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झालावाड़ जिले के किसानों से कृषि विभाग ने धान की खड़ी फसल में डाई अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) का उपयोग नहीं करने की अपील की है। किसानों को खड़ी फसल में अमोनिकल नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए अमोनियम सल्फेट के उपयोग की सलाह दी गई है।
विभाग ने बताया कि इस अवस्था में डीएपी का प्रयोग फसल के लिए लाभकारी नहीं होता, बल्कि इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होता है और मिट्टी की उर्वरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने जानकारी दी कि डीएपी में 18 प्रतिशत नाइट्रोजन और 46 प्रतिशत फॉस्फोरस होता है। फॉस्फोरस तभी प्रभावी रूप से पौधों को मिल पाता है जब उर्वरक को जड़ क्षेत्र के आसपास या नीचे डाला जाए।
खड़ी धान की फसल में डीएपी डालने पर पौधों को केवल 2 से 3 प्रतिशत फॉस्फोरस ही उपलब्ध हो पाता है, जबकि शेष फॉस्फोरस व्यर्थ चला जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि कई किसान नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए डीएपी का उपयोग करते हैं, लेकिन इस अवस्था में इससे उत्पादन में कोई विशेष लाभ नहीं मिलता। डीएपी के लगातार उपयोग से मिट्टी में जिंक, आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्वों का संतुलन भी बिगड़ता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है। सतर्कता समितियों के मनोनीत गैर-सरकारी सदस्यों की बैठक 10 को
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जनोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से तहसील स्तरीय सतर्कता समितियों के मनोनीत गैर-सरकारी सदस्यों की बैठक 10 अगस्त को होगी। यह बैठक जिला रसद अधिकारी कार्यालय में होगी।
इस बैठक में एनएफएसए एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित विभिन्न विषयों पर सुझाव प्राप्त किए जाएंगे। विशेष रूप से पात्र परिवारों एवं सदस्यों के नाम जोड़ने, अपात्र परिवारों एवं सदस्यों के नाम हटाने तथा वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के संबंध में विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा।
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धान की खड़ी फसल में डीएपी उपयोग नुकसानदायक:किसानों को अमोनियम सल्फेट इस्तेमाल की सलाह
