Headlines

Chhindwara CMHO Naresh Gonnane Controversy


पिता की पूरी शासकीय सेवा अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के रिकॉर्ड के साथ और बेटे की संविदा नियुक्ति में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) का प्रमाण पत्र। छिंदवाड़ा में प्रभारी CMHO डॉ. नरेश गोन्नाड़े के परिवार से जुड़ा यह मामला अब जांच की दहलीज पर है।

.

भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रमेश पोफली ने मुख्यमंत्री समेत वरिष्ठ अधिकारियों को दस्तावेजों के साथ शिकायत भेजकर EWS प्रमाण पत्र, पात्रता और नियुक्ति प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

शिकायत में आरोप है कि एक ही परिवार से जुड़े दो अलग-अलग प्रमाण पत्रों के आधार पर आरक्षण और EWS नियमों का लाभ लिया गया। दूसरी ओर डॉ. गोन्नाड़े ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके बेटे की नियुक्ति सामान्य वर्ग में हुई है और ST प्रमाण पत्र बनने में तकनीकी दिक्कत के कारण उसने सामान्य वर्ग का विकल्प चुना।

ST वर्ग से शुरू हुई सेवा, CMHO तक पहुंचे

स्वास्थ्य विभाग के सेवा रिकॉर्ड और वरिष्ठता सूची के अनुसार डॉ. नरेश गोन्नाड़े की जाति ‘हलबा’ अनुसूचित जनजाति के रूप में दर्ज है। मध्यप्रदेश शासन की अधिसूचित अनुसूचित जनजाति सूची में हलबा जाति शामिल है। इसी वर्ग में उन्हें पांढुर्णा सिविल अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर के रूप में नियुक्ति मिली थी।

इसके बाद पदोन्नति के क्रम में 10 फरवरी 2023 को वे छिंदवाड़ा जिले के प्रभारी CMHO बने। बाद में 1 अगस्त 2024 से उन्हें जिला अस्पताल का प्रभारी सिविल सर्जन तथा 1 जुलाई 2025 से सिविल सर्जन-सह-अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया।

मेडिकल ऑफिसर जितेश गोन्नाड़े का EWS प्रमाण पत्र।

मेडिकल ऑफिसर जितेश गोन्नाड़े का EWS प्रमाण पत्र।

बेटे की नियुक्ति में EWS प्रमाण पत्र पर सवाल

शिकायत के अनुसार, डॉ. गोन्नाड़े के बेटे जितेश गोन्नाड़े ने MBBS की पढ़ाई पूरी करने के बाद पांढुर्णा के सिराठा उप स्वास्थ्य केंद्र में संविदा मेडिकल ऑफिसर पद के लिए आवेदन किया। आवेदन के साथ EWS प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया।

शिकायत में कहा गया है कि EWS आरक्षण केवल ऐसे अभ्यर्थियों के लिए है, जो SC, ST और OBC श्रेणी में शामिल नहीं हैं तथा आय और संपत्ति संबंधी मानकों को पूरा करते हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस मामले में इन पात्रता शर्तों का पालन नहीं किया गया।

आय और संपत्ति पर भी उठाए गए सवाल

शिकायत में दावा किया गया है कि डॉ. गोन्नाड़े क्लास-वन अधिकारी हैं और उनका वार्षिक वेतन लगभग 19 लाख रुपए है। साथ ही पांढुर्णा स्थित उनका निजी मकान भी EWS पात्रता के लिए निर्धारित सीमा से बड़ा बताया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन तथ्यों के बावजूद EWS प्रमाण पत्र कैसे जारी हुआ, इसकी जांच होना चाहिए।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि प्रमाण पत्र जारी करते समय सक्षम अधिकारी के समक्ष कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे और किन तथ्यों के आधार पर पात्रता तय की गई थी। यही जांच का प्रमुख विषय माना जा रहा है।

