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Raigarh MBBS Intern Doctors Strike


इंर्टन डॉक्टरों के द्वारा स्टाइपेंड बढ़ाए जाने की मांग की जा रही है

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में MBBS इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी एक सूत्रीय मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। अपने काम को बंद कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सामने इंटर्न डॉक्टर नारेबाजी कर रहे हैं। हड़ताल से पहले इंटर्न डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर विरोध

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रायगढ़ में 62 इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में उन्हें केवल 15,900 रुपये मासिक स्टाइपेंड मिलता है, जबकि ओड़िसा में एमबीबीएस इंटर्न को 44 हजार रुपये, पश्चिम बंगाल में 43 हजार रुपये सहित अन्य राज्यों में 30 हजार से अधिक राशि दी जाती है।

उनका कहना है कि एक साल तक शासकीय अस्पतालों में नियमित सेवाएं देने के बावजूद वर्तमान स्टाइपेंड उनकी जरूरतों के अनुरूप नहीं है, इसलिए इसमें बढ़ोतरी की जानी चाहिए।

इंर्टन डॉक्टरों ने बताया कि वे लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन तो मिला, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाहर अपनी मांगो को लेकर नारेबाजी करते हुए

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाहर अपनी मांगो को लेकर नारेबाजी करते हुए

स्वास्थ्य सेवाए हो सकती है प्रभावित इंर्टन डॉक्टरों के इस हड़ताल का सीधा असर मेडिकल कॉलेज अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने लगा है। इंटर्न डॉक्टर ओपीडी, वार्ड, इमरजेंसी और मरीजों की नियमित देखभाल की भूमिका निभाते हैं।

ऐसे में उनकी अनुपस्थिति से मरीजों को उपचार में देरी, वरिष्ठ डॉक्टरों पर अतिरिक्त कार्यभार और अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए इर्टन डॉक्टर छबि सिंगोदिया ने बताया कि हम सभी इंर्टन डॉक्टर अपनी ड्यूटी को स्थागित कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगें। सरकार से हमारी मांग है कि हमारी बातों को सूने। ताकि मरीजों को जो तकलीफ हो रही है वह न हो।

उन्होंने बताया कि रायगढ़ में 62 इर्टन है। हमारी मांगो को लेकर आश्वसान काफी समय से दिया जा रहा है, पर कार्य की गति बहुत धीमी है। सरकार को हमारी मांग जल्द सूनते हुए समय पर निर्णय लेना होगा।

उपचार-जांच इमरजेंसी सेवा प्रभावित नहीं हो रही इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ संतोष कुमार ने बताया कि ये ट्रेनि स्टूंडेट होते हैं। जिन्हें एक साल का ट्रेनिंग दिया जाता है। इनसे थोडी बहुत मदद होती है, लेकिन वे अभी खुद स्टूडेंट है और संस्था उन्हें ट्रेनिंग कराती है।

उनके कार्य नहीं करने से मरीज के उपचार और जांच व इमरजेंसी सेवा प्रभावित नहीं होती है। उनके कार्य नहीं करने से वे खुद का घाटा कर रहे हैं वे स्वंय ट्रेनिंग नहीं कर पा रहे हैं।



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