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शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। सुखबीर बादल सुबह ही दिल्ली पहुंचे थे और पार्लियामेंट हाउस में पीएम मोदी से मिले। दोनों नेताओं की इस मुलाकात के बाद पंजाब की राजनीति गर्मा गई है। पंजाब विधानसभा चुनाव में अब करीब 4 महीने का समय बचा है। ऐसे में इस मुलाकात को चुनाव से पहले अहम माना जा रहा है। इसके साथ ही अकाली दल और BJP के बीच गठबंधन की चर्चा भी तेज हो गई है, माना जा रहा है कि अब गठबंधन फाइनल हो सकता है। इधर, दोनों नेताओं की मुलाकात के बीच दिल्ली के पूर्व CM अरविंद केजरीवाल ने तंज कसते हुए लिखा- ना ना करते प्यार तुम्ही से कर बैठे……तो क्या चन्दा चोर पार्टी और बेअदबी पार्टी का गठबंधन हो रहा है? गठबंधन का पिछले चुनावों में कैसा प्रदर्शन रहा भाजपा और शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन करीब 3 दशक तक पंजाब की राजनीति की सबसे सफल चुनावी गठजोड़ों में रहा। दोनों दलों ने 1997, 2007 और 2012 में मिलकर सरकार बनाई। भाजपा-अकाली गठबंधन की कामयाबी का राज क्या था भाजपा-अकाली गठबंधन की सबसे बड़ी ताकत दोनों दलों का अलग-अलग वोट बैंक था। अकाली दल की पकड़ ग्रामीण, किसान और पंथक इलाकों में थी, जबकि भाजपा शहरों और शहरी हिंदू मतदाताओं के बीच मजबूत थी। दोनों दलों के साथ आने से गांव और शहर का चुनावी समीकरण बन जाता था। दूसरी बड़ी वजह थी तय सीट शेयरिंग और मजबूत संगठन। लंबे समय तक अकाली दल 94 और भाजपा 23 सीटों पर चुनाव लड़ती रही। दोनों पार्टियां अपने-अपने मजबूत क्षेत्रों में चुनाव लड़ती थीं और कार्यकर्ताओं के स्तर पर भी एक-दूसरे का साथ मिलता था। गठबंधन की वजह से दोनों दलों का वोट बंटने के बजाय एक जगह ट्रांसफर होता था और कई सीटों पर मुकाबला मजबूत बन जाता था। यही समीकरण 2012 में गठबंधन की बड़ी जीत का आधार बना, जब दोनों दलों ने मिलकर 68 सीटें जीतकर सरकार बनाई। लेकिन 2022 में गठबंधन टूटने के बाद दोनों का वोट अलग-अलग बंट गया और दोनों दल दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाए। भाजपा-अकाली गठबंधन टूटने का विरोधियों पर असर
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सुखबीर बादल PM मोदी से मिलने दिल्ली पहुंचे:पंजाब चुनाव में अकाली+BJP गठजोड़ फाइनल होने के संकेत; केजरीवाल बोले- ना ना करते प्यार तुम्ही से कर बैठे
