृषि भूमि खरीदने से पहले सभी राजस्व और कानूनी दस्तावेजों की पूरी जांच करने की सलाह दी है। एसोसिएशन का कहना है कि थोड़ी-सी लापरवाही भविष्य में लंबे कानूनी विवाद, आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए किसी भी संपत्ति का सौदा करने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति की पुष्टि जरूरी है। एडवायजरी में कहा गया है कि खरीदार सबसे पहले विक्रेता के स्वामित्व की पुष्टि करें और सेल डीड, बी-1, खसरा, ऋण पुस्तिका, नामांतरण आदेश सहित अन्य राजस्व अभिलेखों की जांच करें। साथ ही संबंधित तहसील से वर्ष 1956 से अब तक के भूमि रिकॉर्ड और स्वामित्व का पूरा इतिहास निकलवाकर उसका परीक्षण भी कराएं, ताकि किसी पुराने विवाद या दावे की जानकारी मिल सके। एसोसिएशन ने यह भी सलाह दी है कि जमीन खरीदने से पहले किसी प्रमुख समाचार पत्र में आम सूचना प्रकाशित कराई जाए। इसके अलावा सक्षम राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी में भूमि का सीमांकन और बटांकन कराया जाए। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया जाए कि जमीन किसी बैंक या वित्तीय संस्था के पास बंधक न हो और उस पर किसी प्रकार का ऋण या चार्ज दर्ज न हो। एडवायजरी के अनुसार, खरीदारों को यह भी जांचना चाहिए कि संबंधित भूमि से जुड़ा कोई मामला राजस्व न्यायालय, सिविल कोर्ट या अन्य न्यायालय में लंबित तो नहीं है। साथ ही मौके पर जाकर वास्तविक कब्जे, अतिक्रमण और भूमि के वर्तमान उपयोग का भी सत्यापन करना चाहिए। एसोसिएशन ने नगर एवं ग्राम निवेश विभाग या संबंधित विकास प्राधिकरण से भूमि उपयोग (लैंड यूज) की जानकारी लेने, सरकारी अधिग्रहण, सड़क, नहर, बिजली लाइन, वन क्षेत्र या मास्टर प्लान के किसी प्रतिबंध की जांच करने की सलाह दी है। एसोसिएशन ने लोगों से अपील की है कि केवल कम कीमत या मौखिक आश्वासन के आधार पर जमीन खरीदने का निर्णय न लें। सभी जरूरी दस्तावेजों और तथ्यों का सत्यापन करने के बाद ही संपत्ति खरीदें, ताकि भविष्य में कानूनी और आर्थिक विवादों से बचा जा सके।
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जमीन खरीददारी को लेकर CGRA की एडवायजरी:राजस्व रिकॉर्ड, स्वामित्व और कानूनी स्थिति के साथ लैंड यूज की जांच कराने की अपील
