Mangala Gauri Vrat 2026 | Sawan Shiva Parvati Puja & Significance


37 मिनट पहले

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अभी सावन महीना चल रहा है। इस महीने में भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। इस महीने के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत (4 अगस्त) किया जाता है। यह व्रत खासतौर पर माता पार्वती की कृपा पाने के लिए किया जाता है।

मान्यता है कि इस व्रत से भक्त के वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है, पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है और अखंड सौभाग्य की कामना पूरी होती है। खासतौर पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति और विवाह में आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए भी मां गौरी की पूजा करती हैं।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, मंगला गौरी व्रत से भक्तों की मनोकामनाएं जल्दी पूरी हो सकती हैं। ज्योतिष की मान्यताओं के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष है या विवाह में रुकावटें आती हैं, उनके लिए मंगला गौरी व्रत लाभकारी माना जाता है। कहा जाता है कि मां गौरी की पूजा और मंगला गौरी व्रत करने से विवाह संबंधी परेशानियां दूर होती हैं, मनचाहा जीवनसाथी मिलने के योग बनते हैं। मंगला गौरी व्रत को संतान सुख से भी जोड़ा जाता है। संतान की इच्छा रखने वाले दंपत्ति भी इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ मां गौरी की पूजा करते हैं।

मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि

  • सुबह स्नान के बाद व्रत रखने वाले भक्त हाथ में जल और चावल लेकर मां गौरी का ध्यान करते हुए व्रत करने का संकल्प लें।
  • घर के मंदिर में लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश, भगवान शिव और माता पार्वती यानी मंगला गौरी की स्थापना करें। मां गौरी की मिट्टी से बनी प्रतिमा या तस्वीर रखकर भी पूजा की जा सकती है।
  • किसी भी पूजा से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसलिए सबसे पहले गणेश जी को जल, रोली, चावल और दूर्वा अर्पित करें। धूप-दीप जलाएं। मोदक का भोग लगाएं।
  • इसके बाद शिवलिंग और माता गौरी को जल, दूध और पंचामृत से स्नान कराएं। देवी मां को लाल चुनरी, सिंदूर और सुहाग सामग्री अर्पित करें। बिल्व चढ़ाएं। मिठाई का भोग लगाएं।
  • धूप, दीप जलाएं। कथा पढ़ें-सुनें। मां को फल, खीर या हलवे का भोग लगाएं। आरती करें।
  • पूजा के बाद जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

व्रत में ध्यान रखें ये बातें

  • मंगला गौरी व्रत में पूजा के साथ-साथ नियमों का पालन करना भी जरूरी है।
  • अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या एक समय भोजन करने का नियम रखा जा सकता है।
  • पूरे दिन सात्विक विचार रखें और क्रोध से बचें।
  • किसी की निंदा या चुगली न करें।
  • पूजा के बाद सुहागिन महिलाओं को सुहाग सामग्री, फल और वस्त्र दान करना शुभ माना जाता है।
  • सावन में कुल चार मंगला गौरी व्रत हैं। पहला आज (4 अगस्त) है। दूसरा 11 अगस्त, तीसरा 18 अगस्त 2026 और चौथा 25 अगस्त 2026 को किया जाएगा।

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