हाईकोर्ट ने भिलाई ट्रिपल मर्डर केस के मुख्य आरोपी को बड़ी राहत दी है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने भिलाई के तालपुरी में हुए चर्चित ट्रिपल मर्डर केस के मुख्य आरोपी रवि शर्मा को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उसकी सजा बरकरार रखते हुए ट्रायल कोर्ट की फांसी की सजा को बदलकर बिना किसी छूट के आजीवन कारावास कर दिया है।
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यानी अब आरोपी रवि शर्मा को मरते दम तक जेल में रहना होगा। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए फांसी की सजा देना जरूरी नहीं है। बता दें कि निचली अदालत ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई थी।
दरअसल, 21 जनवरी 2020 को तालपुरी के एक किराये के मकान में रवि शर्मा की पत्नी मंजू शर्मा, उनकी डेढ़ माह की बेटी और एन. राजू के शव मिले थे। आरोपी ने सबूत मिटाने के लिए तीनों के शवों को जलाने की कोशिश की थी।
जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के पास से मिला चिपकने वाला टेप घटनास्थल पर इस्तेमाल किए गए टेप से मेल खा गया। उसके पास से नींद की दवा एल्प्रेक्स 0.5 का खाली रैपर भी मिला। वहीं, दीवार पर लिखे गए नोट की लिखावट भी आरोपी की लिखावट से मिल गई।
पहले देखिए ये तस्वीरें-

आरोपी ने अपनी पत्नी और डेढ़ साल की मासूम बेटी की हत्या कर दी थी।

आरोपी शादीशुदा था, उसने दूसरी शादी की थी और बच्चा नहीं चाहता था।

आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने एक मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को मार डाला था।
फिल्मी तरीके से बनाई थी पूरी योजना
आरोपी रवि शर्मा ने बेहद चालाकी से हत्या की पूरी योजना बनाई थी। खुद को मरा हुआ साबित करने के लिए उसने अनजान व्यक्ति एन. राजू की हत्या कर दी। इसके बाद सबूत मिटाने के लिए तीनों शवों को गैस सिलेंडर से जलाने की कोशिश की।
वारदात से पहले उसने पत्नी, अपनी डेढ़ माह की बेटी और एन. राजू को नींद की दवा एल्प्रेक्स 0.5 खिलाई। फिर उनके मुंह, हाथ और पैर पर टेप बांध दिया, जिससे दम घुटने से तीनों की मौत हो गई।
बाद में आरोपी ने दीवार पर एक नोट लिखा, ताकि लोगों को लगे कि उसने पत्नी की बेवफाई से परेशान होकर आत्महत्या कर ली है, लेकिन मृतका की मां को आए एक अनजान फोन कॉल से मामले का खुलासा हुआ।
सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे तो घर के अंदर तीनों के शव मिले।
इन सबूतों के आधार पर मिली थी फांसी की सजा
जांच के दौरान आरोपी के पास से मिला चिपकने वाला टेप, मृतकों के मुंह और हाथ-पैर पर लगा टेप फोरेंसिक जांच में एक ही पाया गया। इसके अलावा आरोपी के पास से नींद की दवा एल्प्रेक्स 0.5 का खाली रैपर भी बरामद हुआ।
घटनास्थल की दीवार पर लिखे गए नोट की लिखावट का मिलान हैंडराइटिंग विशेषज्ञों ने आरोपी की लिखावट से किया, जो पूरी तरह मेल खा गई।
इन सभी सबूतों के आधार पर कोर्ट ने माना कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी कड़ी सीधे आरोपी रवि शर्मा की ओर इशारा करती है। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी।

ट्रिपल मर्डर केस के आरोपी की फाइल फोटो।
हाईकोर्ट ने कहा- अपराध गंभीर है, लेकिन फांसी जरूरी नहीं
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने हत्या के बाद सबूत मिटाने की पूरी कोशिश की। उसने एक बेगुनाह की पहचान का इस्तेमाल कर खुद को मृत दिखाने की योजना बनाई। यह अपराध बेहद गंभीर, सुनियोजित और भरोसा तोड़ने वाला है, लेकिन यह ऐसा मामला नहीं है, जहां फांसी की सजा ही एकमात्र विकल्प हो।
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी ने अपना गुनाह छिपाने के लिए एक बेगुनाह की हत्या की और अपनी पत्नी के विश्वास को भी तोड़ा। वारदात में उसकी क्रूरता और पूरी प्लानिंग साफ नजर आती है। फिर भी यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए फांसी की सजा देना जरूरी नहीं है।
कोर्ट ने आरोपी को आईपीसी की धारा 302 (तीन हत्याएं) और धारा 201 (सबूत मिटाने) के तहत दोषी माना। साथ ही कहा कि सामान्य आजीवन कारावास इस अपराध के लिए पर्याप्त नहीं होगा।
इसलिए उसे बिना किसी समयपूर्व रिहाई या कानूनी छूट के आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा दी गई है। हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 72 और 161 के तहत राष्ट्रपति या राज्यपाल के समक्ष दया याचिका का अधिकार उसके पास बना रहेगा।
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6 साल बाद ट्रिपल मर्डर केस में आरोपी को मौत की सजा।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के चर्चित ट्रिपल मर्डर केस में दुर्ग कोर्ट ने 6 साल बाद आरोपी रवि शर्मा को मौत की सजा सुनाई है। यह मामला 2020 का है, जिसमें आरोपी ने अपनी पत्नी और डेढ़ साल की मासूम बेटी की हत्या कर दी थी। उस पर किसी को शक न हो इसके लिए उसने एक मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को भी मार दिया, ताकि वो खुद को मरा हुआ साबित कर सके। पढ़ें पूरी खबर…
