12 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने मेटा पर 567 मिलियन डॉलर यानी भारतीय रुपयों में 5000 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना लगाया है। यह आदेश मेटा के प्लेटफॉर्म्स के कारण बच्चों की मेंटल हेल्थ पर हुए दुष्प्रभाव के खिलाफ जारी किया गया है।
अदालत ने यह फैसला कंपनी की जवाबदेही तय करते हुए सुनाया है। यह पहली बार है जब किसी राज्य ने एक बड़ी टेक कंपनी के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की है।
गुरुवार देर रात आए फैसले में जज ब्रायन बीडशेड ने कहा कि जुर्माने की रकम का बड़ा हिस्सा 420 मिलियन डॉलर युवाओं के इलाज में इस्तेमाल होगा। बाकी रकम अगले 5 साल तक अवेयरनेस, प्रिवेंशन, स्क्रीनिंग सर्विस पर खर्च की जाएगी।
मेटा के प्लेटफॉर्म्स इंस्टाग्राम-फेसबुक पर बच्चों की सुरक्षा और मेंटल हेल्थ को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि कंपनी के प्लेटफॉर्म्स का बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ा है।
दो फेज में मुकदमा, कुल जुर्माना 942 मिलियन डॉलर
यह फैसला उस 375 मिलियन डॉलर के जुर्माने के अतिरिक्त है जो मेटा को पहले ही इस मामले के पहले फेज में चुकाने का आदेश दिया गया था, जिससे कुल जुर्माना 942 मिलियन डॉलर हो जाता है।
- पहले चरण में, जूरी ने मेटा पर 375 मिलियन डॉलर का सिविल जुर्माना लगाने का आदेश दिया था। जूरी ने पाया था कि कंपनी ने जानबूझकर बच्चों की मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचाया। उसे प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण के बारे में जो जानकारी थी, उसे छिपाया।
- दूसरे चरण में, अभियोजकों ने जज से मेटा में बुनियादी बदलाव करने की मांग की थी। इन बदलावों का मकसद लत लगाने वाले फीचर्स पर रोक लगाना, एज वैरिफिकेशन प्रक्रिया को बेहतर बनाना और डिफॉल्ट प्राइवेसी सेटिंग्स, कड़ी निगरानी के जरिए बच्चों के यौन शोषण को रोकना था।
Meta आगे क्या कदम उठा सकती है…
- अपील: मेटा ने इस फैसले को मानने से इनकार किया है। कंपनी ने कहा है कि वह इस जुर्माने के खिलाफ अपील करेगी। कंपनी का तक है कि वे प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा के लिए लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन सभी ‘बैड एक्टर्स’ को रोकना चुनौतीपूर्ण है।
- बेंच के सुझाव मानेगी: मामले का दूसरा हिस्सा यानी ट्रायल बेंच यह तय कर सकता है कि क्या मेटा को अपने एल्गोरिदम में अनिवार्य बदलाव करने होंगे। क्या उसे बच्चों के सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए और ज्यादा आर्थिक जिम्मेदारी उठानी होगी।
- बड़ा दबाव: इस फैसले के बाद अन्य 40 से अधिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल भी मेटा के खिलाफ सख्त रुख अपना सकते हैं, जिससे आने वाले समय में कंपनी पर और अधिक कानूनी और नियामक दबाव बढ़ेगा।
मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल सेन शुरू किया था मुकदमा
यह मामला न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेस ने दायर किया था। आरोप था कि मेटा के इंस्टाग्राम-फेसबुक बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। कंपनी ने जानबूझकर इन खतरों को नजरअंदाज किया।
कंपनी पर आरोप लगा कि एल्गोरिदम को ऐसे डिजाइन किया है कि वे बच्चों को ‘एडिक्टिव’ (लत लगाने वाले) बनाते हैं। इसके असर से बच्चों में डिप्रेशन, ईटिंग डिसऑर्डर और आत्महत्या जैसी समस्याओं में बढ़ोतरी हुई।
मुकदमा केवल मेंटल हेल्थ तक सीमित नहीं था। इसमें यह भी आरोप लगाया गया था कि मेटा के प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल बाल यौन शोषण और बच्चों को फंसाने के लिए किया जा रहा था, और कंपनी ने इस खतरे के बारे में जानते हुए भी ठोस कदम नहीं उठाए।
कोर्ट ने कहा- कानून मेटा को बच्चों की एज वैरिफिकेशन से रोकता है
अदालत ने कहा कि बच्चों की प्राइवेसी से जुड़े संघीय कानून मेटा को 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए एज वैरिफिकेशन करने वाले टूल्स लागू करने से रोकते हैं। ‘चिल्ड्रन्स ऑनलाइन प्राइवेसी एक्ट’ (COPPA) का मतलब है कि अदालत मेटा को यह आदेश नहीं दे सकती कि वह बच्चों से निजी डेटा देने या ऑनलाइन ट्रैक किए जाने के लिए कहे, भले ही एज वैरिफिकेशन के लिए ही क्यों न हो
अदालत ने यह भी कहा कि न सिर्फ मेटा, बल्कि दूसरी सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों का एज वैरिफिकेशन करने का आदेश देना अनुचित होगा और कंपनी के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदेह होगा।
एक दिन पहले भारत सरकार से माफी मांगनी पड़ी
Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने बुधवार को पीएम मोदी का फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के मामले में भारत सरकार से माफी मांगी है। इसी दौरान कंपनी ने यह भी माना कि उसके प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मैटेरियल, डीपफेक और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी चूक हुई हैं।