जितेश गोन्नाड़े की जाति हलबा का उल्लेख 17 नंबर पर दर्ज है।

जितेश गोन्नाड़े की जाति हलबा का उल्लेख 17 नंबर पर दर्ज है।

दस्तावेजों में ‘हलबा’ का उल्लेख, फिर भी EWS का दावा

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि EWS प्रमाण पत्र के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में जितेश गोन्नाड़े की जाति ‘हलबा’ अंकित है। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित जाति अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अथवा अन्य पिछड़ा वर्ग में अधिसूचित नहीं है। शिकायतकर्ता का कहना है कि मध्यप्रदेश में हलबा जाति पहले से अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल है। इसी आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।

पहले भी विवादों में रहा है CMHO कार्यालय

डॉ. नरेश गोन्नाड़े का नाम पहले भी विवादों में आ चुका है। संविदा भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष ने प्रदर्शन किया था और लेन-देन के आरोप लगाए थे।

इसके अलावा लोकायुक्त पुलिस ने CMHO कार्यालय में कार्रवाई कर एक कर्मचारी को कथित रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। उस मामले में शिकायतकर्ता ने बयान में आरोप लगाया था कि कंप्यूटर ऑपरेटर ने CMHO के नाम पर रिश्वत की मांग की थी। हालांकि इस मामले में डॉ. गोन्नाड़े के खिलाफ किसी न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध नहीं हुआ है।

CMHO द्वारा पांढुर्णा में अस्पताल खोलने के लिए भवन बनाया जा रहा है।

CMHO द्वारा पांढुर्णा में अस्पताल खोलने के लिए भवन बनाया जा रहा है।

निर्माणाधीन निजी अस्पताल भी चर्चा में

शिकायत में पांढुर्णा में निर्माणाधीन एक बहुमंजिला भवन का भी उल्लेख किया गया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां निजी अस्पताल बनाया जा रहा है, जिसे जितेश गोन्नाड़े से जोड़कर देखा जा रहा है।

इस संबंध में पूछे जाने पर डॉ. गोन्नाड़े ने कहा कि वे सेवानिवृत्ति के बाद चिकित्सा सेवा जारी रखना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से अस्पताल का निर्माण कराया जा रहा है।

CMHO बोले- बेटा सामान्य वर्ग से पढ़ा, उसी श्रेणी में नौकरी मिली

डॉ. नरेश गोन्नाड़े ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उनके बेटे ने शुरू से सामान्य वर्ग से पढ़ाई की है और सामान्य वर्ग में ही उसकी नियुक्ति हुई है। उन्होंने कहा कि उनका बेटा उनसे अलग रहता है, इसलिए उसकी पात्रता का निर्धारण स्वतंत्र रूप से हुआ। उनका यह भी कहना है कि अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र बनने में आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण बेटे ने सामान्य वर्ग का विकल्प चुना।

इस मामले में जितेश गोन्नाड़े का कहना है कि उनके द्वारा 2021 में अलग राशन कार्ड बनवाया गया था जिसमें वह अपने पिता से अलग हैं और उनका चयन 2023 की भर्ती में हुआ है इसलिए ईडब्ल्यूएस का उन्होंने अपने लिए प्रमाण पत्र बनवाया वहीं पांढुर्णा के अस्पताल पर उन्होंने कहा कि वह अभी अंडर कंस्ट्रक्शन है निर्माण होने के बाद तय होगा कि उसका संचालन कैसे होगा पापा रिटायर होने के बाद उसे संचालित करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पापा उनके साथ नहीं रहते वह तो छिंदवाड़ा में रहते हैं

अब शासन के फैसले पर नजर

भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रमेश पोफली ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य), स्वास्थ्य मंत्री और कलेक्टर को दस्तावेजों सहित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्रमाण पत्र और नियुक्ति प्रक्रिया नियमों के अनुरूप है तो जांच में यह स्पष्ट हो जाएगा, और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *