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हिसार जिले के गांव खारिया में 19 गांवों के किसानों ने एक महापंचायत का आयोजन किया। यह महापंचायत बरवाला ब्रांच से भाखड़ा नहर में अवैध तरीके से पानी की कटौती और जमुना कैनाल कमांड एरिया में गैर-कानूनी तरीके से पानी दिए जाने को लेकर बुलाई गई थी। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे बरवाला ब्रांच से पानी की किसी भी कटौती को स्वीकार नहीं करेंगे। किसानों के अनुसार, सरकार द्वारा 100 क्यूसेक पानी की कटौती का फैसला लिया गया है। बालसमंद, सिवानी क्षेत्र, देवसर फीडर और राजस्थान से सटे इलाकों में पहले से ही पानी की कमी है। किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार मनमाने और गैर-कानूनी तरीके से पानी में कटौती कर रही है, जिससे हजारों एकड़ जमीन बंजर हो सकती है और राजस्थान की सीमा से सटे किसान बर्बाद हो सकते हैं। हांसी और जींद को दिए जाने वाले पानी का विरोध महापंचायत में हांसी और जींद को दिए जाने वाले पानी का भी विरोध करने का निर्णय लिया गया। किसानों ने भाखड़ा संयुक्त जल संघर्ष समिति का गठन किया। राजेश कस्वां को इसका कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया, और उनके नेतृत्व में 21 सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया गया। यह कमेटी बरवाला ब्रांच के हर गांव में पंचायतें आयोजित करेगी और अधिक से अधिक लोगों को समिति में शामिल करेगी। किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक सरकार बरवाला ब्रांच की सभी नहरों को दो सप्ताह तक नहरी पानी उपलब्ध नहीं कराएगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। महापंचायत में मौजूद रहे ये लोग महापंचायत की अध्यक्षता रायसिंह साहरण (रावलवास खुर्द), मास्टर रामनाथ (भारी), डोभी रेणु चहल (बालसमंद) और मास्टर दलपत सिंह ने संयुक्त रूप से की। इसमें पूर्व सरपंच रमेश बुडाक, पिरथवी धायल, महावीर नंबरदार, कुरड़ाराम नंबरदार, रमेश बैनीवाल (डोभी), बलवंतसिंह भारी, जयप्रकाश गोदारा, संदीप धिरनवास, जगदीश जांगड़ा, रोशन शर्मा, घासीराम (खारिया), सुल्तान पूनिया, कपूर सिंह, किरतान, रामकेश पूनिया, राजपाल धायाल, मास्टर भीम सिंह (लौरा बालसमंद), संदीप बैंदा, बिनोद बासडा, हरिसिंह टोकस सहित सैकड़ों किसानों ने भाग लिया।
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बरवाला ब्रांच नहर से पानी कटौती का विरोध:19 गांवों के किसानों की महापंचायत, आंदोलन का फैसला लिया, 21 सदस्यीय कमेटी का भी गठन
